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Ghazipur News: दो वर्ष पहले सील निजी अस्पताल में प्रसूता और नवजात की मौत, हंगामा

Sat, 27 Jul 2024 02:36 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2024 02:36 AM IST
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Death of mother and newborn in sealed private hospital two years ago, commotion
दिलदारनगर। थाना क्षेत्र के बड़ी नहर स्थित एक निजी अस्पताल में बृहस्पतिवार की रात एक प्रसूता व नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने आपरेशन के दौरान चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
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मृतका की बहन ने अस्पताल प्रबंधक, डॉक्टर व कर्मियों के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। जबकि ये अस्पताल दो साल पहले बिना पंजीकरण के आरोप में सील हुई थी। बावजूद अस्पताल का संचालन फिर कैसे शुरू हो गया ये बताने वाला कोई नहीं है।
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बिहार प्रांत के बड़ीयारी कोचस निवासी गर्भवती शिवबाला देवी (25) कुछ दिनों से मायके रेवतीपुर थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर में रह रही थीं। प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उन्हें रात करीब नौ बजे लेकर बड़ीनहर स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। जहां डाॅक्टराें ने आपरेशन शुरू कर दिया। कुछ देर बाद निजी स्वास्थ्य कर्मियों ने मृत बच्ची पैदा होने का दावा किया।
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प्रसूता की भी हालत गंभीर होने लगी तो वाराणसी ले जाने की तैयारी करने लगे। आधे घंटे बाद ही प्रसूता ने भी दम तोड़ दिया। जानकारी मिलते ही परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने नवजात और प्रसूता का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही परिजनों को समझा- बुझाकर शांत कराया। मृतका की बहन पूजा ने अस्पताल प्रबंधक, डॉक्टरों एवं कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी। थानाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद विधिक कार्रवाई होगी। मृतका की बहन की तहरीर पर छानबीन की जा रही है।
19 अक्तूबर 2022 को सेवराई के तत्कालीन एसडीएम राजेश प्रसाद मौर्या ने जब निजी अस्पतालों की जांच की तो पंजीकरण नहीं मिला था। अस्पताल में चिकित्सक गायब थे। कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया गया था। सीएचसी के अधीक्षक डाॅ. धनंजय आनंद ने प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। मामला शांत होने के बाद संचालक ने निजी अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया।
कोट
मामले की जांच के लिए टीम गठित कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। अस्पताल दो वर्ष पूर्व किन कारणों से सील हुई थी, पुन: कैसे संचालन शुरू हो गया। इसकी भी जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। - डाॅ. देश दीपक पाल, सीएमओ

निजी अस्पतालों का है मकड़जाल
नगर पंचायत स्थित कस्बा और दिलदारनगर- भदौरा बड़ी नहर मार्ग के किनारे निजी अस्पतालों का मकड़जाल फैला हुआ है। स्थिति यह है कि दो से तीन माह में प्रसूता व नवजात की मौत की घटनाएं होती हैं। कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदारों द्वारा जांच कराकर मामले की इतिश्री कर ली जाती है। संचालक उसी नाम से पुनः अस्पताल का संचालन शुरू कर देते हैं। अधिकारियों की तंद्रा तब टूटती है, जब किसी की मौत हो जाती है।
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