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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   The role of guru is not limited to spirituality or religiosity only.

गुरु की भूमिका सिर्फ आध्यात्म या धार्मिकता तक ही सीमित नहीं

Sat, 24 Jul 2021 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 11:15 PM IST
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The role of guru is not limited to spirituality or religiosity only.
भक्तों को संबोधित करते हुए सिद्धपीठ हथियाराम मठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति। - फोटो : GHAZIPUR
गाजीपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर श्रद्धालुओं ने शनिवार को जिले भर के मठ, मंदिर एवं आश्रमों के संत, महात्माओं, मठाधीश एवं गुरुओं का दर्शन-पूजन किया। इस बार कोरोना के चलते कार्यक्रम वर्चुअल ही होना था लेकिन जो शिष्य या श्रद्धालु गुरु का दर्शन करने के लिए पहुंचे, उन्होंने कोरोना लाइडलाइन का पालन करते हुए दर्शन-पूजन किया। विभिन्न स्थलों पर बैरिकेटिंग और सामाजिक दूरी की व्यवस्था की गई थी। कोरोना अनुशासन में रहकर ही लोगों ने गुरु से आशीष प्राप्त की।
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गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु की कृपा के बिना भगवान की प्राप्ति असंभव है। जिनके दर्शन मात्र से मन प्रसन्न होता है, अपने आप धैर्य और शांति आ जाती हैं, वे परम गुरु हैं। गुरु की भूमिका भारत में केवल आध्यात्म या धार्मिकता तक ही सीमित नहीं रही है, देश पर राजनीतिक विपदा आने पर गुरु ने देश को उचित सलाह देकर विपदा से उबारा भी है। यह बात महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।
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कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री यति जी महाराज ने वैदिक रीति रिवाज से अपने ब्रह्मलीन गुरु व जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी बालकृष्ण यति जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण व आरती कर पूजन अर्चन किया। इसके साथ ही उन्होंने सिद्धपीठ के ब्रह्मलीन 25 पीठाधिपतियों के साथ ही सभी संत महात्मा गुरुजनों का पूजन-अर्चन कर नमन किया।
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उन्होंने कहा कि उनके द्वारा द्वादश ज्योतिर्लिंग व नेपाल स्थित पशुपतिनाथ सहित 20 से अधिक धार्मिक तीर्थस्थलों पर 300 से अधिक वैदिक विद्वानों के साथ चतुर्मासअनुष्ठान संपादित किए जा चुके हैं। लेकिन पिछले छह वर्षों से सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर बुढ़िया माई के सानिध्य में किए जाने वाले चातुर्मास अनुष्ठान से एक अलौकिक शांति प्राप्त होती है।
मां से बड़ा कोई गुरु नहीं
जखनियां। नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गति:। नास्ति मातृसमा त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया। अर्थात माता के समान छाया नहीं है और न ही माता के समान कोई गति है। माता के समान कोई रक्षक नहीं है और न ही माता के समान कोई प्रिय है। ये बातें महामंडलेश्वर भवानी नंदन यति जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर माता के महत्व का बखान करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जब तीन उत्तम शिक्षक, एक माता, दूसरा पिता और तीसरा आचार्य हो तभी मनुष्य ज्ञानवान होगा। बच्चा जन्म लेने के बाद जब बोलना सीखता है तब वह सबसे पहले जो शब्द बोलता है वो शब्द होता है मां। एक मां ही बच्चे को बोलना, खाना-पीना, चलना-फिरना आदि सिखाती है इसलिए एक मां ही हर मनुष्य की प्रथम गुरु होती है।

श्रद्धालुओं ने किया कोरोना प्रोटोकॉल का पालन
जखनियां। स्थानीय सिद्धपीठ हथियाराम मठ व सिद्धपीठ भुड़कुड़ा मठ पर गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजा के लिए शिष्य श्रद्धालुओं के बीच कोरोना प्रोटोकॉल का असर विशेष रूप से देखने को मिला। गौरतलब हो कि लगभग 700 वर्ष प्राचीन सिद्धपीठ हथियाराम मठ सिद्ध संतों की तपस्थली के रूप में विख्यात है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरुजनों के आशीर्वाद के साथ ही सिद्धपीठ द्वारा आयोजित महाप्रसाद भंडारे में कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में ब्रह्मचारी संत डॉ. रत्नाकर त्रिपाठी, आचार्य संजय पांडेय, आचार्य सुरेश जी त्रिपाठी, संत देवरहा बाबा, वरुण देव सिंह, जितेंद्र सिंह वैभव, अमिता दुबे, राजेन्द्र सिंह, अमित सिंह, रमाशंकर राजभर, सन्त देवरहा बाबा, राजेश यादव, संतोष यादव, रमेश यादव सहित काफी संख्या में लोग रहे।
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