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यमुना लगातार हो रही मैली, दो गुनी हुई खतरनाक बीओडी की मात्रा
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यमुना में बढ़ रहा प्रदूषण। रोक के नहीं इंतजाम। शहर के नालों का पानी यमुना में गिर रहा है।
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। शहर की सीवर लाइन से निकलने वाला गंदा पानी और सिल्ट यमुना नदी को विषैला कर रही है। सोफीपुर में निर्माणाधीन एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) शुरू नहीं होने के कारण नगरीय क्षेत्र से निकलने वाला गंदा पानी यमुना में घुल रहा है। ऐसे में यमुना नदी में बीओडी (बायो आक्सीजन डिमांड) की मात्रा गत वर्ष की अपेक्षा दोगुनी स्तर पर पहुंच गई है।
नगरीय क्षेत्र के नाले और नालियों से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए ग्राम सोफीपुर (यमुना की तलहटी) में करोड़ों की लागत से एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। ताकि गंदा पानी यमुना नदी में प्रवाहित नहीं हो। लेकिन एसटीपी शुरू होने में हो रही देरी जिले में प्रवाहित यमुना नदी में प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है। नगर क्षेत्र से निकलने वाला नाले-नालियों का पानी यमुना नदी में गिर रहा है।
इस कारण यमुना के पानी में बीओडी की मात्रा बढ़ गई है। वर्तमान समय में यमुना जल में बीओडी की मात्रा 20-25 पीपीएम है जो कि सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक है। जबकि गत वर्ष हुए एक परीक्षण के दौरान यमुना जल में इसकी मात्रा मात्रा लगभग 10-12 प्रतिशत मापी गई थी।
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यमुना जल को विषैला होने से बचाव को चाहिए 30.75 लाख
यमुना जल विषैला होने से रोकने एवं नगरीय क्षेत्र में गंदा पानी के जलभराव के रोकथाम को यमुना की तलहटी में बसे ग्राम सोफीपुर में 202 करोड़ की लागत से एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) यानि मल जल शोधन संयंत्र का निर्माण किया जा रहा है। एसटीपी का निर्माण लगभग पूर्ण है।
लेकिन कुछ जरूरी मशीनरी, श्रमांश एवं विद्युत कनेक्शन की अनुपलब्धता के कारण एसटीपी फिलहाल चालू नहीं है। इसके लिए कुल लागत की शेष धनराशि 30.75 लाख रुपये शासन स्तर पर जिले को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं। हालांकि जिम्मेदार विभागों ने शासन को इस बारे में कई बार पत्र लिखे। सदर विधायक मनीष असीजा ने भी यह मामला विधानसभा की आश्वासन समिति की बैठक में रखा था। शेष कार्य के लिए फंड रिलीज किया जाए इसके लिए पत्र भी शासन को लिखा है।
जलीय जंतुओं के लिए हानिकारक है बीओडी
जलाशयों व प्रवाहित जल में बीओडी की मात्रा बढ़ जाने के कारण पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। इससे मछली व पानी में रहकर हानिकारक कीटों को खाने वाले जंतु मर जाते हैं। पानी में बीओडी की मात्रा का इजाफा होना खतरनाक है।
श्रीकृष्ण शर्मा, जिला सहायक मत्स्य अधिकारी
एसटीपी निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। बिजली कनेक्शन एवं कुछ मशीनों का अभाव है। शासन से शेष बजट मांगा है। उम्मीद है कि एसटीपी जल्द सुचारु होगी।
ओमवीर सिंह, एक्सईएन जल निगम
यमुना जल में इस वर्ष बायो आक्सीजन डिमांड की मात्रा बढ गई है। गत वर्ष यमुना जल में बीओडी की मात्रा दस पीपीएम थी। जो कि इस वर्ष 20-25 पीपीएम का आंकड़ा पार चुकी है। सीवर का पानी सीधे यमुना तक पहुंचने से ऐसा हो सकता है।
मनोज कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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नगरीय क्षेत्र के नाले और नालियों से निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए ग्राम सोफीपुर (यमुना की तलहटी) में करोड़ों की लागत से एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है। ताकि गंदा पानी यमुना नदी में प्रवाहित नहीं हो। लेकिन एसटीपी शुरू होने में हो रही देरी जिले में प्रवाहित यमुना नदी में प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है। नगर क्षेत्र से निकलने वाला नाले-नालियों का पानी यमुना नदी में गिर रहा है।
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इस कारण यमुना के पानी में बीओडी की मात्रा बढ़ गई है। वर्तमान समय में यमुना जल में बीओडी की मात्रा 20-25 पीपीएम है जो कि सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक है। जबकि गत वर्ष हुए एक परीक्षण के दौरान यमुना जल में इसकी मात्रा मात्रा लगभग 10-12 प्रतिशत मापी गई थी।
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यमुना जल को विषैला होने से बचाव को चाहिए 30.75 लाख
यमुना जल विषैला होने से रोकने एवं नगरीय क्षेत्र में गंदा पानी के जलभराव के रोकथाम को यमुना की तलहटी में बसे ग्राम सोफीपुर में 202 करोड़ की लागत से एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) यानि मल जल शोधन संयंत्र का निर्माण किया जा रहा है। एसटीपी का निर्माण लगभग पूर्ण है।
लेकिन कुछ जरूरी मशीनरी, श्रमांश एवं विद्युत कनेक्शन की अनुपलब्धता के कारण एसटीपी फिलहाल चालू नहीं है। इसके लिए कुल लागत की शेष धनराशि 30.75 लाख रुपये शासन स्तर पर जिले को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं। हालांकि जिम्मेदार विभागों ने शासन को इस बारे में कई बार पत्र लिखे। सदर विधायक मनीष असीजा ने भी यह मामला विधानसभा की आश्वासन समिति की बैठक में रखा था। शेष कार्य के लिए फंड रिलीज किया जाए इसके लिए पत्र भी शासन को लिखा है।
जलीय जंतुओं के लिए हानिकारक है बीओडी
जलाशयों व प्रवाहित जल में बीओडी की मात्रा बढ़ जाने के कारण पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। इससे मछली व पानी में रहकर हानिकारक कीटों को खाने वाले जंतु मर जाते हैं। पानी में बीओडी की मात्रा का इजाफा होना खतरनाक है।
श्रीकृष्ण शर्मा, जिला सहायक मत्स्य अधिकारी
एसटीपी निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। बिजली कनेक्शन एवं कुछ मशीनों का अभाव है। शासन से शेष बजट मांगा है। उम्मीद है कि एसटीपी जल्द सुचारु होगी।
ओमवीर सिंह, एक्सईएन जल निगम
यमुना जल में इस वर्ष बायो आक्सीजन डिमांड की मात्रा बढ गई है। गत वर्ष यमुना जल में बीओडी की मात्रा दस पीपीएम थी। जो कि इस वर्ष 20-25 पीपीएम का आंकड़ा पार चुकी है। सीवर का पानी सीधे यमुना तक पहुंचने से ऐसा हो सकता है।
मनोज कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड