गाजीपुर। बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान वोट चोरी को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। अब यही प्रक्रिया प्रदेश में शुरू हो चुकी है, लेकिन जिले में हालात बिल्कुल उलट दिख रहे हैं। जिन राजनीतिक दलों ने बिहार में सबसे ज्यादा आवाज उठाई थी, वही यहां गंभीरता नहीं दिखा रहे।स्थिति यह है कि कांग्रेस, आप, सीपीआई समेत अन्य विपक्षी दलों ने अब तक एक भी बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) तैनात नहीं किया है, जबकि सत्ताधारी भाजपा के अलावा सपा, बसपा को छोड़ बाकी विपक्षी दल भी लगभग खाली हाथ हैं।जिले में सात विधानसभा क्षेत्रों में करीब 2959 बूथ है, जहां प्रशासन की ओर से 2959 बीएओ तैनात किए गए है। इनके कार्यों की निगरानी के लिए 304 सुपरवाइजर भी लगाए गए है। इसके अलावा प्रशासन ने राजनीतिक दलों से बूथ लेवल एजेंट(बीएलए) तैनात करने को पूर्व से कहता आ रहा है। प्रशासन शुरू से ही एसआईआर में बीएलए की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता आया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक बूथ पर बीएलए की मौजूदगी आवश्यक है ताकि वे बीएलओ के कामकाज पर निगरानी रख सकें। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिले तो बीएलए तत्काल आपत्ति दर्ज करा सकें और समय रहते सुधार कराया जा सके। एसआईआर 4 नवंबर से शुरू हो चुका है, लेकिन करीब पखवाड़ा बीतने के बाद भी कांग्रेस, आप, माकपा जैसे दल अपना बीएलए नहीं बना पाए हैं। संवाद