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क्षय रोगी के संपर्क में आए परिजन को दी जाएगी टीपीटी
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क्षय रोगी के संपर्क में आए परिजन को दी जाएगी टीपीटी
- संक्रमण से बचाव की तैयारी, एक माह में इस पर होगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। स्वास्थ्य विभाग अब क्षय रोगियों के साथ-साथ उनके परिजनों की भी स्क्रीनिंग करेगा। क्षय रोगी के संपर्क में रहने वाले परिवार के लोगों को भी टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) दी जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षण का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक माह में इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा। इसमें टीबी संक्रमितों के परिजन की जांच के बाद एहतियात के तौर पर दवा दी जाएगी।
केंद्र सरकार ने देश को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में पांच वर्ष तक के बच्चों को दी जाने वाली प्रिवेंटिव थेरेपी टीबी रोगी के परिवार के हर सदस्य को भी दी जाएगी। जिससे टीबी के मरीज से अन्य लोग संक्रमित न हो सकें। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक माह के अंदर इस योजना को शुरू कर दिया जाएगा। जिले में 4500 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। जिला कार्यक्रम समन्वयक मनीष कुमार ने बताया कि यदि किसी आदमी को फेफड़े की टीबी है तो वह कम से कम 15 व्यक्तियों को टीबी फैलाता है। ऐेसे में मरीजों के परिवार के लोगों के ऊपर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
क्षय रोगी परिवार के लगातार संपर्क में रहता है। इसके कारण स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर सतर्कता बरत रहा है। क्षय रोगी के परिवार के हर सदस्य की टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी की जाएगी। इसके साथ ही क्षय रोग के बचाव के लिए जांच के बाद एहतियात के तौर पर दवा दी जाएगी।
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- डॉ. अशोक कुमार, प्रभारी जिला क्षय रोग अधिकारी
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- संक्रमण से बचाव की तैयारी, एक माह में इस पर होगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। स्वास्थ्य विभाग अब क्षय रोगियों के साथ-साथ उनके परिजनों की भी स्क्रीनिंग करेगा। क्षय रोगी के संपर्क में रहने वाले परिवार के लोगों को भी टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) दी जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षण का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक माह में इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा। इसमें टीबी संक्रमितों के परिजन की जांच के बाद एहतियात के तौर पर दवा दी जाएगी।
केंद्र सरकार ने देश को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी क्रम में अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में पांच वर्ष तक के बच्चों को दी जाने वाली प्रिवेंटिव थेरेपी टीबी रोगी के परिवार के हर सदस्य को भी दी जाएगी। जिससे टीबी के मरीज से अन्य लोग संक्रमित न हो सकें। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक माह के अंदर इस योजना को शुरू कर दिया जाएगा। जिले में 4500 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। जिला कार्यक्रम समन्वयक मनीष कुमार ने बताया कि यदि किसी आदमी को फेफड़े की टीबी है तो वह कम से कम 15 व्यक्तियों को टीबी फैलाता है। ऐेसे में मरीजों के परिवार के लोगों के ऊपर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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क्षय रोगी परिवार के लगातार संपर्क में रहता है। इसके कारण स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर सतर्कता बरत रहा है। क्षय रोगी के परिवार के हर सदस्य की टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी की जाएगी। इसके साथ ही क्षय रोग के बचाव के लिए जांच के बाद एहतियात के तौर पर दवा दी जाएगी।
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- डॉ. अशोक कुमार, प्रभारी जिला क्षय रोग अधिकारी