{"_id":"5d98e1db8ebc3e939e470ba2","slug":"ghazipur-news-ghazipur-news-vns487625936","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम नहीं हो रहा छोटी नदियों का प्रकोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम नहीं हो रहा छोटी नदियों का प्रकोप
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गाजीपुर। गंगा और गोमती में घटाव जारी है। गंगा का जलस्तर शनिवार की शाम को 62.640 मीटर पर आ गया । इसके चलते प्रभावित गांवों में काफी राहत है। अधिकतर गांवों से पानी निकल गया है तो कुछ से निकल रहा है। अभी सैकड़ों गांव पानी से बदहाल है। सड़न, बदबू और गंदे वातावरण के चलते संक्रामक रोग भी पांव पसारने लगे हैं। इधर अन्य सहायक नदियों में भी बाढ़ आ गई है। हजारों एकड़ फसलें जलमग्न होकर सड़ रही है। इन दिनों बेसो, मगंई, कर्मनाशा, टोंस, गांगी तथा उदंती नदियों से करीब सौ गांवों में बाढ़ आ गई है। गांवों में आपसी संपर्क टूट गया है। इन नदियों में मामूली कमी आई है।
ताजपुर डेहमा संवाददाता के अनुसार करीमुदीनपुर क्षेत्र से होकर बहने वाली टोंस नदी के जलस्तर में अभी बढ़ाव जारी है। क्षेत्र के कुछ गांवों में इसका पानी रोकने के लिए नदी के किनारें बांध भी बनाए गए है । नदी का पानी मैदानी इलाकों से होते हुए अब गांवों की तरफ बढ़ गया है। वर्षो पूर्व नदी के किनारे बनाया गया बंधा कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। मरम्मत के अभाव मे काफी कमजोर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बांध की मरम्मत अति आवश्यक है। शहर के ददरीघाट, कलक्टरघाट, पोस्ता घाट आदि की सीढ़ियां अभी भी डूबी हुई है। शास्त्रीनगर, सिकंदरपुर, डीएम आवास के पास से पानी पूरी तरह से नहीं निकला है। कुर्था, बयेपुर, सोकनी, पुरैना, जैतपुरा आदि में भी पानी जमा हुआ है। औड़िहार संवाददाता के मुताबिक सैदपुर के पूरे क्षेत्र में बहने वाली गंगा, गोमती, गांगी, उदंती आदि नदियों के पानी से सैकड़ों गांवों की दसा दयनीय बनी हुई है। गांगी नदी से उचौरी, भीमापार, डहरा खुर्द, बिजवल, निजामपुर, अमुवारा, सवना, लौलहा, मठिया, डहरा कला, भितरी, सराय हेतिम, निंदोपुर, महमूदपुर-हथिनी, देवकली आदि घिरें गांवों से भले ही पानी निकल रहा है लेकिन वहां की दुश्वारियां जस की तस बनी हुी है। गंगा का पानी रामपुर, मंझरिया, मांझा, नारी पचदेवरा, टोडरपुर, फुलवारी कला, दुबैथा, गायघाट, आराजीगंज, कोल्हुआ टोला, जौहरगंज, रामतवक्का, औड़िहार, पटना, गोपालपुर, गजाधरपुर, शादी-भादी आदि गांवों से करीब करीब सरक गया है। गोमती ने भी गोरखा, सूर्यभानचक, खरौना, सिधौना आदि गांवों को थोड़ी राहत दी है।
सादात संवाददाता के अनुसार उदंती और बेसो नदियों के पानी से घिरे हुरमुजपुर, बक्सूपुर, , वृन्दावन और विजहरी गांवों स्थिति एक सप्ताह बाद भी नाजुक बनी हुई है । लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है । पशुओं के लिए चारा की घोर समस्या है । सादात और जखनिया से इन गांवों का सम्पर्क टूटा हुआ है । पानी में खरपतवार के सड़ने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मडराने लगा है। इन गांवों के लोगो को सैदपुर, जखनिया जा ने के लिए सिर्फ एक मात्र साधन और रास्ता ट्रेन का रह गया है । ट्रेन की सुविधा भी दिन भर में दो बार ही उपलब्ध है । अगर बीच में जाने की आवश्यकता हुई तो नहीं जाया जा सकता है । सादात से जखनिया जाने वाली सड़क दो जगह मजुई के पास उदन्ती नदी के छलका पुल पर और तालगांव के पास बेसो नदी के पुल से उतर सड़क पर घुटने के बराबर पानी भरा होने के कारण आवागमन बाधित है । शनिवार को इन दोनों स्थानों पर बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ है । लेकिन अभी तक आवागमन बहाल नहीं हुआ है । उदन्ती नदी के तट पर बसा मजुई गांव के कई घर बाढ़ कन पानी में हिलोरे खा रहे हैं। सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल भी पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है। मंजुई सहित हुरमुजपुर , बक्सूपुर, विजहरी और वृन्दावन के किसानों की अधिकांश धान की फसल डूब गई है । पशुओ को चारा नही मिल रहा है । चारा के अभाव में और रोगों से ग्रसित होकर कई पशु मरणासन्न की स्थिति में है । हुरमुजपुर गांव के अधिवक्ता नागेंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिदिन सैदपुर मुसंफी कोर्ट में जाने के लिए काफी मुस्किल हो रही है। इसी गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित मिस्री पाण्डेय ने कहा कि बाढ पीड़ितों को कोई सहायता उपलब्ध नहीं हो रही है। बाबा गोरखनाथ गौशाला एवं आयुर्वेदिक आश्रम के प्रबंधक लौजारी बाबा ने कहा कि उदंती और बेसों नदियों के बीच घिरे लोगों की कोई खोज खबर लेने वाला नहीं है । चारा के अभाव मे दर्जन भर पशु अब तक बाढ़ के प्रकोप से मर चुके है । उन्होंने बताया कि उनकी गौशाला के भी दो पशु मर चुके है । चारा का इंतजाम भिक्षाटन करके करता था । जो अब बाढ़ के कारण दूसरे गांवों में जाकर मांग नही पा रहा हूं । ऐसी स्थिति में हमारे गौशाला के और कई पशु मरणासन्न है। जिला प्रशासन भी इन गांवों की खोज खबर नहीं ले रहा है । मंजुई , हुरमुजपुर, बक्सूपुर, विजहरी, वृन्दावन के लोगो ने मजुई के पास उदन्ती नदी पर छलका पुल की जगह बडा पुल बनवाने की मांग की है। शादियाबाद संवाददाता के अनुसार ग्राम सराय, कुबरा, नवाबगंज, गुरैनी, रक़बा, बसेवा, बादशाहपुर, सराय सदकर, जबरापार, मसूदपुर समेत दर्जनों गांवों की स्थिति अभी दयनीय बनी हुई है।
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ताजपुर डेहमा संवाददाता के अनुसार करीमुदीनपुर क्षेत्र से होकर बहने वाली टोंस नदी के जलस्तर में अभी बढ़ाव जारी है। क्षेत्र के कुछ गांवों में इसका पानी रोकने के लिए नदी के किनारें बांध भी बनाए गए है । नदी का पानी मैदानी इलाकों से होते हुए अब गांवों की तरफ बढ़ गया है। वर्षो पूर्व नदी के किनारे बनाया गया बंधा कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। मरम्मत के अभाव मे काफी कमजोर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बांध की मरम्मत अति आवश्यक है। शहर के ददरीघाट, कलक्टरघाट, पोस्ता घाट आदि की सीढ़ियां अभी भी डूबी हुई है। शास्त्रीनगर, सिकंदरपुर, डीएम आवास के पास से पानी पूरी तरह से नहीं निकला है। कुर्था, बयेपुर, सोकनी, पुरैना, जैतपुरा आदि में भी पानी जमा हुआ है। औड़िहार संवाददाता के मुताबिक सैदपुर के पूरे क्षेत्र में बहने वाली गंगा, गोमती, गांगी, उदंती आदि नदियों के पानी से सैकड़ों गांवों की दसा दयनीय बनी हुई है। गांगी नदी से उचौरी, भीमापार, डहरा खुर्द, बिजवल, निजामपुर, अमुवारा, सवना, लौलहा, मठिया, डहरा कला, भितरी, सराय हेतिम, निंदोपुर, महमूदपुर-हथिनी, देवकली आदि घिरें गांवों से भले ही पानी निकल रहा है लेकिन वहां की दुश्वारियां जस की तस बनी हुी है। गंगा का पानी रामपुर, मंझरिया, मांझा, नारी पचदेवरा, टोडरपुर, फुलवारी कला, दुबैथा, गायघाट, आराजीगंज, कोल्हुआ टोला, जौहरगंज, रामतवक्का, औड़िहार, पटना, गोपालपुर, गजाधरपुर, शादी-भादी आदि गांवों से करीब करीब सरक गया है। गोमती ने भी गोरखा, सूर्यभानचक, खरौना, सिधौना आदि गांवों को थोड़ी राहत दी है।
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सादात संवाददाता के अनुसार उदंती और बेसो नदियों के पानी से घिरे हुरमुजपुर, बक्सूपुर, , वृन्दावन और विजहरी गांवों स्थिति एक सप्ताह बाद भी नाजुक बनी हुई है । लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है । पशुओं के लिए चारा की घोर समस्या है । सादात और जखनिया से इन गांवों का सम्पर्क टूटा हुआ है । पानी में खरपतवार के सड़ने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मडराने लगा है। इन गांवों के लोगो को सैदपुर, जखनिया जा ने के लिए सिर्फ एक मात्र साधन और रास्ता ट्रेन का रह गया है । ट्रेन की सुविधा भी दिन भर में दो बार ही उपलब्ध है । अगर बीच में जाने की आवश्यकता हुई तो नहीं जाया जा सकता है । सादात से जखनिया जाने वाली सड़क दो जगह मजुई के पास उदन्ती नदी के छलका पुल पर और तालगांव के पास बेसो नदी के पुल से उतर सड़क पर घुटने के बराबर पानी भरा होने के कारण आवागमन बाधित है । शनिवार को इन दोनों स्थानों पर बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ है । लेकिन अभी तक आवागमन बहाल नहीं हुआ है । उदन्ती नदी के तट पर बसा मजुई गांव के कई घर बाढ़ कन पानी में हिलोरे खा रहे हैं। सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल भी पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है। मंजुई सहित हुरमुजपुर , बक्सूपुर, विजहरी और वृन्दावन के किसानों की अधिकांश धान की फसल डूब गई है । पशुओ को चारा नही मिल रहा है । चारा के अभाव में और रोगों से ग्रसित होकर कई पशु मरणासन्न की स्थिति में है । हुरमुजपुर गांव के अधिवक्ता नागेंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिदिन सैदपुर मुसंफी कोर्ट में जाने के लिए काफी मुस्किल हो रही है। इसी गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित मिस्री पाण्डेय ने कहा कि बाढ पीड़ितों को कोई सहायता उपलब्ध नहीं हो रही है। बाबा गोरखनाथ गौशाला एवं आयुर्वेदिक आश्रम के प्रबंधक लौजारी बाबा ने कहा कि उदंती और बेसों नदियों के बीच घिरे लोगों की कोई खोज खबर लेने वाला नहीं है । चारा के अभाव मे दर्जन भर पशु अब तक बाढ़ के प्रकोप से मर चुके है । उन्होंने बताया कि उनकी गौशाला के भी दो पशु मर चुके है । चारा का इंतजाम भिक्षाटन करके करता था । जो अब बाढ़ के कारण दूसरे गांवों में जाकर मांग नही पा रहा हूं । ऐसी स्थिति में हमारे गौशाला के और कई पशु मरणासन्न है। जिला प्रशासन भी इन गांवों की खोज खबर नहीं ले रहा है । मंजुई , हुरमुजपुर, बक्सूपुर, विजहरी, वृन्दावन के लोगो ने मजुई के पास उदन्ती नदी पर छलका पुल की जगह बडा पुल बनवाने की मांग की है। शादियाबाद संवाददाता के अनुसार ग्राम सराय, कुबरा, नवाबगंज, गुरैनी, रक़बा, बसेवा, बादशाहपुर, सराय सदकर, जबरापार, मसूदपुर समेत दर्जनों गांवों की स्थिति अभी दयनीय बनी हुई है।
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