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फींकी रही धूप की चमक, सर्द हवा के बीच कांपते रहे लोग
Updated Wed, 10 Jan 2018 11:03 PM IST
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गाजीपुर। सर्दी घटने के बजाए बढ़ती ही जा रही है। बुधवार की सुबह कोहरे की चादर तनी रही। दिन में 11 बजे धूप तो निकली, लेकिन इसकी चमक काफी फीकी रही। सर्द हवा के बीच लोग कांपते और ठिठुरते रहे।
पिछले कई दिनों से जिस तरह से ठंड कहर बरपा रही है, उससे जिले के लोगों को दिल्ली की सर्दी की याद आने लगी है। साल के पहले दिन मौसम जिस हिसाब से खुशगवार हुआ था, उससे लोगों में इस बात की आस जगी थी कि लगता है कि अब ठंड कुछ ही दिनों तक अपना प्रभाव दिखाएगी, लेकिन नौ दिनों से कोहरा के बीच ठंड का जबरदस्त प्रभाव जारी है। कोहरा के बीच कभी सुबह 11 तो कभी 12 बजे धूप जरूर निकल रही है, लेकिन ठंड के आगे इसका प्रभाव काफी कम रह रहा है। कोहरा के बाद बुधवार को दिन में करीब 1 बजे धूप निकली, लेकिन एक घंटा बाद ही बदली छाने से इसकी चमक फीकी पड़ गई। सर्द हवा के बीच लोग गलन और ठंड से ठिठुरते रहे। शाम होते ही ठंड में और इजाफा हो गया। इससे बचाव के लिए लोगों ने गर्म कपड़ों के साथ ही अलाव का सहारा लिया। सुबह ठिठुरते हुए बच्चे स्कूल गए। ठंड का सबसे खराब प्रभाव गरीबों पर पड़ रहा है। बचाव का पर्याप्त संसाधन न होने से वह ठिठुरते हुए रात बिता रहे हैं। रोटी की व्यवस्था के लिए दिहाड़ी मजदूर कांपते हुए काम कर रहे हैं।
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पिछले कई दिनों से जिस तरह से ठंड कहर बरपा रही है, उससे जिले के लोगों को दिल्ली की सर्दी की याद आने लगी है। साल के पहले दिन मौसम जिस हिसाब से खुशगवार हुआ था, उससे लोगों में इस बात की आस जगी थी कि लगता है कि अब ठंड कुछ ही दिनों तक अपना प्रभाव दिखाएगी, लेकिन नौ दिनों से कोहरा के बीच ठंड का जबरदस्त प्रभाव जारी है। कोहरा के बीच कभी सुबह 11 तो कभी 12 बजे धूप जरूर निकल रही है, लेकिन ठंड के आगे इसका प्रभाव काफी कम रह रहा है। कोहरा के बाद बुधवार को दिन में करीब 1 बजे धूप निकली, लेकिन एक घंटा बाद ही बदली छाने से इसकी चमक फीकी पड़ गई। सर्द हवा के बीच लोग गलन और ठंड से ठिठुरते रहे। शाम होते ही ठंड में और इजाफा हो गया। इससे बचाव के लिए लोगों ने गर्म कपड़ों के साथ ही अलाव का सहारा लिया। सुबह ठिठुरते हुए बच्चे स्कूल गए। ठंड का सबसे खराब प्रभाव गरीबों पर पड़ रहा है। बचाव का पर्याप्त संसाधन न होने से वह ठिठुरते हुए रात बिता रहे हैं। रोटी की व्यवस्था के लिए दिहाड़ी मजदूर कांपते हुए काम कर रहे हैं।
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