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बढ़ गई हर वर्ग में भटकाव की संभावना
Updated Fri, 07 Sep 2018 11:08 PM IST
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गाजीपुर। बालिगों के समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं माने जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है। यानी अब दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध को अपराध नहीं माना जाएगा। 24 साल तक चली कानूनी लड़ाई और कई अपीलों के बाद कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया है। चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने फ़ैसले में कहा है कि जो जैसा है, उसे उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। समलैंगिक लोगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है, इसे लेकर लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। अब तक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध माना गया था। इस फैसले को लेकर समाज के बुद्धिजीवी वर्ग में अलग-अलग प्रतिक्रिया है। कुछ इसे देश की धार्मिक संस्कृति में विकृति फैलाने वाला तो कुछ इसे स्वतंत्र जीवन यापन को बल देने वाला फैसला बता रहे हैं। समाजसेवी तथा जनप्रतिनिधि प्रमोद कुमार वर्मा ने कहा कि भारत गांवों का देश है। यहां की संस्कृति और परंपरा में हर जगह धार्मिक दृष्टिकोण है। इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा। इससे देश के हर वर्ग में एक भटकाव की संभावना है। स्वतंत्र रहना और संबंध में रहना दोनों अलग-अलग बातें हैं। सामाजिक गतिविधियों से सीधे सरोकार रखने वाले गंगाधर पांडेय का कहना है कि आज उस परिवेश में जहां ग्रामीण इलाकों में पढ़े-लिखे लोग भी इस मुद्दे पर बातचीत करने से संकोच करते हैं ऐसे में समलैंगिक संबंध को जायज ठहराना सही नहीं प्रतीत होता। यह आगे आने वाली पीढ़ी के लिए अभिशाप साबित हो सकता है। पीजी काूॅलेज के वरिष्ठ शिक्षक राघवेंद्र पांडेय इस फैसले को भारतीय संस्कृति और मर्यादा के खिलाफ मानते हैं। उनका कहना है कि इससे यौनाचार और अनैतिकता को बढ़ावा मिलेगा। युवा वर्ग में अधिक उच्श्रृंखलता आएगी। हमारा देश पग-पग पर धर्म का पालन करता है। इसमें संस्कारों का भी क्षय होगा। शिक्षक दीपू यादव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि सबको अपने-अपने हिसाब से जीने का अधिकार है। हम किसके साथ कैसे रहे यह चयन करने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। समलैंगिक पर कोर्ट ने जो निर्णय हुआ है बिल्कुल सही हुआ है। अब समाज अनावश्यक रुप से किसी पर दोषारोपण करने से बचेगा।
युवा पवन पांडेय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का समलैंगिक संबंध पर दिया गया फैसला सराहनीय है। सबको जीने का अधिकार है, इसलिए समलैंगिकों को भी सम्मान के साथ रहने का अधिकार मिलना चाहिए। देश में रुढ़िवादिता और संकीर्ण सोच को बदलना चाहिए। आज दुनिया काफी आगे निकल रही है।
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युवा पवन पांडेय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का समलैंगिक संबंध पर दिया गया फैसला सराहनीय है। सबको जीने का अधिकार है, इसलिए समलैंगिकों को भी सम्मान के साथ रहने का अधिकार मिलना चाहिए। देश में रुढ़िवादिता और संकीर्ण सोच को बदलना चाहिए। आज दुनिया काफी आगे निकल रही है।
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