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जीएसटी पोर्टल के सुचारू न चलने से अधिवक्ताओं में आक्रोश
Updated Fri, 02 Nov 2018 11:36 PM IST
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गाजीपुर। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर टैक्स बार एसोसिएशन ने फुल्लनपुर स्थित वाणिज्य कर कार्यालय पर कार्य बहिष्कार कर शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन किया। इस मौके पर अधिक्ताओं ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त होने एवं जीएसटी पोर्टल के सुचारु रूप से न चलने के कारण उनमें आक्रोश है।
उन्होंने कहा कि शिकायतों की सुनवाई की व्यवस्था में सुधार किया जाए। शिकायत और उनके निवारण की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर करवाने की व्यवस्था की जाए। रिफंड की व्यवस्था में सुधार किया जाए। सभी प्रकार के रिफंड बीस दिन के अंदर देने की व्यवस्था करने के साथ ही विलंब शुल्क की व्यवस्था को समाप्त किया जाए। अपवाद स्वरूप अगर विलंब शुल्क आरोपित करना हो तो पहले व्यापारियों को समुचित अवसर प्रदान किया जाए। सिस्टम की खराबी के कारण कोई दंड या विलंब शुल्क न लगाया जाए। अगर सिस्टम के कारण कोई दंड/विलंब शुल्क लगा हो तो उसे समाप्त करने के साथ ही जीएसटीआर 1/2/3 प्रारूप को समाप्त कर पूर्व की तरह सिर्फ एक फार्म अधिसूचित किया जाए। कहा कि जीएसटी के नए विधान व्यवस्था को पूर्ण रूप से न समझ पाने के कारण प्रस्तुत किए गए विभिन्न प्रपत्रों की त्रुटियों को संशोधित सुधारने की व्यवस्था बनाई जाए। वार्षिक विवरणों की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2018 है और अभी तक जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। उक्त को जल्द से जल्द पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए तथा उसकी अंति म तिथि 31 मार्च किया जाए। जब तक हमारी 17 सूत्री मांगों को नहीं माना जाता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। इस अवसर पर चंद्रिका प्रसाद वर्मा, राकेश दीक्षित, मुकेश श्रीवास्तव, सुनील कुमार राय, रमेश, आशीष जायसवाल, मो. इसराफिल, सुभाष जायसवाल, जयशंकर, राघवेंद्र तिवारी, राकेश केशरी आदि अधिवक्ता उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि शिकायतों की सुनवाई की व्यवस्था में सुधार किया जाए। शिकायत और उनके निवारण की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर करवाने की व्यवस्था की जाए। रिफंड की व्यवस्था में सुधार किया जाए। सभी प्रकार के रिफंड बीस दिन के अंदर देने की व्यवस्था करने के साथ ही विलंब शुल्क की व्यवस्था को समाप्त किया जाए। अपवाद स्वरूप अगर विलंब शुल्क आरोपित करना हो तो पहले व्यापारियों को समुचित अवसर प्रदान किया जाए। सिस्टम की खराबी के कारण कोई दंड या विलंब शुल्क न लगाया जाए। अगर सिस्टम के कारण कोई दंड/विलंब शुल्क लगा हो तो उसे समाप्त करने के साथ ही जीएसटीआर 1/2/3 प्रारूप को समाप्त कर पूर्व की तरह सिर्फ एक फार्म अधिसूचित किया जाए। कहा कि जीएसटी के नए विधान व्यवस्था को पूर्ण रूप से न समझ पाने के कारण प्रस्तुत किए गए विभिन्न प्रपत्रों की त्रुटियों को संशोधित सुधारने की व्यवस्था बनाई जाए। वार्षिक विवरणों की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2018 है और अभी तक जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। उक्त को जल्द से जल्द पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए तथा उसकी अंति म तिथि 31 मार्च किया जाए। जब तक हमारी 17 सूत्री मांगों को नहीं माना जाता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। इस अवसर पर चंद्रिका प्रसाद वर्मा, राकेश दीक्षित, मुकेश श्रीवास्तव, सुनील कुमार राय, रमेश, आशीष जायसवाल, मो. इसराफिल, सुभाष जायसवाल, जयशंकर, राघवेंद्र तिवारी, राकेश केशरी आदि अधिवक्ता उपस्थित थे।
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