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शहरों में दस तो गांवो में 12 घंटो तक बिजली कटौती, मचा हाहाकार
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गोंडा के सुभागपुर उपकेंद्र के पास बिजली का फाल्ट ठीक करता लाइनमैन।
- फोटो : GONDA
गोंडा। शहर से लेकर गांवों तक में इनदिनों बिजली की कटौती चरम पर है। शहरों में करीब दस घंटे तो गांवों में 15 घंटे बिजली की कटौती जारी है। उमस व मच्छरों के प्रकोप से लोगों का जीना दूभर हो गया है। जिम्मेदार अधिकारी सोहावल-गोंडा लाइन बाढ़ की चपेट में आने से बिजली आपूर्ति में समस्या बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं तो लाखों उपभोक्ताओं के पसीने छूट रहे हैं।
शहर से लेकर गांवों तक इस समय बिजली कटौती से हाहाकार मचा हुआ है। शहर के वीआईपी कालोनियों से लेकर मुहल्लों में कटौती चरम पर है। दिन हो या रात बिजली कभी भी गुल हो सकती है।
कई घंटे बत्ती गुल रहती है। भीषण उमस व डेंगू मच्छरों के प्रकोप से आम जनमानस पूरी तरह से परेशान है। शहर में सोमवार रात से लेकर मंगलवार तक बीस बार बिजली की आंख मिचौली देखने को मिला। पिछले एक पखवारे से विद्युत कटौती का सिलसिला शुरू हुआ तो रुकने का नाम नहीं ले रहा है। उमस भरी गर्मी से पूरी तरह बेहाल है।
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कूलर, पंखे व एसी से लोग राहत महसूस कर रहे हैं लेकिन बिजली कट जाने के बाद पसीने से तरबतर हो जाते हैं। उमस भरी गर्मी से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। बिजली की आवाजाही से इंवर्टर भी बंद हो गए। उमस भरी गर्मी व मच्छरों के प्रकोप से लोगों की नींद हराम हो गई। रात भर लोग हाथ का पंखा झलते रहे।
मनकापुर उपकेंद्र से आने वाली विद्युत सप्लाई बीते रविवार रात 10 बजे से अज्ञात कारणों से बाधित है। नियामतपुर, चौखट, सेहरिया, उदयपुर, बेलिया, बभनी गांव समेत करीब आधा दर्जन गांवों की लगभग दस हजार की आबादी अंधेरे में रहने को मजबूर है।
जिम्मेदारों से लोगों का संपर्क नही हो पा रहा है। जेई बृजनंदन यादव का फोन बंद मिला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना उपकेंद्र पर दी है। बहरहाल ग्रामीण इस उमस भरी गर्मी व बरसाती रात में अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
हाल ही में आई बाढ़ की वजह से ऐली परसौली के पास सोहावल से जिले में आने वाली विद्युत लाइन के दो टॉवर सरयू में समा जाने से बिजली व्यवस्था धराशायी हो गई है। वैकल्पिक तौर पर बस्ती जिले से और स्थानीय स्तर पर थर्मल केन्द्रों आईपीपी उतरौला और कुन्दुरखी मिल से आपूर्ति की जाती रही।
कोयले की कमी से आईपीपी उतरौला ने आपूर्ति करना पूर्ण रुप से बंद कर दिया है और कुन्दुरखी केन्द्र भीगे कोयले की वजह से उत्पादन बहुत ही कम कर रही है। पारेषण खंड के एक्सइन के रणवीर सिंह के मुताबिक वैकल्पिक बस्ती जिले की लाइन खुद ओवरलोड होने से आपूर्ति देने से मना कर दिया है। समूचे मंडल की आपूर्ति सिर्फ एक फीडर पावर कार्पोरेशन, सोहावल-गोण्डा से संचालित हो रही है।
जिले में बिजली का संकट अभी लंबा चलने के आसार दिख रहे हैं। जिससे लगभग पूरा अक्टूबर महीना लोगों को बिजली का संकट झेलना पड़ सकता है। पारेषण खंड के एक्सईएन रणवीर सिंह ने बताया कि वैकल्पिक बस्ती जिले की लाइन में सुधार होने तक कटौती का यह संकट बना रहेगा।
इस वैकल्पिक लाइन की सुधार होने की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। लेकिन बकौल, कार्यदाई कंपनी की ओर से बताया गया है कि पहले ओवरलोड खत्म किया जाएगा, और इसमें 20 अक्टूबर से लाइन में सुधार आ सकता है।
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शहर से लेकर गांवों तक इस समय बिजली कटौती से हाहाकार मचा हुआ है। शहर के वीआईपी कालोनियों से लेकर मुहल्लों में कटौती चरम पर है। दिन हो या रात बिजली कभी भी गुल हो सकती है।
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कई घंटे बत्ती गुल रहती है। भीषण उमस व डेंगू मच्छरों के प्रकोप से आम जनमानस पूरी तरह से परेशान है। शहर में सोमवार रात से लेकर मंगलवार तक बीस बार बिजली की आंख मिचौली देखने को मिला। पिछले एक पखवारे से विद्युत कटौती का सिलसिला शुरू हुआ तो रुकने का नाम नहीं ले रहा है। उमस भरी गर्मी से पूरी तरह बेहाल है।
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कूलर, पंखे व एसी से लोग राहत महसूस कर रहे हैं लेकिन बिजली कट जाने के बाद पसीने से तरबतर हो जाते हैं। उमस भरी गर्मी से लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। बिजली की आवाजाही से इंवर्टर भी बंद हो गए। उमस भरी गर्मी व मच्छरों के प्रकोप से लोगों की नींद हराम हो गई। रात भर लोग हाथ का पंखा झलते रहे।
मनकापुर उपकेंद्र से आने वाली विद्युत सप्लाई बीते रविवार रात 10 बजे से अज्ञात कारणों से बाधित है। नियामतपुर, चौखट, सेहरिया, उदयपुर, बेलिया, बभनी गांव समेत करीब आधा दर्जन गांवों की लगभग दस हजार की आबादी अंधेरे में रहने को मजबूर है।
जिम्मेदारों से लोगों का संपर्क नही हो पा रहा है। जेई बृजनंदन यादव का फोन बंद मिला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना उपकेंद्र पर दी है। बहरहाल ग्रामीण इस उमस भरी गर्मी व बरसाती रात में अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
हाल ही में आई बाढ़ की वजह से ऐली परसौली के पास सोहावल से जिले में आने वाली विद्युत लाइन के दो टॉवर सरयू में समा जाने से बिजली व्यवस्था धराशायी हो गई है। वैकल्पिक तौर पर बस्ती जिले से और स्थानीय स्तर पर थर्मल केन्द्रों आईपीपी उतरौला और कुन्दुरखी मिल से आपूर्ति की जाती रही।
कोयले की कमी से आईपीपी उतरौला ने आपूर्ति करना पूर्ण रुप से बंद कर दिया है और कुन्दुरखी केन्द्र भीगे कोयले की वजह से उत्पादन बहुत ही कम कर रही है। पारेषण खंड के एक्सइन के रणवीर सिंह के मुताबिक वैकल्पिक बस्ती जिले की लाइन खुद ओवरलोड होने से आपूर्ति देने से मना कर दिया है। समूचे मंडल की आपूर्ति सिर्फ एक फीडर पावर कार्पोरेशन, सोहावल-गोण्डा से संचालित हो रही है।
जिले में बिजली का संकट अभी लंबा चलने के आसार दिख रहे हैं। जिससे लगभग पूरा अक्टूबर महीना लोगों को बिजली का संकट झेलना पड़ सकता है। पारेषण खंड के एक्सईएन रणवीर सिंह ने बताया कि वैकल्पिक बस्ती जिले की लाइन में सुधार होने तक कटौती का यह संकट बना रहेगा।
इस वैकल्पिक लाइन की सुधार होने की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। लेकिन बकौल, कार्यदाई कंपनी की ओर से बताया गया है कि पहले ओवरलोड खत्म किया जाएगा, और इसमें 20 अक्टूबर से लाइन में सुधार आ सकता है।