{"_id":"63446409392bcd5909221922","slug":"build-relationships-and-maintain-relationships-with-devotion-netaji-ghazipur-news-vns6784219130","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिश्ते बनाए और शिद्दत से रिश्ते निभाए नेताजी ने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिश्ते बनाए और शिद्दत से रिश्ते निभाए नेताजी ने
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। सपा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन से जनपद के समाजवादी पार्टी समेत अन्य दलों के तमाम नेता बेहद मर्माहत हैं। धरती पुत्र कहे जाने वाले मुलायम सिंह का गाजीपुर से अटूट रिश्ता रहा है। अपने संबंधों के बेहद शिद्दत से निभाने के चलते जनपद के कई ऐसे नेता हैं जिनसे उनका पारिवारिक रिश्ता बन गया था। इनमें मुलायम सिंह के राजनीतिक गुरु माने जाने वाले रामकरन दादा, पूर्वमंत्री ओम प्रकाश सिंह, पूर्वमंत्री कैलाश यादव, पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा, पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह, पूर्व राज्यसभा सदस्य अरविंद सिंह और वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र जैसे नाम शामिल हैं।
माना जाता है कि मुलायम सिंह यादव को चौधरी चरण सिंह के नजदीक लाने में रामकरन दादा का काफी योगदान रहा है। साल 1967 में वह पहली बार सोशलिस्ट पार्टी से सबसे कम उम्र के विधायक बने तो चौधरी साहब ने खूब सराहा और अपनी सरकार में उन्हें मंत्री भी बनाया। गाजीपुर सपा में जब टिकट बंटवारे की बात चलती थी तो मुलायम सिंह यादव रामकरन दादा पर ही ज्यादा विश्वास करते थे। इसके अलावा मुलायम सिंह के बड़े फैसलों में रामकरन दादा की रायशुमारी जरूर होती थी।
अपने पांच दशक के राजनीतिक सफर में मुलायम कई बार गाजीपुर आए। साल 1978 में सहकारिता मंत्री रहते वह जंगीपुर आए थे। लोक दल (ब) बनने के बाद 1985 में क्रांति रथ लेकर वह गाजीपुर आए थे और टाउनहॉल में आयोजित सभा को संबोधित किया था। साल 1989 में देवीलाल के साथ लोकसभा के चुनाव में जगदीश कुशवाहा का प्रचार किया था। 1991 में जब सांसद अफजाल अंसारी के घर कुर्की हुई थी तब भी विरोध जताने के लिए गाजीपुर आए थे और लंका मैदान में सभा को संबोधित किया था।
विज्ञापन
मुलायम ने सामाजिक, राजनीतिक हर स्तर पर संबंध निभाए
बीएचयू में छात्र आंदोलन के दौरान ओमप्रकाश सिंह के घायल होने पर मुलायम सिंह उनसे मिलने पहुंचे थे। ओम प्रकाश सिंह का मुलायम सिंह से नजदीकी रिश्ते के चलते सपा से लगातार दिलदारनगर, जमानिया विधानसभा और गाजीपुर लोकसभा से टिकट मिलता रहा है। सपा से सबसे अधिक सात बार विधायक और एक बार सांसद बनकर जनपद में सपा के गढ़ को मजबूत किया। प्रदान किया। साल 1995 में मुलायम सिंह दिलदारनगर विधानसभा में ओम प्रकाश सिंह के लिए चुनाव प्रचार करने के लिए भी आए थे। जिसमें उनकी बड़ी जीत हुई थी और मुलायम सिंह ने मंत्री बनाने का वादा किया था। सप-बसपा गठबंधन होने से उस समय तो वादा पूरा नहीं कर सके लेकिन आगे के चुनाव में सपा की सरकार बनने पर पर्यटन मंत्री समेत अन्य अहम जिम्मेदारी देकर वादा पूरा किया।
रक्षा मंत्री रहने के दौरान सबुआ गांव के अरविंद सिंह के यहां वैवाहिक कार्यक्रम और ओम प्रकाश सिंह की चचेरी बहन की शादी में भी आए थे। मुख्यमंत्री रहते हुए वे वर्ष 2005-2006 में आरटीआई मैदान में कन्या विद्याधन बांटने भी आए थे और साल 2005-2006 में ही वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र, विजय कुमार और सत्यमित्र दूबे को यश भारती सम्मान देने के लिए लंका मैदान में आए थे।
मुलायम सिंह का निधन मेरी व्यक्तिगत क्षति है। मैंने उनसे संघर्ष सीखा है। गाजीपुर में पीएसी और सेंट्रल पुलिस की भर्ती कराने समेत नवोदय विद्यालय बनाने का काम उन्होंने ही किया था। औड़िहार-छपरा रेल मार्ग को उन्होंने बड़ी लाइन बनवाया था। -जगदीश कुशवाहा, पूर्व सांसद
नेताजी की जाना समाजवादी पार्टी के लिए बहुत बड़ी क्षति है। सपा के संरक्षक और मार्गदर्शक होने से पार्टी को काफी मजबूती मिलती थी। उनका संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। आज एक युग का अंत हुआ है। -रामधारी यादव, सपा जिलाध्यक्ष
पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह जी का निधन देश राजनीति में एक युग का अंत है। बहुत बड़ी शख्सियत थे। उनका निधन मेरी व्यक्तिगत क्षति भी है। नेता जी के पास बैठकर बड़े से बड़े लोग और गांव का छोटा से छोटा आदमी भी उनको अपना समझता था। वे सभी के समान व्यवहार रखते थे। कई आंदोलनों में उनके साथ रहा। उनके संघर्ष करने की क्षमता के सभी कायल है। भगवान उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें और इस उनके परिवार को दुख सहने की शक्ति दें। -ओम प्रकाश सिंह, पूर्व मंत्री और सपा विधायक
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षामंत्री, सपा के संस्थापक और मेरे राजनैतिक अभिभावक नेताजी मुलायम सिंह यादव जी के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके परिवार एवं समर्थकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। - राधेमोहन सिंह, पूर्व सांसद
विज्ञापन
माना जाता है कि मुलायम सिंह यादव को चौधरी चरण सिंह के नजदीक लाने में रामकरन दादा का काफी योगदान रहा है। साल 1967 में वह पहली बार सोशलिस्ट पार्टी से सबसे कम उम्र के विधायक बने तो चौधरी साहब ने खूब सराहा और अपनी सरकार में उन्हें मंत्री भी बनाया। गाजीपुर सपा में जब टिकट बंटवारे की बात चलती थी तो मुलायम सिंह यादव रामकरन दादा पर ही ज्यादा विश्वास करते थे। इसके अलावा मुलायम सिंह के बड़े फैसलों में रामकरन दादा की रायशुमारी जरूर होती थी।
विज्ञापन
अपने पांच दशक के राजनीतिक सफर में मुलायम कई बार गाजीपुर आए। साल 1978 में सहकारिता मंत्री रहते वह जंगीपुर आए थे। लोक दल (ब) बनने के बाद 1985 में क्रांति रथ लेकर वह गाजीपुर आए थे और टाउनहॉल में आयोजित सभा को संबोधित किया था। साल 1989 में देवीलाल के साथ लोकसभा के चुनाव में जगदीश कुशवाहा का प्रचार किया था। 1991 में जब सांसद अफजाल अंसारी के घर कुर्की हुई थी तब भी विरोध जताने के लिए गाजीपुर आए थे और लंका मैदान में सभा को संबोधित किया था।
विज्ञापन
मुलायम ने सामाजिक, राजनीतिक हर स्तर पर संबंध निभाए
बीएचयू में छात्र आंदोलन के दौरान ओमप्रकाश सिंह के घायल होने पर मुलायम सिंह उनसे मिलने पहुंचे थे। ओम प्रकाश सिंह का मुलायम सिंह से नजदीकी रिश्ते के चलते सपा से लगातार दिलदारनगर, जमानिया विधानसभा और गाजीपुर लोकसभा से टिकट मिलता रहा है। सपा से सबसे अधिक सात बार विधायक और एक बार सांसद बनकर जनपद में सपा के गढ़ को मजबूत किया। प्रदान किया। साल 1995 में मुलायम सिंह दिलदारनगर विधानसभा में ओम प्रकाश सिंह के लिए चुनाव प्रचार करने के लिए भी आए थे। जिसमें उनकी बड़ी जीत हुई थी और मुलायम सिंह ने मंत्री बनाने का वादा किया था। सप-बसपा गठबंधन होने से उस समय तो वादा पूरा नहीं कर सके लेकिन आगे के चुनाव में सपा की सरकार बनने पर पर्यटन मंत्री समेत अन्य अहम जिम्मेदारी देकर वादा पूरा किया।
रक्षा मंत्री रहने के दौरान सबुआ गांव के अरविंद सिंह के यहां वैवाहिक कार्यक्रम और ओम प्रकाश सिंह की चचेरी बहन की शादी में भी आए थे। मुख्यमंत्री रहते हुए वे वर्ष 2005-2006 में आरटीआई मैदान में कन्या विद्याधन बांटने भी आए थे और साल 2005-2006 में ही वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्र, विजय कुमार और सत्यमित्र दूबे को यश भारती सम्मान देने के लिए लंका मैदान में आए थे।
मुलायम सिंह का निधन मेरी व्यक्तिगत क्षति है। मैंने उनसे संघर्ष सीखा है। गाजीपुर में पीएसी और सेंट्रल पुलिस की भर्ती कराने समेत नवोदय विद्यालय बनाने का काम उन्होंने ही किया था। औड़िहार-छपरा रेल मार्ग को उन्होंने बड़ी लाइन बनवाया था। -जगदीश कुशवाहा, पूर्व सांसद
नेताजी की जाना समाजवादी पार्टी के लिए बहुत बड़ी क्षति है। सपा के संरक्षक और मार्गदर्शक होने से पार्टी को काफी मजबूती मिलती थी। उनका संघर्ष हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। आज एक युग का अंत हुआ है। -रामधारी यादव, सपा जिलाध्यक्ष
पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह जी का निधन देश राजनीति में एक युग का अंत है। बहुत बड़ी शख्सियत थे। उनका निधन मेरी व्यक्तिगत क्षति भी है। नेता जी के पास बैठकर बड़े से बड़े लोग और गांव का छोटा से छोटा आदमी भी उनको अपना समझता था। वे सभी के समान व्यवहार रखते थे। कई आंदोलनों में उनके साथ रहा। उनके संघर्ष करने की क्षमता के सभी कायल है। भगवान उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें और इस उनके परिवार को दुख सहने की शक्ति दें। -ओम प्रकाश सिंह, पूर्व मंत्री और सपा विधायक
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षामंत्री, सपा के संस्थापक और मेरे राजनैतिक अभिभावक नेताजी मुलायम सिंह यादव जी के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके परिवार एवं समर्थकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। - राधेमोहन सिंह, पूर्व सांसद