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Ghazipur News: गंगा में स्नान कर पितरों को जल अर्पित कर की मोक्ष की कामना
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सेवराई के परेमन शाह के पोखरे में स्नान के बाद पितरों को जल अर्पित करते लोग। स्रोत- ग्रामीण
गाजीपुर। पितृपक्ष के पहले दिन रविवार को शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित घाटों पर पितरों का तर्पण किया गया। लोगों ने गंगा में स्नान कर पितरों को जल अर्पित किया और उनके मोक्ष की कामना की। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाट पर जगह नहीं होने की वजह से कई लोगों ने आसपास के स्वच्छ स्थानों पर श्राद्ध एवं तर्पण किया।
पंडित मुनींंद्रनाथ उपाध्याय ने बताया कि रविवार से पितृपक्ष की शुरुआत हो गई। पितृपक्ष में प्रत्येक दिन तर्पण का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इन दिनों किए गए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। श्रद्धालुओं ने सुबह तालाबों और जलाशयों में स्नान किया। पुरोहितों ने पितरों का ध्यान कर उन्हें आमंत्रित किया। इसके बाद जल, कुश, अक्षत और तिल लेकर वैदिक मंत्रों से पितरों को जल अर्पित किया। लोगों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजन-अर्चन किया। घरों में भी श्राद्धकर्म संबंधी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। लोगों ने तिथि अनुसार पूर्वजों की पसंद के पकवानों का भोग लगाया। जरूरतमंदों को दान-पुण्य किया और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दी। पंडित मुनींंद्रनाथ उपाध्याय ने बताया कि इस बार पितृपक्ष 10 अक्तूबर तक चलेगा। अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा, जिसमें लोग पितरों को विदाई देंगे। उन्होंने बताया कि इन दिनों किए गए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पितरों की शांति के लिए किया तर्पण
सेवराई। क्षेत्र के परेमन शाह पोखरा पर रविवार को पितृपक्ष का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान कर अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण किया। लोगों ने विधि-विधान से पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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पंडित विपिन बिहारी पांडेय ने बताया कि सनातन धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व है। मान्यता है कि पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पूर्वजों को शांति व मोक्ष मिलता है, इससे पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। यह 16 दिनों तक चलता है। शास्त्रों के अनुसार, पिंडदान और तर्पण के लिए दोपहर का समय सही माना गया है। इस दौरान लहसुन, प्याज, मांस और शराब का सेवन नहीं किया जाता। नए कपड़े या गहने खरीदने से भी बचा जाता है। पितृपक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। संवाद
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पंडित मुनींंद्रनाथ उपाध्याय ने बताया कि रविवार से पितृपक्ष की शुरुआत हो गई। पितृपक्ष में प्रत्येक दिन तर्पण का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इन दिनों किए गए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। श्रद्धालुओं ने सुबह तालाबों और जलाशयों में स्नान किया। पुरोहितों ने पितरों का ध्यान कर उन्हें आमंत्रित किया। इसके बाद जल, कुश, अक्षत और तिल लेकर वैदिक मंत्रों से पितरों को जल अर्पित किया। लोगों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजन-अर्चन किया। घरों में भी श्राद्धकर्म संबंधी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। लोगों ने तिथि अनुसार पूर्वजों की पसंद के पकवानों का भोग लगाया। जरूरतमंदों को दान-पुण्य किया और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दी। पंडित मुनींंद्रनाथ उपाध्याय ने बताया कि इस बार पितृपक्ष 10 अक्तूबर तक चलेगा। अमावस्या के दिन पितृ विसर्जन किया जाएगा, जिसमें लोग पितरों को विदाई देंगे। उन्होंने बताया कि इन दिनों किए गए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
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पितरों की शांति के लिए किया तर्पण
सेवराई। क्षेत्र के परेमन शाह पोखरा पर रविवार को पितृपक्ष का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान कर अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण किया। लोगों ने विधि-विधान से पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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पंडित विपिन बिहारी पांडेय ने बताया कि सनातन धर्म में पितृपक्ष का खास महत्व है। मान्यता है कि पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पूर्वजों को शांति व मोक्ष मिलता है, इससे पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। यह 16 दिनों तक चलता है। शास्त्रों के अनुसार, पिंडदान और तर्पण के लिए दोपहर का समय सही माना गया है। इस दौरान लहसुन, प्याज, मांस और शराब का सेवन नहीं किया जाता। नए कपड़े या गहने खरीदने से भी बचा जाता है। पितृपक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। संवाद