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मशीनें हटाने की कवायद तेज

Fri, 23 May 2014 05:31 AM IST
Ghazipur
Ghazipur Updated Fri, 23 May 2014 05:31 AM IST
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गाजीपुर। करीब 15 वर्षों से बंद पड़ी नंदगंज चीनी मिल को चालू कराने को लेकर अभी भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई। शासन ने मिल को चालू कराने का कोई फैसला अभी तक नहीं लिया है लेकिन शासन ने यह जरूर संकेत दिए हैं कि यदि प्रदेश की बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू कराया गया तो दूसरे नंबर पर नंदगंज की चीनी मिल हो सकती है। वैसे मिल के महाप्रबंधक का कहना है कि शासन चाहेगा तो चार महीने के भीतर मिल को चालू कराने की कवायद शुरू हो सकती है। इसमें माननीयों का प्रयास भी काफी मायने रखता है।
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जिले में गन्ना की खेती की संभावना को देखते हुए वर्ष 1978 में नंदगंज में चीनी मिल की स्थापना की गई थी। 90 के दशक में मिल ने एक लाख बोरी चीनी का रिकार्ड उत्पादन किया था। लेकिन कुप्रबंधन के चलते करीब 15 वर्ष पहले मिल को प्रदेश सरकार ने बंद कर दिया। मिल के करीब एक हजार मजदूरों को वीआरएस भी दिया जा चुका है, लेकिन अभी भी मिल के मजदूरों का बकाया करोड़ों में है। इसको लेकर प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया। इधर बीते एक वर्ष में किसानों ने कई बार आंदोलन करके प्रदेश सरकार को जगाने का प्रयास किया। किसानों की मांग थी कि मिल को पूरी क्षमता के साथ चलाया जाए। इसके लिए नंदगंज चीनी मिल के सामने कई दिनों तक धरना हुआ। जब तय समय सीमा के भीतर शासन ने कोई फैसला नहीं लिया तो पूर्व विधायक राजेंद्र यादव के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने सरजू पांडेय पार्क में धरना दिया। अभी मिल को लेकर निर्णय लिए ही जा रहे थे कि तभी लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू कर दी गई। जिससे मिल की प्रक्रिया को रोकना पड़ा। अब मिल में रखी पुरानी मशीनों को हटाने की कवायद तेज हो गई है। मिल प्रशासन का कहना है कि प्रदेश की चार चीनी मिलों को चालू कराने को लेकर शासन गंभीर दिखाई दे रहा है। इसमें रामपुर, मथुरा जिले में छाता, गोरखपुर में पिपराइच, गाजीपुर नंदगंज और रामपुर की मिलों को चलाने के संकेत दिए गए हैं। यदि नंदगंज की चीनी मिल को चालू कराने में जिले के सत्ताधारी दल के माननीयों ने गंभीरता दिखाई तभी मिल को चालू कराने को लेकर शासन मजबूर हो सकता है। शासन की मंशा है कि मिल को प्राइवेट सेक्टर में चलाया जाए। यदि मिल चलती है तो एक बार फिर जिले में गन्ना की खेती लहलहा सकती है।
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