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समाज का एक भी बच्चा शिक्षा से न हो वंचित
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर
Updated Fri, 16 Mar 2018 11:11 PM IST
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पूर्व उपराष्ट्रपति अब्दुल रऊफ वंधन ।
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समाज के सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा कि एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो। देश की तरक्की हर वर्ग के लोगों के शिक्षित होने में है। शिक्षा के बिना हर चीज अधूरी है। यह बातें मारीशस के पूर्व उपराष्ट्रपति अब्दुल रऊफ बंधन ने अपने चार दिन के प्रवास के तीसरे दिन शुक्रवार को अपने पैतृक गांव नवली में लोगों से कही।
उन्होंने कहा कि अगर जिले और पैतृक गांव तक आने वाला मार्ग दुरुस्त हो जाये तो हर वर्ष लोगों से मिलने आए। उन्होंने गांव के लोगों को अपने हाथों से भोजन कराने के साथ अपने पैतृक गांव नवली के एक-एक दृश्य को कैमरे में कैद भी किए।
पेपर में छपी खबरों को लेकर काफी उत्सुकता दिखाते हुए अखबारों को सहेज कर रखा और कहा कि इसे मारीशस के लोगों को दिखाएंगे। अपने जीवनी पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन करने के साथ पुस्तक को पूर्व ग्राम प्रधान उमाशंकर सिंह, धनजी सिंह को समर्पित कर दिया। इस दौरान भारत एवं मारीशस की सभ्यता एवं संस्कृति का जिक्र करना नहीं भूले।
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इससे पूर्व अपने पूर्वजों के द्वारा निर्मित शाही मस्जिद में अपने परिजनों एवं ग्रामीणों संग शुक्रवार को अजान के बाद जुम्मे की नमाज भी अदा की। उन्होंने कहा की अगर भोजपुरी, हिंदी सीखना है तो मारीशस आए। बताया कि वहां विश्व हिन्दी संस्थान है एवं मोहन दास करमचंद्र गांधी के नाम पर एक विशाल कालेज है, जहां हिन्दी सिखाई जाती है।
इससे पूर्व वह अपने परिवार के साथ गेस्टहाउस से सड़क मार्ग से सुहवल, रेवतीपुर, नगदीलपुर, कामाख्या धाम, भदौरा होते हुए अपने पैतृक गांव नवली पहुंचे। जैसे ही उनका काफिला गांव पहुंचा लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया।
परिजनों से मिलने के बाद शाम को गेस्टहाउस के लिए रवाना हो गए। 17 मार्च को अपने नाती अजहर की शादी में परिजनों संग शरीक होने के बाद मारीशस के लिए रवाना हो जाएंगे। इस मौके पर जमशेद अंसारी, कैप्टन हीरा यादव, इबरार अंसारी, इस्तखार अंसारी, हरिशंकर सिंह, जमशेद राईनी, पप्पू अंसारी, अजय सिंह आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि अगर जिले और पैतृक गांव तक आने वाला मार्ग दुरुस्त हो जाये तो हर वर्ष लोगों से मिलने आए। उन्होंने गांव के लोगों को अपने हाथों से भोजन कराने के साथ अपने पैतृक गांव नवली के एक-एक दृश्य को कैमरे में कैद भी किए।
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पेपर में छपी खबरों को लेकर काफी उत्सुकता दिखाते हुए अखबारों को सहेज कर रखा और कहा कि इसे मारीशस के लोगों को दिखाएंगे। अपने जीवनी पर लिखी गई पुस्तक का विमोचन करने के साथ पुस्तक को पूर्व ग्राम प्रधान उमाशंकर सिंह, धनजी सिंह को समर्पित कर दिया। इस दौरान भारत एवं मारीशस की सभ्यता एवं संस्कृति का जिक्र करना नहीं भूले।
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इससे पूर्व अपने पूर्वजों के द्वारा निर्मित शाही मस्जिद में अपने परिजनों एवं ग्रामीणों संग शुक्रवार को अजान के बाद जुम्मे की नमाज भी अदा की। उन्होंने कहा की अगर भोजपुरी, हिंदी सीखना है तो मारीशस आए। बताया कि वहां विश्व हिन्दी संस्थान है एवं मोहन दास करमचंद्र गांधी के नाम पर एक विशाल कालेज है, जहां हिन्दी सिखाई जाती है।
इससे पूर्व वह अपने परिवार के साथ गेस्टहाउस से सड़क मार्ग से सुहवल, रेवतीपुर, नगदीलपुर, कामाख्या धाम, भदौरा होते हुए अपने पैतृक गांव नवली पहुंचे। जैसे ही उनका काफिला गांव पहुंचा लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया।
परिजनों से मिलने के बाद शाम को गेस्टहाउस के लिए रवाना हो गए। 17 मार्च को अपने नाती अजहर की शादी में परिजनों संग शरीक होने के बाद मारीशस के लिए रवाना हो जाएंगे। इस मौके पर जमशेद अंसारी, कैप्टन हीरा यादव, इबरार अंसारी, इस्तखार अंसारी, हरिशंकर सिंह, जमशेद राईनी, पप्पू अंसारी, अजय सिंह आदि मौजूद रहे।