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ट्रेन पर नहीं फोन और बात पर है ध्यान
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 27 Jan 2015 11:56 PM IST
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मथुरा में हुए दर्दनाक हादसे के बाद भी लोग रेल ट्रैक पर बेधड़क निकलते हैं। रेलवे फाटक बंद होने के बाद भी लोग गाड़ियां निकालते हैं। मथुरा में हुई घटना के बाद मंगलवार को जब रेलवे क्रासिंग पर अमर उजाला की टीम पहुंची तो वहां किसी का ध्यान कैमरे के फ्लैश पर नहीं गया। फोन पर बात करते युवा ट्रैक पार कर रहे थे।
मंगलवार को शहर की प्रमुख रेलवे क्रासिंग लेबर कालोनी में टीम दोपहर करीब एक बजे पहुंची, तो कोई फोन पर बात करते हुए ट्रैक पार कर रहा था, तो कोई ट्रैक से गुजर रही मालगाड़ी के पास खड़े होकर मोबाइल पर बात करता दिखाई दिया। एक युवा तो मोबाइल पर इतना व्यस्त होकर ट्रैक पार कर रहा था कि कैमरे की फ्लैश पड़ने के बाद भी उसकी निगाह फोन से नहीं हटी, तो एक व्यक्ति फाटक के पास मेन अपलाइन के किनारे खड़ा होकर फोन पर बात करने में व्यस्त था। ऐसे में यदि कोई ट्रैन धड़धड़ाती गुजरे तो क्या हाल होगा। कई बार ट्रैक पर दर्दनाक हादसे हुए, यातायात माह हो या सड़क सुरक्षा सप्ताह पुलिस प्रशासन लोगों को प्रचार प्रसार के जरिए जागरूकता करता है। फिर भी लोग इसे नजरअंदाज कर दुर्घटना का शिकार होते हैं।
ट्रैक पर हुए हादसे एक नजर में
- तीन जून 2013 को ट्रैक पार करते समय एक ही परिवार के पांच लोग मरे।
- नौ जून 2013 को ट्रैक किनारे प्रेमी युवल की ट्रेन की चपेट में आने से मौत।
- दस जून 2013 ट्रैक पार करते समय देवरानी-जेठानी की मौत।
- 21 जुलाई 2013 को शिकोहाबाद में ट्रैक पार करते समय दो छात्रों की मौत।
- माह अक्टूबर 2014 को आसफाबाद रेलवे क्रासिंग पर बाइक सवार युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मौत
यह है कार्रवाई का प्रावधान
रेल ट्रैेक पार करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार आरपीएफ के पास है। इसके अंतर्गत तीन माह की सजा या फिर जुर्माना या दोनों ही हो सकती है। फिर भी लोग इस सजा को नजर अंदाज करते हुए ट्रेक पार करते हर वक्त दिखे जा सकते है।
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मंगलवार को शहर की प्रमुख रेलवे क्रासिंग लेबर कालोनी में टीम दोपहर करीब एक बजे पहुंची, तो कोई फोन पर बात करते हुए ट्रैक पार कर रहा था, तो कोई ट्रैक से गुजर रही मालगाड़ी के पास खड़े होकर मोबाइल पर बात करता दिखाई दिया। एक युवा तो मोबाइल पर इतना व्यस्त होकर ट्रैक पार कर रहा था कि कैमरे की फ्लैश पड़ने के बाद भी उसकी निगाह फोन से नहीं हटी, तो एक व्यक्ति फाटक के पास मेन अपलाइन के किनारे खड़ा होकर फोन पर बात करने में व्यस्त था। ऐसे में यदि कोई ट्रैन धड़धड़ाती गुजरे तो क्या हाल होगा। कई बार ट्रैक पर दर्दनाक हादसे हुए, यातायात माह हो या सड़क सुरक्षा सप्ताह पुलिस प्रशासन लोगों को प्रचार प्रसार के जरिए जागरूकता करता है। फिर भी लोग इसे नजरअंदाज कर दुर्घटना का शिकार होते हैं।
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ट्रैक पर हुए हादसे एक नजर में
- तीन जून 2013 को ट्रैक पार करते समय एक ही परिवार के पांच लोग मरे।
- नौ जून 2013 को ट्रैक किनारे प्रेमी युवल की ट्रेन की चपेट में आने से मौत।
- दस जून 2013 ट्रैक पार करते समय देवरानी-जेठानी की मौत।
- 21 जुलाई 2013 को शिकोहाबाद में ट्रैक पार करते समय दो छात्रों की मौत।
- माह अक्टूबर 2014 को आसफाबाद रेलवे क्रासिंग पर बाइक सवार युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मौत
यह है कार्रवाई का प्रावधान
रेल ट्रैेक पार करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार आरपीएफ के पास है। इसके अंतर्गत तीन माह की सजा या फिर जुर्माना या दोनों ही हो सकती है। फिर भी लोग इस सजा को नजर अंदाज करते हुए ट्रेक पार करते हर वक्त दिखे जा सकते है।
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