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सरकारी मदद से छत डालना मुश्किल
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गाजीपुर। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के रुपये मिलने के बाद भी अपना घर बनाने का सपना पूरा नहीं हो रहा। महंगाई लोगों के घर के सपने पर भारी पड़ने लग रहा है। भवन निर्माण सामग्री महंगी होने के कारण आवास योजना के लिए मिली धनराशि से कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसके कारण कई मकानों का निर्माण शुरू होने पर भी अधूरा रह गया है। लाभार्थी जैसे-तैसे घर का कार्य पूरा कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
रेवतीपुर ब्लाक के बेमुआ गांव निवासी लालचंद और रामरूप ने बताया कि उनको तमाम कठिनाइयों के बाद किसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन किस्तों में एक लाख 20 हजार रुपये मिला। लेकिन भवन सामाग्री की कीमतों में महंगाई की वजह से उनका पक्के घर में रहने का सपना अभी तक पूरा नहीं हो सका। उन्होंने पक्का घर बनाने के लिएदीवारें तो खड़ी कर ली, लेकिन सरिया, सीमेंट की महंगाई की वजह पर लिंटर नहीं डल पा रहे हैं। इस दर्द को झेलने वाले वह अकेले नहीं हैं।
विशंभर ने भी बताया कि सरकारी योजनाओं की धनराशि के अलावा भी लोगों को निर्माण सामग्री की महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। इस वजह से पक्का घर बनाना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि एक लाख रुपये तो बुनियाद और दीवार बनाकर लिंटर की तैयारी तक ही खर्च हो गए। आवास का निर्माण पूरा करने के लिए 50 हजार रुपए अपनी जेब से खर्च किए हैं। सरकारी योजना के लाभार्थियों के अलावा आम आदमी को भी महंगाई में घर बनाना मुश्किल कर दिया है।
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निर्माण सामग्री की महंगाई से घर बनाना सपना
गाजीपुर। महंगाई की मार ने लोगों की आर्थिक स्थिति को बेपटरी कर रखा है। निर्माण सामग्री के दामों में उछाल हुआ है। जिसका असर भवनों के निर्माण पर सीधा पड़ रहा है। तीन माह पहले मोरंग 5000 हजार ट्राली , गिट्टी 8500, सीमेंट 400 और सरियां 6500 था। अब वर्तमान समय में बालू 7000, गिट्टी 10,000, सीमेंट 490 और सरियां 7200 रुपये हो गया है। इन दामों के उछाल से प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली धनराशि से घर बनाने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है।
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रेवतीपुर ब्लाक के बेमुआ गांव निवासी लालचंद और रामरूप ने बताया कि उनको तमाम कठिनाइयों के बाद किसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन किस्तों में एक लाख 20 हजार रुपये मिला। लेकिन भवन सामाग्री की कीमतों में महंगाई की वजह से उनका पक्के घर में रहने का सपना अभी तक पूरा नहीं हो सका। उन्होंने पक्का घर बनाने के लिएदीवारें तो खड़ी कर ली, लेकिन सरिया, सीमेंट की महंगाई की वजह पर लिंटर नहीं डल पा रहे हैं। इस दर्द को झेलने वाले वह अकेले नहीं हैं।
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विशंभर ने भी बताया कि सरकारी योजनाओं की धनराशि के अलावा भी लोगों को निर्माण सामग्री की महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। इस वजह से पक्का घर बनाना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि एक लाख रुपये तो बुनियाद और दीवार बनाकर लिंटर की तैयारी तक ही खर्च हो गए। आवास का निर्माण पूरा करने के लिए 50 हजार रुपए अपनी जेब से खर्च किए हैं। सरकारी योजना के लाभार्थियों के अलावा आम आदमी को भी महंगाई में घर बनाना मुश्किल कर दिया है।
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निर्माण सामग्री की महंगाई से घर बनाना सपना
गाजीपुर। महंगाई की मार ने लोगों की आर्थिक स्थिति को बेपटरी कर रखा है। निर्माण सामग्री के दामों में उछाल हुआ है। जिसका असर भवनों के निर्माण पर सीधा पड़ रहा है। तीन माह पहले मोरंग 5000 हजार ट्राली , गिट्टी 8500, सीमेंट 400 और सरियां 6500 था। अब वर्तमान समय में बालू 7000, गिट्टी 10,000, सीमेंट 490 और सरियां 7200 रुपये हो गया है। इन दामों के उछाल से प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली धनराशि से घर बनाने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है।