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व्यापारी नहीं दे सके रुपये का हिसाब, जब्त
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद
Updated Mon, 16 Jan 2017 11:21 PM IST
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व्यापारी नहीं दे सके रुपये का हिसाब, जब्त
- फोटो : अमर उजाला
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चेकिंग के दौरान दक्षिण पुलिस द्वारा पकड़ी गई तीन लाख की नकदी का हिसाब आगरा और मैनपुरी के व्यापारी नहीं दे सके। आयकर विभाग की टीम ने जांच कर नकदी थाने में जमा करा ली। नोटिस का जवाब नहीं देने पर नकदी अनुविक्षण समिति को सौंप दी जाएगी।
सुभाष तिराहे पर चेकिंग के दौरान दक्षिण पुलिस ने आगरा और मैनपुरी के व्यापारियों मुकेश कुमार निवासी गोबर चौकी ताजगंज आगरा, दिनेश कुमार निवासी जी ब्लाक कमलानगर आगरा और अमन गुप्ता निवासी कचहरी रोड मैनपुरी से 2.93 लाख 840 रुपये बरामद किए थे। व्यापारियों का कहना था कि उनकी हार्डवेयर की दुकान है। वह आगरा से माल खरीदने जा रहे थे। पूछताछ में व्यापारी रुपयों का हिसाब पुलिस को नहीं दे सके। इस कारण पुलिस ने देर रात रुपये जब्त कर आयकर विभाग को सूचना दी थी। सोमवार को दक्षिण थाने पहुंची आयकर विभाग की टीम ने जांच कर रुपये का हिसाब देने के लिए व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिए। सीओ सिटी ओमकार यादव का कहना है कि यदि व्यापारी रुपये का हिसाब नहीं देते है तो यह रुपये अनुविक्षण समिति को सौंप दिए जाएंगे। चुनाव के समय जिलाधिकारी द्वारा एक अनुविक्षण समिति का गठन किया जाता है। आचार संहिता के दौरान दस लाख से कम की रकम पकड़ी जाती है तो समिति को सौंपी जाती है। दस लाख से अधिक की रकम आयकर विभाग को दी जाती है।
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सुभाष तिराहे पर चेकिंग के दौरान दक्षिण पुलिस ने आगरा और मैनपुरी के व्यापारियों मुकेश कुमार निवासी गोबर चौकी ताजगंज आगरा, दिनेश कुमार निवासी जी ब्लाक कमलानगर आगरा और अमन गुप्ता निवासी कचहरी रोड मैनपुरी से 2.93 लाख 840 रुपये बरामद किए थे। व्यापारियों का कहना था कि उनकी हार्डवेयर की दुकान है। वह आगरा से माल खरीदने जा रहे थे। पूछताछ में व्यापारी रुपयों का हिसाब पुलिस को नहीं दे सके। इस कारण पुलिस ने देर रात रुपये जब्त कर आयकर विभाग को सूचना दी थी। सोमवार को दक्षिण थाने पहुंची आयकर विभाग की टीम ने जांच कर रुपये का हिसाब देने के लिए व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिए। सीओ सिटी ओमकार यादव का कहना है कि यदि व्यापारी रुपये का हिसाब नहीं देते है तो यह रुपये अनुविक्षण समिति को सौंप दिए जाएंगे। चुनाव के समय जिलाधिकारी द्वारा एक अनुविक्षण समिति का गठन किया जाता है। आचार संहिता के दौरान दस लाख से कम की रकम पकड़ी जाती है तो समिति को सौंपी जाती है। दस लाख से अधिक की रकम आयकर विभाग को दी जाती है।
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