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जीवन में सबसे बड़ा धर्म परोपकार

Wed, 20 Jan 2021 10:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 10:59 PM IST
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Greatest religious charity in life
सुहवल। स्थानीय गांव के संत मानदास बाबा मंदिर परिसर में नौ दिवसीय 25 कुंडीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ आयोजित है। रामकथा के चौथे दिन कथा वाचिका रागिनी सरस्वती ने श्रोताओं को प्रभु राम की लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि व्यक्ति के जीवन में एक ही अवलंब होता है और वो है ईश्वर। व्यक्ति ज्ञान, कर्म और भक्ति के कई मार्गों से ईश्वर को पाने का प्रयास करता है। भक्ति सर्वश्रेष्ठ मार्ग है और भक्ति से ईश्वर को पाना सबसे सरल होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा धर्म परोपकार है। परोपकार ही एक सत कर्म है, जिससे मानव जीवन को मोक्ष का मार्ग मिलता है। भारतीय संस्कृति में परोपकार की महत्ता अतुलनीय है। अगर कोई व्यक्ति दान देता है, पूजन-अर्चन करता है, तिलक धारण करता है, लेकिन अगर उसके परिजन-पड़ोसी या भाई-बंधु भूखे हैं तो उसे धार्मिक नहीं कहा जा सकता। आज कुछ लोग भगवान को जलाभिषेक करने तो जाते हैं, लेकिन घर में माता-पिता को पानी देना उचित नहीं समझते हैं। मंदिर में जाकर प्रार्थना करना और समाज में प्राणी मात्र का शोषण करना, अनैतिक है। जो व्यक्ति परोपकारी होता है, वह अत्याचारी नहीं हो सकता। कहा, संगत से गुण होत है, संगत से गुण जात। संगति हमेशा अच्छे लोगों से करना चाहिए। बुरे लोगों की संगति करने पर जीवन कष्टप्रद हो जाता है। अच्छे लोगों से संबंध बनाने पर जीवन की दशा-दिशा बदल जाती है। भगवान श्रीराम का नाम लेना ही काफी है। उनके जीवन से मानव मर्यादित होते हैं। इस अवसर पर रविशंकर राय, विनोद गुप्ता, सुधीर राय, पिंकू राय, वीरेंद्र शर्मा, मनोज पांडेय, जीवेंद्र नारायण शुक्ला, विजयशंकर आदि श्रद्धालु मौजूद थे। संचालन गंगासागर कश्यप ने किया।
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