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बरसात से जनजीवन अस्त व्यस्त
ब्यूरो अमर उजाला, फीरोजाबाद
Updated Thu, 22 Jan 2015 11:27 PM IST
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बारिश से ठिठुरा आमजन, जनजीवन हुआ बेहाल
निचले इलाकों में जलभराव, स्कूलों में दिखाई दिया रैनी डे
सुबह से शाम तक चलता रहा रिम-झिम बारिश का क्रम
गुरुवार को सुहागनगरी बदलते मौसम की मार की चपेट में दिखाई दी, तड़के शुरू हुआ बारिश का क्रम शाम तक नहीं थमा, घरों से आमजन भीगते हुए निकले शाम को घर वापस लौटे तो बूंदा-बांदी के बीच। बारिश का असर हर किसी पर दिखा, स्कूलों में रैनी डे, बाजारों में चहुंओर सन्नाटा, निचले इलाकों में जलभराव और किसानों के चेहरों पर चिंता का भाव था। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा बदलता मौसम अन्नदाता के लिए शुभ संकेत नहीं है..
बदलते मौसम और बारिश से अन्नदाता कांप उठा, उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दीं। देतीं भी क्यों नहीं वर्षभर की मेहनत की कमाई नीले गगन के नीचे जो पड़ी है। गुरुवार को हुई बारिश से आलू पर मार पड़ेगी तो गेहूं, जौ एवं चना आदि फसलों के लिए यह बारिश लाभदायक है। हजारों हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिर्फ आलू की फसल होती है। जसराना में पूरे दिन बारिश का क्रम चलता रहा। फरिहा क्षेत्र में बारिश होने के कारण आमजन धरों में दुबकने को विवश हुआ। नारखी की मिर्च की फसल बारिश से प्रभावित होगी। सिरसागंज एवं एका में बारिश चलती रही।
इन इलाकों में हुआ जलभराव
रिम-झिम बारिश के कारण नगर के गांधी पार्क के अंदर, नई बस्ती, चंद्रवार गेट, पेमेश्वर गेट पुल, बस स्टेंड के सामने, सर्विस रोड, बोधाश्रम रोड, तिलक नगर दाऊदयाल इंटर कालेज के सामने, नगर निगम के शिक्षा विभाग के कार्यालय के अंदर तक पानी भरा दिखाई दिया। वहीं नई आबादी वाले इलाकों में फिसलन हो गई।
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खाली रहा गांधीपार्क, टहलने वाले गायब
गुरुवार को तड़के से प्रारंभ हुई बारिश के कारण तड़के चार बजे टहलने के लिए निकलने वालों को भी प्लान बदलना पड़ा। बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। यही कारण था कि सुबह गांधीपार्क खाली पड़ा रहा। गांधीपार्क के साथ ही रोडवेज बस स्टेंड पर भी सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
अधिकांश स्कूलों में रैनी डे
बारिश के कारण अधिकांश स्कूलों में रैनी-डे हो गया। वहीं कान्वेंट स्कूलों में परीक्षा होने के कारण अभिभावक भीगते हुए बच्चों को छोड़ने स्कूल पहुंचे। छुट्टी के बाद वापस लेने के लिए कोई छतरी लगाकर तो कोई बरसाती को पहनकर पहुंचा। बारिश के कारण इंटर एवं डिग्री कालेजों तक में भी पढ़ाई नहीं हो सकी। स्टाफ मौसम खराब होने के कारण जल्दी घर वापस हो गया। गांवों के परिषदीय स्कूलों में तो शिक्षक पहुंचे और छात्र-छात्राओं के आने का इंतजार करते रहे।
हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे दुकानदार
बदले मौसम का ही असर था कि गुरुवार के दिन बाजार काफी देर से खुला, इनमें भी अधिकांश दुकानें तो खुली ही नहीं। पूरे दिन रिम-झिम बारिश का क्रम चलने के कारण ग्राहक नहीं आ रहे थे। शाम को बाजार रुटीन के बजाय जल्दी बंद हो गया। छाता के ही साथ पन्नी एवं त्रिपाल की डिमांड बढ़ गई थी।
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निचले इलाकों में जलभराव, स्कूलों में दिखाई दिया रैनी डे
सुबह से शाम तक चलता रहा रिम-झिम बारिश का क्रम
गुरुवार को सुहागनगरी बदलते मौसम की मार की चपेट में दिखाई दी, तड़के शुरू हुआ बारिश का क्रम शाम तक नहीं थमा, घरों से आमजन भीगते हुए निकले शाम को घर वापस लौटे तो बूंदा-बांदी के बीच। बारिश का असर हर किसी पर दिखा, स्कूलों में रैनी डे, बाजारों में चहुंओर सन्नाटा, निचले इलाकों में जलभराव और किसानों के चेहरों पर चिंता का भाव था। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा बदलता मौसम अन्नदाता के लिए शुभ संकेत नहीं है..
बदलते मौसम और बारिश से अन्नदाता कांप उठा, उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दीं। देतीं भी क्यों नहीं वर्षभर की मेहनत की कमाई नीले गगन के नीचे जो पड़ी है। गुरुवार को हुई बारिश से आलू पर मार पड़ेगी तो गेहूं, जौ एवं चना आदि फसलों के लिए यह बारिश लाभदायक है। हजारों हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिर्फ आलू की फसल होती है। जसराना में पूरे दिन बारिश का क्रम चलता रहा। फरिहा क्षेत्र में बारिश होने के कारण आमजन धरों में दुबकने को विवश हुआ। नारखी की मिर्च की फसल बारिश से प्रभावित होगी। सिरसागंज एवं एका में बारिश चलती रही।
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इन इलाकों में हुआ जलभराव
रिम-झिम बारिश के कारण नगर के गांधी पार्क के अंदर, नई बस्ती, चंद्रवार गेट, पेमेश्वर गेट पुल, बस स्टेंड के सामने, सर्विस रोड, बोधाश्रम रोड, तिलक नगर दाऊदयाल इंटर कालेज के सामने, नगर निगम के शिक्षा विभाग के कार्यालय के अंदर तक पानी भरा दिखाई दिया। वहीं नई आबादी वाले इलाकों में फिसलन हो गई।
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खाली रहा गांधीपार्क, टहलने वाले गायब
गुरुवार को तड़के से प्रारंभ हुई बारिश के कारण तड़के चार बजे टहलने के लिए निकलने वालों को भी प्लान बदलना पड़ा। बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। यही कारण था कि सुबह गांधीपार्क खाली पड़ा रहा। गांधीपार्क के साथ ही रोडवेज बस स्टेंड पर भी सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
अधिकांश स्कूलों में रैनी डे
बारिश के कारण अधिकांश स्कूलों में रैनी-डे हो गया। वहीं कान्वेंट स्कूलों में परीक्षा होने के कारण अभिभावक भीगते हुए बच्चों को छोड़ने स्कूल पहुंचे। छुट्टी के बाद वापस लेने के लिए कोई छतरी लगाकर तो कोई बरसाती को पहनकर पहुंचा। बारिश के कारण इंटर एवं डिग्री कालेजों तक में भी पढ़ाई नहीं हो सकी। स्टाफ मौसम खराब होने के कारण जल्दी घर वापस हो गया। गांवों के परिषदीय स्कूलों में तो शिक्षक पहुंचे और छात्र-छात्राओं के आने का इंतजार करते रहे।
हाथ पर हाथ रखे बैठे रहे दुकानदार
बदले मौसम का ही असर था कि गुरुवार के दिन बाजार काफी देर से खुला, इनमें भी अधिकांश दुकानें तो खुली ही नहीं। पूरे दिन रिम-झिम बारिश का क्रम चलने के कारण ग्राहक नहीं आ रहे थे। शाम को बाजार रुटीन के बजाय जल्दी बंद हो गया। छाता के ही साथ पन्नी एवं त्रिपाल की डिमांड बढ़ गई थी।