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Ghazipur News: तहसीलदार पर अभिलेखों से छेड़छाड़, नामांतरण आदेशों में अनियमितता का आरोप

Sun, 05 Jul 2026 12:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 12:31 AM IST
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Tehsildar accused of tampering with records and irregularities in mutation orders.
गाजीपुर। मुहम्मदाबाद तहसील में नामांतरण (खारिज-दाखिल) की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। सेंट्रल बार एसोसिएशन के संयोजक आलोक कुमार राय ने तहसीलदार महेंद्र बहादुर पर अभिलेखों से कथित छेड़छाड़, नामांतरण आदेशों में अनियमितता तथा न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए उपजिलाधिकारी हर्षिता तिवारी को शनिवार को दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे। शिकायत के बाद एसडीएम ने संबंधित पत्रावलियां तलब कर जांच शुरू कर दी है।
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सेंट्रल बार एसोसिएशन के संयोजक आलोक कुमार राय के अनुसार मौजा हरिवल्लमपुर उर्फ अलावलपुर के वाद सोनिया बनाम हीरालाल में उपनिबंधन कार्यालय से प्राप्त अभिलेखों में 15 विक्रेताओं का विवरण दर्ज था। आरोप है कि तहसील स्तर पर दस्तावेजों की स्कैनिंग के दौरान कथित रूप से अभिलेखों से छेड़छाड़ कर निबंधन कार्यालय का पन्ना हटाकर स्कैनिंग कर फर्जी हस्ताक्षर कर अतिरिक्त पृष्ठ जोड़ दिया गया और उसी आधार पर नामांतरण आदेश पारित कर दिया गया। जिस व्यक्ति का नाम जोड़ा गया, वह प्राप्त सूचनानुसार विदेश में रहता है। इस कथित हेरफेर से वास्तविक खातेदारों के अधिकार प्रभावित हुए। मामले की पत्रावली फिलहाल एसडीएम के पास जांच के लिए सुरक्षित रखी गई है। दूसरे प्रकरण में मौजा तलखुदिया की भूमि से जुड़े नामांतरण पर सवाल उठाए गए हैं। एक खातेदार का नाम खतौनी में लिपिकीय त्रुटि कारण दर्ज नहीं था, इसके बाबत संशोधन वाद उपजिलाधिकारी न्यायालय में आदेश के लिए सुरक्षित है। खातेदार ने आपत्ति प्रस्तुत कर वस्तु स्थिति से अदालत को अवगत कराया परंतु उसके हिस्से की भूमि का विक्रय दर्शा दिया गया। काश्तकार द्वारा आपत्ति दाखिल किए जाने और उसे अभिलेखों में शामिल किए जाने के बावजूद कथित रूप से नई पत्रावली तैयार कर मूल वाद को दूसरी फाइल में समाहित कर दिया गया तथा आपत्ति की अनदेखी करते हुए नामांतरण आदेश जारी कर दिया गया। तीसरे मामले में आरोप है कि अपर तहसील न्यायिक की अदालत में, जहां संबंधित तहसीलदार पीठासीन अधिकारी थे, एक पक्ष की अनुपस्थिति के बावजूद आदेश में दोनों पक्षों को उपस्थित दर्शाकर वाद का निस्तारण कर दिया गया। जबकि संबंधित पत्रावली वर्ष 2017 में ही खारिज हो चुकी थी, फिर भी उसके संबंध में आदेश पारित किया गया। चौथा मामला लक्ष्मीकांत बनाम बदामी कुंवर मौज तिवारीपुर से जुड़ा है। अधिवक्ता आलोक कुमार राय का कहना है कि ये केवल अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि तहसील में नामांतरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की एक शृंखला का हिस्सा हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उपजिलाधिकारी हर्षिता तिवारी ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पत्रावलियां अपने कार्यालय में तलब कर ली हैं। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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