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शिकायत दबाने में नगर के 10 चौकी प्रभारी व 20 सिपाही डिफाल्टर
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गोंडा। जनता को न्याय के लिए मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई पोर्टल शुरू कर रखी है। आम लोगों की ओर से किए जा रहे शिकायतों की समीक्षा सीधे सीएम हेल्पलाइन सेंटर से होती है।
इसके बाद भी लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है, और पुलिस अधीक्षक के दरबार में शिकायत कर्ताओं की भीड़ जुटती है। जन सुनाई पोर्टल की शिकायतों का निस्तारण न करने वाले नगर क्षेत्र के दस चौकी प्रभारी और 20 सिपाही चिह्नित किए गए हैं। सीएम पोर्टल ने इन पुलिस कर्मियों को डिफाल्टर घोषित कर दिया है।
कोरोना संकट में जन सुनवाई पोर्टल से न्याय दिलाने की व्यवस्था काफी कारगर मानी जा रही है। जिले का हाल यह है कि सिर्फ नगर पुलिस की स्थिति पर गौर करें तो कई खामियां उजागर हुई हैं।
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नगर के दस पुलिस चौकियों के प्रभारियों और नगर के 20 सिपाही शिकायतें दबाए ही बैठे हैं। इसका खुलासा आनलाइन मानीटरिंग से हुई है, और पोर्टल ने इन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया है। पुलिस विभाग इन मामलों की समीक्षा कर रहा है।
शिकायतों का निस्तारण करने में फिसड्डी रहने पर नगर के चौकी प्रभारियों और सिपाहियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डिफाल्टर घोषित होने से अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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इसके बाद भी लोगों को न्याय नहीं मिल रहा है, और पुलिस अधीक्षक के दरबार में शिकायत कर्ताओं की भीड़ जुटती है। जन सुनाई पोर्टल की शिकायतों का निस्तारण न करने वाले नगर क्षेत्र के दस चौकी प्रभारी और 20 सिपाही चिह्नित किए गए हैं। सीएम पोर्टल ने इन पुलिस कर्मियों को डिफाल्टर घोषित कर दिया है।
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कोरोना संकट में जन सुनवाई पोर्टल से न्याय दिलाने की व्यवस्था काफी कारगर मानी जा रही है। जिले का हाल यह है कि सिर्फ नगर पुलिस की स्थिति पर गौर करें तो कई खामियां उजागर हुई हैं।
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नगर के दस पुलिस चौकियों के प्रभारियों और नगर के 20 सिपाही शिकायतें दबाए ही बैठे हैं। इसका खुलासा आनलाइन मानीटरिंग से हुई है, और पोर्टल ने इन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया है। पुलिस विभाग इन मामलों की समीक्षा कर रहा है।
शिकायतों का निस्तारण करने में फिसड्डी रहने पर नगर के चौकी प्रभारियों और सिपाहियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डिफाल्टर घोषित होने से अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है।