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धन से आराम मिल सकता है राम नाम नहीं
Updated Tue, 27 Nov 2018 10:48 PM IST
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मुहम्मदाबाद। भांवरकोल विकास खंड के लौवाडीह गांव में चल रही संगीतमय रामकथा के आठवें दिन मंगलवार की कथा में वाचस्पति यमुना प्रसाद ओझा ने कहा कि धन से आराम मिल सकता है राम नाम नहीं। इस लिए धन के पीछे न भागो। अगर मनुष्य बनना है तो सत्संग कीजिए, घमंड का त्याग कीजिए और सुख शांति से रहना सीखिए। यह सब रामकथा के श्रवण से ही संभव है।
कथा में श्री ओझा ने कहा कि भरत जैसा त्याग, समर्पण और भातृ प्रेम का दिव्यतम उदाहरण पूरे विश्व में नहीं मिलता है। मन हमारा नौकर है और आत्मा हमारी मालिक है। अगर हमारा मस्तिष्क आत्मा की आज्ञा का पालन करेगा उन्नति और विकास होगा। सत्मार्ग पर चलते हुए ईश्वर को प्राप्त करेंगे लेकिन अगर मन की बात मानेंगे तो क्षणिक उन्नति तो होगी लेकिन उत्तरोत्तर उसका पतन होगा। आज हमारा समाज मन की बात को अधिक मानता है जिससे समाज में नैतिकता का पतन हो रहा है। आत्मा की आवाज हमें तभी सुनाई देगी जब हम राम और भरत के आदर्शों का अनुकरण करेंगे। रामकथा श्रवण से मन पवित्र हो जाता है और उस मन में विराजमान होने के लिए ईश्वर उसी प्रकार खिंचा चला आता है जैसे सघन छाया के हरे भरे पेड़ के नीचे थका हुआ यात्री विश्राम पाने के लिए आकर्षित हो जाता है। इस अवसर पर जनकदेव राय, विजयशंकर पांडेय, रामचंद्र राय, मनोज राय, राधेरमण राय, रामचंद्र राय, योगेश राय, विशाल राय, सोनू राय, सतीश राय, रविंद्रनाथ राय, अंकित, आयूष, बबुआ, रोहित, आशुतोष आदि उपस्थित थे।
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कथा में श्री ओझा ने कहा कि भरत जैसा त्याग, समर्पण और भातृ प्रेम का दिव्यतम उदाहरण पूरे विश्व में नहीं मिलता है। मन हमारा नौकर है और आत्मा हमारी मालिक है। अगर हमारा मस्तिष्क आत्मा की आज्ञा का पालन करेगा उन्नति और विकास होगा। सत्मार्ग पर चलते हुए ईश्वर को प्राप्त करेंगे लेकिन अगर मन की बात मानेंगे तो क्षणिक उन्नति तो होगी लेकिन उत्तरोत्तर उसका पतन होगा। आज हमारा समाज मन की बात को अधिक मानता है जिससे समाज में नैतिकता का पतन हो रहा है। आत्मा की आवाज हमें तभी सुनाई देगी जब हम राम और भरत के आदर्शों का अनुकरण करेंगे। रामकथा श्रवण से मन पवित्र हो जाता है और उस मन में विराजमान होने के लिए ईश्वर उसी प्रकार खिंचा चला आता है जैसे सघन छाया के हरे भरे पेड़ के नीचे थका हुआ यात्री विश्राम पाने के लिए आकर्षित हो जाता है। इस अवसर पर जनकदेव राय, विजयशंकर पांडेय, रामचंद्र राय, मनोज राय, राधेरमण राय, रामचंद्र राय, योगेश राय, विशाल राय, सोनू राय, सतीश राय, रविंद्रनाथ राय, अंकित, आयूष, बबुआ, रोहित, आशुतोष आदि उपस्थित थे।
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