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सता से जीत गए थे, पर अफसरशाही ने हरा दिया
Updated Sat, 24 Jun 2017 10:51 PM IST
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सत्ता को हराकर अफसरशाही से हार गए
लोकतंत्र सेनानियों को कागजों पर ही मिल रही सुविधाएं
आपातकाल का विरोध करने पर डीआईआर/मीसा के तहत गए थे जेल
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। 1975 में आपातकाल के समय देश में लोकतंत्र बरकरार रखने के लिए जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों को कोई पुरसाहाल नहीं है। उन्हें जो सुविधाएं शासन से मिलनी थीं, वे केवल कागजों में ही मिल रही हैं। इसके लिए कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। सुविधाएं पाने के लिए थक हार चुके लोकतंत्र सेनानी का दर्द बयां करते हुए कहा कि सत्ता से जाीत गए थे लेकिन अफसरशाही ने उन्हें हरा दिया।
25 जून 1975 को आपातकाल लागू होने के बाद जिले में करीब चार दर्जन से अधिक लोग डीआईआर/मीसा के तहत जेल गए थे। 2006 में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इनके लिए निशुल्क परिवहन व चिकित्सा सेवाओं के साथ 500 रुपये प्रतिमाह सम्मान राशि देने का आदेश दिया था। सम्मान राशि तो कोषागार से मिलनी थी, वह मिलने लगी लेकिन सुविधाओं में अफसरशाही हावी हो गई। बाद में 2016 में अखिलेश सिंह यादव की सरकार आई तो विधेयक 2016 पारित हुआ जिसमें निशुल्क चिकित्सा, परिवहन सुविधा, सम्मान रािश 15 हजार प्रतिमाह करने के अलावा मृत्योपरांत राष्ट्रीय सम्मान देने तथा उनके उत्तराधिकारी सम्मानराशि देने की सुविधा प्रदान की। बावजूद इसके हालत तब भी नही सुधरी। हालत यह है कि जब राजकीय चिकित्सालयों में कोई लोकतंत्र सेनानी दवा कराने पहुंचता है तो चिकित्सक दवा न होने या फिर बाहर की दवा लिखकर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लेता है जबकि नियमत: यदि दवा बाहर से खरीदने की जरूरत भी पडे़ तो उसे सरकारी खर्च पर खरीदकर लोकतंत्र सेनानी का इलाज किया जाना चाहिए। । यही हालत परिवहन निगम के बसों की है जहां लोकतंत्र सेनानी को अपने एक सह यात्री के साथ निशुल्क यात्रा का अधिकार है लेकिन दीन हीन हालत देखकर परिचालक व चालक उतार देते हैं।
बाक्स
आवाज उठाई पर हुआ कुछ नहीं
फोटो 14
लोकतंत्र सेनानी रक्षक दल के अध्यक्ष रविचंद्र त्रिपाठी का कहना है कि परिवहन, चिकित्सा सहित अन्य सुविधाओं के लिए कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई सुनवाई नही ंहै। अभी दो माह पहले उन लोगों ने इन शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी से मिलकर ज्ञापन सौंपा था लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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इनसेट
संघर्षों का ऐसा सिला, क्यों कोई वफा करेगा
फोटो 15
लोकतंत्र सेनानी कमरुद्दीन का कहना था कि आपातकाल में लोकतंत्र को बचाने के लिए जिस तरह से उन्होंने संघर्ष किया था, उसका ऐसा सिला मिलेगा, सोचा नहीं था। सम्मान राशि को छोड़कर अन्य सुविधाएं तो केवल कागजों में मिल रही हैं। अस्पतालों में चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी ठीक से व्यवहार नहीं करते हैं। परिवहन निगम की बसों में आए दिन अपमानित किया जाता है। किसी के भी संघर्षों का ऐसा सिला मिलेगा तो क्यों कोई वफा करेगा। इसी तरह छोटेलाल दीक्षित, रमापति, जटाशंकर पांडेय को सुविधाएं न मिलने का मलाल दिखा।
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लोकतंत्र सेनानियों को कागजों पर ही मिल रही सुविधाएं
आपातकाल का विरोध करने पर डीआईआर/मीसा के तहत गए थे जेल
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। 1975 में आपातकाल के समय देश में लोकतंत्र बरकरार रखने के लिए जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों को कोई पुरसाहाल नहीं है। उन्हें जो सुविधाएं शासन से मिलनी थीं, वे केवल कागजों में ही मिल रही हैं। इसके लिए कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। सुविधाएं पाने के लिए थक हार चुके लोकतंत्र सेनानी का दर्द बयां करते हुए कहा कि सत्ता से जाीत गए थे लेकिन अफसरशाही ने उन्हें हरा दिया।
25 जून 1975 को आपातकाल लागू होने के बाद जिले में करीब चार दर्जन से अधिक लोग डीआईआर/मीसा के तहत जेल गए थे। 2006 में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इनके लिए निशुल्क परिवहन व चिकित्सा सेवाओं के साथ 500 रुपये प्रतिमाह सम्मान राशि देने का आदेश दिया था। सम्मान राशि तो कोषागार से मिलनी थी, वह मिलने लगी लेकिन सुविधाओं में अफसरशाही हावी हो गई। बाद में 2016 में अखिलेश सिंह यादव की सरकार आई तो विधेयक 2016 पारित हुआ जिसमें निशुल्क चिकित्सा, परिवहन सुविधा, सम्मान रािश 15 हजार प्रतिमाह करने के अलावा मृत्योपरांत राष्ट्रीय सम्मान देने तथा उनके उत्तराधिकारी सम्मानराशि देने की सुविधा प्रदान की। बावजूद इसके हालत तब भी नही सुधरी। हालत यह है कि जब राजकीय चिकित्सालयों में कोई लोकतंत्र सेनानी दवा कराने पहुंचता है तो चिकित्सक दवा न होने या फिर बाहर की दवा लिखकर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लेता है जबकि नियमत: यदि दवा बाहर से खरीदने की जरूरत भी पडे़ तो उसे सरकारी खर्च पर खरीदकर लोकतंत्र सेनानी का इलाज किया जाना चाहिए। । यही हालत परिवहन निगम के बसों की है जहां लोकतंत्र सेनानी को अपने एक सह यात्री के साथ निशुल्क यात्रा का अधिकार है लेकिन दीन हीन हालत देखकर परिचालक व चालक उतार देते हैं।
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आवाज उठाई पर हुआ कुछ नहीं
फोटो 14
लोकतंत्र सेनानी रक्षक दल के अध्यक्ष रविचंद्र त्रिपाठी का कहना है कि परिवहन, चिकित्सा सहित अन्य सुविधाओं के लिए कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई सुनवाई नही ंहै। अभी दो माह पहले उन लोगों ने इन शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी से मिलकर ज्ञापन सौंपा था लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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संघर्षों का ऐसा सिला, क्यों कोई वफा करेगा
फोटो 15
लोकतंत्र सेनानी कमरुद्दीन का कहना था कि आपातकाल में लोकतंत्र को बचाने के लिए जिस तरह से उन्होंने संघर्ष किया था, उसका ऐसा सिला मिलेगा, सोचा नहीं था। सम्मान राशि को छोड़कर अन्य सुविधाएं तो केवल कागजों में मिल रही हैं। अस्पतालों में चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी ठीक से व्यवहार नहीं करते हैं। परिवहन निगम की बसों में आए दिन अपमानित किया जाता है। किसी के भी संघर्षों का ऐसा सिला मिलेगा तो क्यों कोई वफा करेगा। इसी तरह छोटेलाल दीक्षित, रमापति, जटाशंकर पांडेय को सुविधाएं न मिलने का मलाल दिखा।