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पंचायत कराकर मामले को रफा-दफा करने जुटी थी पुलिस
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शादियाबाद। भदौरा उर्फ घिनहा गांव में कैलाश यादव को पीटकर मार डालने के मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। युवक किशोरी को फोन करके तंग करता था। इस मामले में किशोरी के परिजनों ने 18, 20 और 21 फरवरी को तीन बार तहरीर दी लेकिन पुलिस ने मुकदमा नहीं दर्ज किया। पुलिस कार्रवाई करने के बजाय पंचायत करके मामले को रफादफा करने में जुटी थी।
कैलाश यादव के तीन पुत्र अरविंद, अनिल और सुनील परिवार के साथ मुंबई में रहकर कामकाज करते हैं। पिता के हत्या की सूचना पर तीनों पुत्र गांव के लिए परिवार के साथ रवाना हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि किशोरी की मां नहीं है। पिता के काम पर चले जाने के बाद एक युवक फोन करके उसे परेशान करता था। किशोरी ने इसकी शिकायत अपने पिता से की तो वह युवक के घर उसे समझाने पहुंचे लेकिन युवक ने उल्टे उन्हें की मारने के लिए दौड़ा लिया। हारकर उन्होंने 18 फरवरी को पुलिस को तहरीर दी। कोई कार्रवाई नहीं की गई तो 20 फरवरी को दोबारा तहरीर दी। उसके बाद सिर्फ डायल 112 की पुलिस पहुंची और गांव में घूमकर चली गई। उसके बाद 21 फरवरी को वे फिर थाने में शिकायत करने पहुंचे तो हल्का पुलिस सब इंस्पेक्टर के साथ पहुंची। गांव पहुंचने के बाद पुलिस वाले पंचायत करके मामले को रफा-दफा में जुट गए। पंचायत में किशोरी के चचेरे दादा कैलाश यादव ने कुछ कह दिया था। इसी बात से खफा होकर आरोपियों ने उनको पीटकर मार डाला। अगर पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेती और कार्रवाई की होती तो शायद हत्या की घटना नहीं होती। स्थानीय पुलिस की लापरवाही से इस तरह की घटना हुई है।
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कैलाश यादव के तीन पुत्र अरविंद, अनिल और सुनील परिवार के साथ मुंबई में रहकर कामकाज करते हैं। पिता के हत्या की सूचना पर तीनों पुत्र गांव के लिए परिवार के साथ रवाना हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि किशोरी की मां नहीं है। पिता के काम पर चले जाने के बाद एक युवक फोन करके उसे परेशान करता था। किशोरी ने इसकी शिकायत अपने पिता से की तो वह युवक के घर उसे समझाने पहुंचे लेकिन युवक ने उल्टे उन्हें की मारने के लिए दौड़ा लिया। हारकर उन्होंने 18 फरवरी को पुलिस को तहरीर दी। कोई कार्रवाई नहीं की गई तो 20 फरवरी को दोबारा तहरीर दी। उसके बाद सिर्फ डायल 112 की पुलिस पहुंची और गांव में घूमकर चली गई। उसके बाद 21 फरवरी को वे फिर थाने में शिकायत करने पहुंचे तो हल्का पुलिस सब इंस्पेक्टर के साथ पहुंची। गांव पहुंचने के बाद पुलिस वाले पंचायत करके मामले को रफा-दफा में जुट गए। पंचायत में किशोरी के चचेरे दादा कैलाश यादव ने कुछ कह दिया था। इसी बात से खफा होकर आरोपियों ने उनको पीटकर मार डाला। अगर पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेती और कार्रवाई की होती तो शायद हत्या की घटना नहीं होती। स्थानीय पुलिस की लापरवाही से इस तरह की घटना हुई है।
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