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भाव और विचारों की अभिव्यक्ति की सशक्त भाषा हिंदी भारतीय राजनीति का शिकार
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अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत शनिवार को गाजीपुर के सैदपुर स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में हिंदी शिक्षकों की गोष्ठी हुई। इस दौरान वक्ताओं ने हिंदी के प्रयोग पर बल दिया। कहा कि भाव एवं विचारों की अभिव्यक्ति की सशक्त भाषा हिंदी राजनीति का शिकार हो गई है। इस भाषा को जो स्थान मिलना चाहिए वह आजादी के सत्तर दशक बाद भी हासिल नहीं हो सका है।
वक्ताओं ने कहा कि दैनिक कामगाज और लेखन में हिंदी को प्रयोग करने और इसके प्रचार-प्रसार और संवर्द्धन की जरूरत है। आश्चर्य तो यह है कि जिस भाषा हिंदी से हमारे वतन की पहचान है, वह भाषा हिंदी राष्ट्र के माथे की बिंदी नहीं बन पाई। डायट के प्राचार्य एवं उप शिक्षा निदेशक सोमारू प्रधान ने कहा कि जिस भाषा का अपना खुद का व्याकरण हो और जिसकी अपनी पहचान हो उसे राष्ट्र भाषा बनाने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हिंदी पत्रकारिता की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी के विकास में हिंदी अखबारों, लेखकों, पत्रकारों ने जिस तरह भूमिका निभाई है वह स्वागत योग्य है।
डायट प्रवक्ता राजवंत सिंह ने कहा कि देश के फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली हिंदी भाषा सर्वाधिक लोगों के लिए ग्राह्य है। इसकी लोकप्रियता को देखते हुए देश के युवकों को आगे आना होगा। हिंदी के लिए कार्य करने का संकल्प भी लेना होगा। प्रवक्ता सुमन तिवारी ने कहा कि हिंदी का जिस तरह विकास हुआ है उस तरह का विकास किसी अन्य भाषा का नहीं हुआ। अन्य वक्ताओं ने इस भाषा की संवेदनशीलता और लोकप्रियता का पक्ष रखते हुए कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने में भले ही कोताही बरती जा रही हो लेकिन जनमानस में यह भाषा राष्ट्रभाषा बन चुकी है।
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वक्ताओं ने कहा कि दैनिक कामगाज और लेखन में हिंदी को प्रयोग करने और इसके प्रचार-प्रसार और संवर्द्धन की जरूरत है। आश्चर्य तो यह है कि जिस भाषा हिंदी से हमारे वतन की पहचान है, वह भाषा हिंदी राष्ट्र के माथे की बिंदी नहीं बन पाई। डायट के प्राचार्य एवं उप शिक्षा निदेशक सोमारू प्रधान ने कहा कि जिस भाषा का अपना खुद का व्याकरण हो और जिसकी अपनी पहचान हो उसे राष्ट्र भाषा बनाने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हिंदी पत्रकारिता की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी के विकास में हिंदी अखबारों, लेखकों, पत्रकारों ने जिस तरह भूमिका निभाई है वह स्वागत योग्य है।
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डायट प्रवक्ता राजवंत सिंह ने कहा कि देश के फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाली हिंदी भाषा सर्वाधिक लोगों के लिए ग्राह्य है। इसकी लोकप्रियता को देखते हुए देश के युवकों को आगे आना होगा। हिंदी के लिए कार्य करने का संकल्प भी लेना होगा। प्रवक्ता सुमन तिवारी ने कहा कि हिंदी का जिस तरह विकास हुआ है उस तरह का विकास किसी अन्य भाषा का नहीं हुआ। अन्य वक्ताओं ने इस भाषा की संवेदनशीलता और लोकप्रियता का पक्ष रखते हुए कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने में भले ही कोताही बरती जा रही हो लेकिन जनमानस में यह भाषा राष्ट्रभाषा बन चुकी है।
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