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समर्थन मूल्य से अधिक में बाजार में बिक रहा गेहूं
Updated Fri, 01 Apr 2016 11:02 PM IST
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किसानों का गेहूं खरीदने को खरीद केंद्र एक अप्रैल को स्थापित नहीं हो सके। कोटला रोड स्थित मंडी प्रांगण में कई किसान खरीद केंद्र को खोजते दिखाई दिए। पुराना गेहूं लेकर पहुंचे कई किसानों ने आढ़तियों के यहां 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री किया। विरोधी दलों ने गेहूं की दरों को काफी कम बताया है।
प्रशासन की ओर से किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जिले में 63 खरीद केंद्र एक अप्रैल से स्थापित करने का दावा किया था लेकिन खरीद एजेंसियों की व्यवस्थाएं पहले ही दिन फेल दिखाई दीं। कोटला रोड स्थित मंडी समिति परिसर में जिस दुकान पर खरीद केंद्र स्थापित होता है वह दुकान बंद दिखाई दी। आढ़तियों के यहां पुराने गेहूं की बिक्री कुछ किसान करते दिखाई दिए। वहां गेहूं 1575 से लेकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा था। किसानों का कहना था कि 1525 रुपये समर्थन मूल्य घोषित किया जाना गलत है। पीसीएफ के खरीद केंद्र स्थापित नहीं हो सके। अधिकांश केंद्रों के प्रभारी पहले दिन खरीद केंद्र स्थापित करने की व्यवस्था करते दिखाई दिए। डिप्टी आरएमओ राघवेंद्र यादव ने कहा कि गेहूं खरीद केंद्र चार अप्रैल से प्रारंभ हो जाएंगे। किसानों का नया गेहूं एक पखवाड़े के बाद आना शुरू हो जाएगा। तब तक सभी केंद्र प्रारंभ हो जाएंगे।
गेहूं का समर्थन मूल्य किसानों की मेहनत के हिसाब से ही काफी कम है। 1525 रुपये से अधिक अभी बाजार में ही गेहूं बिक रहा है। सरकार को किसानों की कोई चिंता ही नहीं है।
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हेमंत प्रताप सिंह, बसपा जोन कोआर्डिनेटर फीरोजाबाद।
किसानों की चिंता न प्रदेश सरकार को हैं न ही केंद्र को। यही कारण है कि उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं देना चाहते हैं। गेहूं का समर्थन मूल्य 1650 रुपये हो।
हरीशंकर तिवारी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
खरीद केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक्स कांटे होने चाहिए। लक्ष्य के अनुरूप खरीद कभी नहीं हुई इसके तीन कारण हैं। पहला घटतौली, दूसरा बिचौलियों के द्वारा शोषण, तीसरा वारदाना की कमी व समय से भुगतान नहीं होना। खुले बाजार में दरें 1600 हैं तो सरकार को 1800 रुपये समर्थन मूल्य रखना चाहिए।
मनीष असीजा, नगर विधायक भाजपा
सरकार किसानों के हितों के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में जो समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है वह किसानों के लिए है। अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ दिया जाएगा। खुले बाजार में गेहूं न बिककर सीधे मंडियों में पहुंचे सरकार इसके लिए प्रयासरत है।
डा. दिलीप यादव, जिलाध्यक्ष एवं एमएलसी सपा।
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प्रशासन की ओर से किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जिले में 63 खरीद केंद्र एक अप्रैल से स्थापित करने का दावा किया था लेकिन खरीद एजेंसियों की व्यवस्थाएं पहले ही दिन फेल दिखाई दीं। कोटला रोड स्थित मंडी समिति परिसर में जिस दुकान पर खरीद केंद्र स्थापित होता है वह दुकान बंद दिखाई दी। आढ़तियों के यहां पुराने गेहूं की बिक्री कुछ किसान करते दिखाई दिए। वहां गेहूं 1575 से लेकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा था। किसानों का कहना था कि 1525 रुपये समर्थन मूल्य घोषित किया जाना गलत है। पीसीएफ के खरीद केंद्र स्थापित नहीं हो सके। अधिकांश केंद्रों के प्रभारी पहले दिन खरीद केंद्र स्थापित करने की व्यवस्था करते दिखाई दिए। डिप्टी आरएमओ राघवेंद्र यादव ने कहा कि गेहूं खरीद केंद्र चार अप्रैल से प्रारंभ हो जाएंगे। किसानों का नया गेहूं एक पखवाड़े के बाद आना शुरू हो जाएगा। तब तक सभी केंद्र प्रारंभ हो जाएंगे।
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गेहूं का समर्थन मूल्य किसानों की मेहनत के हिसाब से ही काफी कम है। 1525 रुपये से अधिक अभी बाजार में ही गेहूं बिक रहा है। सरकार को किसानों की कोई चिंता ही नहीं है।
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हेमंत प्रताप सिंह, बसपा जोन कोआर्डिनेटर फीरोजाबाद।
किसानों की चिंता न प्रदेश सरकार को हैं न ही केंद्र को। यही कारण है कि उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं देना चाहते हैं। गेहूं का समर्थन मूल्य 1650 रुपये हो।
हरीशंकर तिवारी, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
खरीद केंद्रों पर इलेक्ट्रानिक्स कांटे होने चाहिए। लक्ष्य के अनुरूप खरीद कभी नहीं हुई इसके तीन कारण हैं। पहला घटतौली, दूसरा बिचौलियों के द्वारा शोषण, तीसरा वारदाना की कमी व समय से भुगतान नहीं होना। खुले बाजार में दरें 1600 हैं तो सरकार को 1800 रुपये समर्थन मूल्य रखना चाहिए।
मनीष असीजा, नगर विधायक भाजपा
सरकार किसानों के हितों के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में जो समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है वह किसानों के लिए है। अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ दिया जाएगा। खुले बाजार में गेहूं न बिककर सीधे मंडियों में पहुंचे सरकार इसके लिए प्रयासरत है।
डा. दिलीप यादव, जिलाध्यक्ष एवं एमएलसी सपा।