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12.7 करोड़ से चमकेंगे 3140 परिषदीय स्कूल
Updated Thu, 27 Sep 2018 01:16 AM IST
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12.7 करोड़ से चमकेंगे 3140 परिषदीय स्कूल
गोंडा। परिषदीय स्कूलों को संवारने के लिए 12.7 करोड़ का बजट जिले को मिला है। अभी तक स्कूल विकास अनुदान निधि से अलग और रंगाई-पुताई के लिए अलग बजट मिलता था अब सरकार ने दोनों को एक साथ कर दिया और स्कूलों के विकास के लिए छात्र संख्या के आधार पर बजट जारी किया है।
जिन स्कूलों में अधिक छात्र हैं वहां के लिए अब अधिक बजट मिलेगा। उन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को झटका मिला है जो नामांकन करने में कोताही बरत रहे हैं।
शासन ने नामांकन के लिए बेहतर कार्य करने वालों को बजट का सौगात दिया है। जिले के 3140 प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों के लिए बजट जारी हुआ है। जल्द ही स्कूलों के प्रबंध समिति के खातों में बजट भेजा जाएगा। बजट के खर्चों पर अब कड़ी नजर भी रहेगी।
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स्कूलों के रंगाई-पुताई और छोटे-मोटे कार्यों के लिए प्रधानाध्यापकों को विभाग का मुंह देखना पड़ता था। साल में एक बार रंगाई-पुताई के लिए 5 से 7 हजार रुपए ही मिलते थे। इससे कई कार्य नही हो पाते थे।
स्कूल अनुदान में भी मामूली बजट ही मिलता था। इससे स्कूलों में दरवाजा टूटने या फिर साफ-सफाई के लिए शिक्षकों को अपने पास से भी खर्च लगाना पड़ता था।
कुछ लोग तो काम कराते थे लेकिन बहुत से लोग ज्यादा ध्यान नही देते थे। शासन ने स्कूलों के स्थिति का सर्वे कराया तो कठिनाई की जानकारी हुई। अब पर्याप्त बजट देने के लिए छात्र संख्या को आधार बनाया।
प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों के लिए एक ही मानक तय
जिले के 2237 प्राइमरी स्कूल, 2 कम्पोजिट स्कूल और 901 जूनियर हाईस्कूलों के लिए स्कूल विकास का बजट तय हुआ है। जिले में 1 से 15 छात्र संख्या वाले 11 स्कूलों को 12 हजार 500 रुपए प्रति स्कूल की दर से एक लाख 37500 रुपए का बजट मिला है।
इसी तरह 15 से 100 छात्र संख्या वाले 1480 स्कूलों को प्रति स्कूल 25 हजार रुपए की दर से 3 करोड़ 70 हजार रुपए, 100 से 250 छात्र संख्या वाले 1603 स्कूलों को 50 हजार रुपए प्रति स्कूल की दर से 8 करोड 1 लाख 50 हजार रुपए, 250 से 1000 तक की छात्र संख्या वाले 46 स्कूलों को 75 हजार रुपए प्रति स्कूल की दर से 34 लाख 500 रुपए का बजट मिला है। 1000 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूल को एक लाख रुपए मिलना है लेकिन जिले में एक भी स्कूल इस मानम में नही है।
छात्र नामांकन में चूके तो फिर घटेगा स्कूल का बजट
शासन के मानक से कई प्रधानाध्यापकों को झटका लगा है एक दो कम नामांकन से ही आधा बजट घट गया। इस बार भी अभी 30 सितम्बर तक अवसर है छात्र संख्या ठीक कर लिया तो आने वाले सालों में पर्याप्त बजट मिल जाएगा।
कम छात्र संख्या रहा तो फिर हाथ मलते रहेंगे। कुछ प्रधानाध्यापक तो ऐसे हैं जो अपने स्कूल के सहायक शिक्षकों को सरप्लस कराने की नियत से ही छात्रों का नामाकंन नही करते हैं उन्हे अब नामांकन की कीमत का पता चला है।
स्कूलों को जल्द ही आवंटित बजट भेज दिया जाएगा। स्कूलों को ब्यौरा मांगा गया है। स्कूलों को पर्याप्त बजट मिला है अब स्कूल का परिसर और वातावरण बेहतर बनाने के लिए अभियान भी चलेगा।
-मनिराम सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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गोंडा। परिषदीय स्कूलों को संवारने के लिए 12.7 करोड़ का बजट जिले को मिला है। अभी तक स्कूल विकास अनुदान निधि से अलग और रंगाई-पुताई के लिए अलग बजट मिलता था अब सरकार ने दोनों को एक साथ कर दिया और स्कूलों के विकास के लिए छात्र संख्या के आधार पर बजट जारी किया है।
जिन स्कूलों में अधिक छात्र हैं वहां के लिए अब अधिक बजट मिलेगा। उन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को झटका मिला है जो नामांकन करने में कोताही बरत रहे हैं।
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शासन ने नामांकन के लिए बेहतर कार्य करने वालों को बजट का सौगात दिया है। जिले के 3140 प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों के लिए बजट जारी हुआ है। जल्द ही स्कूलों के प्रबंध समिति के खातों में बजट भेजा जाएगा। बजट के खर्चों पर अब कड़ी नजर भी रहेगी।
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स्कूलों के रंगाई-पुताई और छोटे-मोटे कार्यों के लिए प्रधानाध्यापकों को विभाग का मुंह देखना पड़ता था। साल में एक बार रंगाई-पुताई के लिए 5 से 7 हजार रुपए ही मिलते थे। इससे कई कार्य नही हो पाते थे।
स्कूल अनुदान में भी मामूली बजट ही मिलता था। इससे स्कूलों में दरवाजा टूटने या फिर साफ-सफाई के लिए शिक्षकों को अपने पास से भी खर्च लगाना पड़ता था।
कुछ लोग तो काम कराते थे लेकिन बहुत से लोग ज्यादा ध्यान नही देते थे। शासन ने स्कूलों के स्थिति का सर्वे कराया तो कठिनाई की जानकारी हुई। अब पर्याप्त बजट देने के लिए छात्र संख्या को आधार बनाया।
प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों के लिए एक ही मानक तय
जिले के 2237 प्राइमरी स्कूल, 2 कम्पोजिट स्कूल और 901 जूनियर हाईस्कूलों के लिए स्कूल विकास का बजट तय हुआ है। जिले में 1 से 15 छात्र संख्या वाले 11 स्कूलों को 12 हजार 500 रुपए प्रति स्कूल की दर से एक लाख 37500 रुपए का बजट मिला है।
इसी तरह 15 से 100 छात्र संख्या वाले 1480 स्कूलों को प्रति स्कूल 25 हजार रुपए की दर से 3 करोड़ 70 हजार रुपए, 100 से 250 छात्र संख्या वाले 1603 स्कूलों को 50 हजार रुपए प्रति स्कूल की दर से 8 करोड 1 लाख 50 हजार रुपए, 250 से 1000 तक की छात्र संख्या वाले 46 स्कूलों को 75 हजार रुपए प्रति स्कूल की दर से 34 लाख 500 रुपए का बजट मिला है। 1000 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूल को एक लाख रुपए मिलना है लेकिन जिले में एक भी स्कूल इस मानम में नही है।
छात्र नामांकन में चूके तो फिर घटेगा स्कूल का बजट
शासन के मानक से कई प्रधानाध्यापकों को झटका लगा है एक दो कम नामांकन से ही आधा बजट घट गया। इस बार भी अभी 30 सितम्बर तक अवसर है छात्र संख्या ठीक कर लिया तो आने वाले सालों में पर्याप्त बजट मिल जाएगा।
कम छात्र संख्या रहा तो फिर हाथ मलते रहेंगे। कुछ प्रधानाध्यापक तो ऐसे हैं जो अपने स्कूल के सहायक शिक्षकों को सरप्लस कराने की नियत से ही छात्रों का नामाकंन नही करते हैं उन्हे अब नामांकन की कीमत का पता चला है।
स्कूलों को जल्द ही आवंटित बजट भेज दिया जाएगा। स्कूलों को ब्यौरा मांगा गया है। स्कूलों को पर्याप्त बजट मिला है अब स्कूल का परिसर और वातावरण बेहतर बनाने के लिए अभियान भी चलेगा।
-मनिराम सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी