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सैदपुर में खतरा बिंदु छूने को बेताब हैं गंगा

Tue, 25 Aug 2020 10:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 10:24 PM IST
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Ganga is desperate to touch the danger point in Saidpur
गाजीपुर/भीमापार। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इनके साथ ही सहायक नदियों में भी धीरे-धीरे जलस्तर ऊपर चढ़ता जा रहा है। ऐसे में सैदपुर, जमानिया, सदर, मुहम्मदाबाद और सेवराई तहसील में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने गंगा के जलस्तर को 63ऽ105 पर खतरा बिंदु घोषित किया है। जबकि सैदपुर में इस समय गंगा का जलस्तर इसी खतरा बिंदु से महज पांच सेंटीमीटर नीचे है। बावजूद गंगा का पानी लगातार तेजी से आगे बढ़ रहा है। जानकारों की माने तो हरिद्वार, नरोरा और कानपुर आदि बैराजों से अब तक 36 लाख 33 हजार 15 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। तटवर्ती गांवों के लोग डिस्चार्ज किए गए इसी पानी को गंगा में आ रही बाढ़ की विभीषका का कारण बता रहे हैं।
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जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की माने तो अकेले कानपुर बैराज से 19 लाख 17 हजार 41 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा जा चुका है। इसके अलावा नरोरा बैराज से 10 लाख 9 हजार 8 सौ 98 और हरिद्वार से 7 लाख 60 हजार 76 क्यूसेक पानी गंगा में डिस्चार्ज हुआ है। हालत यह है कि औड़िहार स्थित आदित्य घाट पर सिर्फ 12 सीढ़ियां शेष रह गई हैं। जबकि 40 गंगा में समा चुकी हैं। गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से तटवर्ती इलाके के लोगों के माथे पर चिन्ता की लकीरें साफ तौर पर देखी जा रही हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते नदियों में आने वाली बाढ़ से रहवासियों को बचाने का कोई उपाय नहीं किया जाता है, तो आगे स्थिति भयावह हो सकती है। उधर गंगा में बढ़ते पानी का दबाव उनकी सहायक नदी गोमती में साफ तौर पर दिखने लगा है। क्योंकि गोमती नदी का पानी तेतारपुर, गौरहट, भुजाड़ी, बहुरा, गौरी, गोरखा, अमेहता और नुरदीपुर आदि गांवों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जिसे देख ग्रामवासी परेशान नजर आने लगे हैं। उनका कहना है कि यहां बाढ़ मूसलाधार बारिश से ज्यादा बैराजों से पानी डिस्चार्ज होने के कारण आती है।
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बाढ़ की विभीषका से बचने के लिए प्रशासन के पास अभी तक कोई इंतजाम नहीं है। इसलिए यदि बाढ़ ने अपना रौद्र रूप दिखाया तो हर साल की तरह इस वर्ष भी लोगों को धन जन की हानि होने से कोई नहीं बचा सकता है। तेतारपुर और गौरहट गांव के लोगों ने बताया कि उनका गांव चारो तरफ से बाढ़ के पानी जब घिर जाता है, तब गांव वासियों का शेष जनपद से संपर्क ही टूट जाता है। ऐसे में उनकी स्थिति बहुत दयनीय हो जाती है। क्योंकि उनके गांव तक पहुंचने वाली दो से तीन किलोमीटर लंबी एकमात्र सड़क बहुत नीचे होने के कारण बाढ़ में जलमग्न हो जाती है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सड़क को ऊंची कर बनवाने कीअपील कईं बार की गई। लेकिन किसी ने भी ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा।
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बाढ़ में गंगा स्नान कर रहे हैं लोग
भीमापार। सैदपुर क्षेत्र में गंगा नदी खतरा बिंदु के भले ही काफी करीब हों, लेकिन लोग गंगा में स्नान करने का खतरा अब भी मोल ले रहे हैं। स्थानीय प्रशासन भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। औड़िहार स्थित वराहधाम के हरिओम बाबा ने बताया कि आदित्य घाट पर स्नान करने के दौरान कईं लोग काल के गाल में समा चुके हैं। बावजूद हालत यह है कि क्षेत्र के युवक आदित्य घाट की ऊंचाई से कूद कर गंगा के पानी में स्टंट करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। उधर सैदपुर कोतवाल रविंद्र भूषण मौर्य ने बताया कि आदित्य घाट पर दो सिपाहियों की तैनाती कर दी गई है, जो लोगों को गंगा में स्नान करने और उसमें नौका संचालन करने से रोक रहे हैं।
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