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संदिग्ध मौत : साढ़े पांच माह में 102 बिसरे श्ुरक्षित
Updated Fri, 18 May 2018 11:32 PM IST
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बिसरा जांच में फंसी सैकड़ों मौतें
विधि विज्ञान केंद्र रामनगर वाराणसी में लंबित है जांच
साढ़े पांच माह में 102 बिसरा सुरक्षित किया
पवन श्रीवास्तव
गाजीपुर। जिले में बीते दिनों हुई कई मौतों का राज विधि विज्ञान केंद्र में दम तोड़ रहा है। व्यवस्था बदली तो शीशे के पॉट से निकल कर यह पुलिस थानों में बिसरा के तौर पर पहुंची थी लेकिन प्रशासनिक कार्यप्रणाली की ऐसी मार पड़ी की कई मौतों का राजफाश नहीं हो पा रहा है। मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अस्पष्ट होने पर बिसरा जांच के लिए सुरक्षित कर विधि विज्ञान केंद्र रामनगर वाराणसी भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर कोर्ट के आदेश पर भी बिसरों की जांच कराई जाती है। जिले में महज साढ़े पांच माह के भीतर 102 बिसरे जांच के लिए भेजे गए हैं। लेकिन मजे की बात यह है कि पिछले छह माह के भीतर एक भी बिसरे की जांच रिपोर्ट का नहीं आई है और न ही इसका लेखा-जोखा पुलिस के पास है।
संदिग्ध हाल में मौत अथवा फिर मौत का कारण स्पष्ट न होने पर शव के पोस्टमार्टम के बाद बिसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इसे जांच के लिए संबंधित थानों के माध्यम से विधि विज्ञान प्रयोगशाला वाराणसी भेजा जाता है। अगर कोई व्यक्ति कोर्ट में बिसरा जांच की मांग करता है, उस पर भी बिसरे की जांच कराई जाती है। रामनगर वाराणसी स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में पिछले दो वर्षों में सैकड़ों बिसरों की जांच लंबित है। बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है, लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में देखने को मिलता है। पिछले साढ़े पांच माह में 102 बिसरा जांच के लिए भेजे गए हैं। इससे पहले के भी बिसरों की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। पहले बिसरों को पोस्टमार्टम हाउस पर बने कमरे की अलमारी में शीशे के पॉट में बंद करके रखा जाता था, लेकिन यह व्यवस्था बदल चुकी है। अब संदिग्ध मौत के मामलों में बिसरा सुरक्षित कर तत्काल संबंधित थानों के पुलिसकर्मियों को सुपुर्द कर दिया जाता है।
विभाग की माने तो बीते जनवरी से 15 मई 2018 तक कुल 102 बिसरा जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं। इसमें 40 से अधिक मामले विवाहिताओं की मौत से जुड़े हैं। प्रत्येक माह दो से चार संदिग्ध मौत के मामले जिले में आते हैं, जिनका पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा नहीं होता है। ऐसी दशा में मौत की स्थिति स्पष्ट करने के लिए चिकित्सक द्वारा बिसरा सुरक्षित किया जाता है और जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है। यहीं नहीं सुरक्षित बिसरे की जांच के लिए 90 दिन का समय निर्धारित किया गया है। समय सीमा के अंदर जांच न होने पर बिसरा खराब हो जाता है और पुलिस महकमा जांच के नाम बिसरे को ठिकाने लगा देता है। इस संबंध में एसपी सोमेन वर्मा ने बताया कि संदिग्ध मौतों के मामले में जांच के लिए बिसरा भेज दिया जाता है। जांच कर रिपोर्ट विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा भेजी जाती है। इसके लिए बकायदे सेल बना हुआ है। इसकी कमान उच्चाधिकारियों के हाथों में है।
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विधि विज्ञान केंद्र रामनगर वाराणसी में लंबित है जांच
साढ़े पांच माह में 102 बिसरा सुरक्षित किया
पवन श्रीवास्तव
गाजीपुर। जिले में बीते दिनों हुई कई मौतों का राज विधि विज्ञान केंद्र में दम तोड़ रहा है। व्यवस्था बदली तो शीशे के पॉट से निकल कर यह पुलिस थानों में बिसरा के तौर पर पहुंची थी लेकिन प्रशासनिक कार्यप्रणाली की ऐसी मार पड़ी की कई मौतों का राजफाश नहीं हो पा रहा है। मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अस्पष्ट होने पर बिसरा जांच के लिए सुरक्षित कर विधि विज्ञान केंद्र रामनगर वाराणसी भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर कोर्ट के आदेश पर भी बिसरों की जांच कराई जाती है। जिले में महज साढ़े पांच माह के भीतर 102 बिसरे जांच के लिए भेजे गए हैं। लेकिन मजे की बात यह है कि पिछले छह माह के भीतर एक भी बिसरे की जांच रिपोर्ट का नहीं आई है और न ही इसका लेखा-जोखा पुलिस के पास है।
संदिग्ध हाल में मौत अथवा फिर मौत का कारण स्पष्ट न होने पर शव के पोस्टमार्टम के बाद बिसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इसे जांच के लिए संबंधित थानों के माध्यम से विधि विज्ञान प्रयोगशाला वाराणसी भेजा जाता है। अगर कोई व्यक्ति कोर्ट में बिसरा जांच की मांग करता है, उस पर भी बिसरे की जांच कराई जाती है। रामनगर वाराणसी स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में पिछले दो वर्षों में सैकड़ों बिसरों की जांच लंबित है। बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है, लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में देखने को मिलता है। पिछले साढ़े पांच माह में 102 बिसरा जांच के लिए भेजे गए हैं। इससे पहले के भी बिसरों की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। पहले बिसरों को पोस्टमार्टम हाउस पर बने कमरे की अलमारी में शीशे के पॉट में बंद करके रखा जाता था, लेकिन यह व्यवस्था बदल चुकी है। अब संदिग्ध मौत के मामलों में बिसरा सुरक्षित कर तत्काल संबंधित थानों के पुलिसकर्मियों को सुपुर्द कर दिया जाता है।
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विभाग की माने तो बीते जनवरी से 15 मई 2018 तक कुल 102 बिसरा जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं। इसमें 40 से अधिक मामले विवाहिताओं की मौत से जुड़े हैं। प्रत्येक माह दो से चार संदिग्ध मौत के मामले जिले में आते हैं, जिनका पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा नहीं होता है। ऐसी दशा में मौत की स्थिति स्पष्ट करने के लिए चिकित्सक द्वारा बिसरा सुरक्षित किया जाता है और जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाता है। यहीं नहीं सुरक्षित बिसरे की जांच के लिए 90 दिन का समय निर्धारित किया गया है। समय सीमा के अंदर जांच न होने पर बिसरा खराब हो जाता है और पुलिस महकमा जांच के नाम बिसरे को ठिकाने लगा देता है। इस संबंध में एसपी सोमेन वर्मा ने बताया कि संदिग्ध मौतों के मामले में जांच के लिए बिसरा भेज दिया जाता है। जांच कर रिपोर्ट विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा भेजी जाती है। इसके लिए बकायदे सेल बना हुआ है। इसकी कमान उच्चाधिकारियों के हाथों में है।
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