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गृहस्थ आश्रम सबसे श्रेष्ठ : महाराज
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जमानिया। जय गुरुदेव संस्था की ओर से शनिवार को मलसा स्थित एक मैरेज हाल में सत्संग का आयोजन किया गया। संत पंकज महाराज ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे श्रेष्ठ आश्रम है। मनुष्य को इसी में रहकर मेहनत और ईमानदारी से अपना जीवन यापन करना चाहिए। 24 घंटे में से कम से कम एक-दो घंटे का समय निकालकर भगवान की भक्ति करें, ताकि आत्मा का कल्याण हो सके।
उन्होंने कहा कि मां के गर्भ में जीवात्मा ने भगवान से भजन करने का वादा किया था, लेकिन जन्म लेने के बाद माया के प्रभाव में वह वादा भूल गया। मनुष्य पूरा जीवन भौतिक वस्तुओं को जुटाने में लगा देता है, जबकि मृत्यु के समय शरीर और दौलत यही रह जाती है।
अंत समय में जीवात्मा की पीड़ा में कोई मदद नहीं कर पाता, केवल सत्कर्म ही साथ जाते हैं। हिंसा, अपराध और अशुद्ध खान-पान से नफरत के अलावा कुछ हासिल नहीं होता। आज मांसाहार और नशे के सेवन के कारण ही समाज में विकृतियां और अपराध बढ़ रहे हैं। इस मौके पर जंगबहादुर सिंह यादव, राम अवध यादव, उजियार राम, सहजू यादव, बचई यादव आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि मां के गर्भ में जीवात्मा ने भगवान से भजन करने का वादा किया था, लेकिन जन्म लेने के बाद माया के प्रभाव में वह वादा भूल गया। मनुष्य पूरा जीवन भौतिक वस्तुओं को जुटाने में लगा देता है, जबकि मृत्यु के समय शरीर और दौलत यही रह जाती है।
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अंत समय में जीवात्मा की पीड़ा में कोई मदद नहीं कर पाता, केवल सत्कर्म ही साथ जाते हैं। हिंसा, अपराध और अशुद्ध खान-पान से नफरत के अलावा कुछ हासिल नहीं होता। आज मांसाहार और नशे के सेवन के कारण ही समाज में विकृतियां और अपराध बढ़ रहे हैं। इस मौके पर जंगबहादुर सिंह यादव, राम अवध यादव, उजियार राम, सहजू यादव, बचई यादव आदि मौजूद रहे।
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