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Firozabad News: तनाव हो रहा हावी, काउंसिलिंग के लिए पहुंच रहे परीक्षार्थी
Wed, 03 Jan 2024 11:44 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 03 Jan 2024 11:44 PM IST
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फिरोजाबाद। सीबीएसई एवं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी में शुरू हो रही हैं। परीक्षा की तैयारी को लेकर तनाव कुछ विद्यार्थियों पर हावी हो रहा है। इस तरह के केस मेडिकल कॉलेज के मनाेरोग चिकित्सा विभाग में आना शुरू हो गए हैं। इस तरह के विद्यार्थियों की काउंसिलिंग की जा रही है। ज्यादा तनाव होने पर आवश्यकतानुसार दवा देकर उपचार भी किया जाता है। मनोचिकित्सक का कहना है कि परीक्षा को लेकर विद्यार्थी तनाव न लें। रात में भरपूर नींद लें और समय पर भोजन लें।यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा 22 फरवरी से शुरू हो रही हैं। सीबीएसई की परीक्षा 15 फरवरी से शुरू होंगी। बोर्ड के विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन कुछ विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी को लेकर तनाव ले लेते हैं, जिससे उनका स्वभाव बदल जाता है और उन्हें बात-बात पर गुस्सा आने लगता है। बोर्ड परीक्षा से पहले इसी तरह के मामले मानसिक रोग विभाग में आने शुरू हो गए हैं।
मनोचिकत्सक डॉ. अरुशिखा सिंह ने बताया कि इस तरह के सात से आठ केस इस तरह के प्रतिदिन आना शुरू हो गए हैं। उन्होंने बताया कि भूख न लगना, पेट में गैस बनना, भूख न लगना, हाथ पैर में कंपकंपी होना, घबराहट होना, समझ में न आना या याद न होना ऐसे लक्षण अगर किसी विद्यार्थी को होते है तो मनकक्ष में उनकी काउंसिलिंग की जाती है, जिसमें पता चलता है कि विद्यार्थी परीक्षा की वजह से तनाव ले रहा है।
इस तरह से तनाव को दूर करें
विद्यार्थियों को रात में भरपूर नींद लेनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। समय पर भोजन करें और नियमित रूप से अपनी पढ़ाई करते रहें। अगर किसी को कोई समस्या है तो वह चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
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माता-पिता भी विद्यार्थी पर अनावश्यक दबाव न बनाएं
मनोचिकित्सक डॉ. अरुशिखा ने कहा कि माता-पिता को भी पढ़ाई को लेकर विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए। अभिभावक विद्यार्थी से बात करें और उसकी अगर कोई समस्या या परेशानी है तो उसे समझकर उसका निराकरण कराएं। उस पर दबाव बनाने के बजाए उसकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ाने के लिए उसका सहयोग करें। उन्होंने बताया मानक में विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता की भी काउंसिलिंग कर समस्या जानी जाती है।
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इस तरह के आ रहे मामले
केस एक:
मनोचिकित्सा विभाग में कक्षा 12वीं की छात्रा को लेकर पहुंचे परिजन ने मनोचिकत्सक को बताया कि सिर में दर्द रहता है। नींद भी नहीं आ रही है। उसकी काउंसिलिंग की गई तो पता चला कि वह बोर्ड परीक्षा को लेकर तनाव में है। चिकित्सक ने छात्रा को समझाया कि तनाव न लेकर अच्छे से परीक्षा की तैयारी करें।
केस दो:
10वीं के छात्र को लेकर आए परिजन ने बताया छात्र को अचानक गुस्सा बहुत ज्यादा आता है। वह अकेला रहता है। अगर माता पिता बात करते हैं तो वह गुस्से में सिर पटकना शुरू कर देता है। उसकी काउंसिलिंग की गई तो सामने आया कि प्री बोर्ड परीक्षा को लेकर वह तनाव में चल रहा था। परीक्षा को लेकर उसका स्वभाव में चिड़चिड़ापन हो गया है। काउंसिलिंग के बाद वह सामान्य स्थिति में आ गया।
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मनोचिकत्सक डॉ. अरुशिखा सिंह ने बताया कि इस तरह के सात से आठ केस इस तरह के प्रतिदिन आना शुरू हो गए हैं। उन्होंने बताया कि भूख न लगना, पेट में गैस बनना, भूख न लगना, हाथ पैर में कंपकंपी होना, घबराहट होना, समझ में न आना या याद न होना ऐसे लक्षण अगर किसी विद्यार्थी को होते है तो मनकक्ष में उनकी काउंसिलिंग की जाती है, जिसमें पता चलता है कि विद्यार्थी परीक्षा की वजह से तनाव ले रहा है।
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इस तरह से तनाव को दूर करें
विद्यार्थियों को रात में भरपूर नींद लेनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। समय पर भोजन करें और नियमित रूप से अपनी पढ़ाई करते रहें। अगर किसी को कोई समस्या है तो वह चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
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माता-पिता भी विद्यार्थी पर अनावश्यक दबाव न बनाएं
मनोचिकित्सक डॉ. अरुशिखा ने कहा कि माता-पिता को भी पढ़ाई को लेकर विद्यार्थियों पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए। अभिभावक विद्यार्थी से बात करें और उसकी अगर कोई समस्या या परेशानी है तो उसे समझकर उसका निराकरण कराएं। उस पर दबाव बनाने के बजाए उसकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ाने के लिए उसका सहयोग करें। उन्होंने बताया मानक में विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता की भी काउंसिलिंग कर समस्या जानी जाती है।
इस तरह के आ रहे मामले
केस एक:
मनोचिकित्सा विभाग में कक्षा 12वीं की छात्रा को लेकर पहुंचे परिजन ने मनोचिकत्सक को बताया कि सिर में दर्द रहता है। नींद भी नहीं आ रही है। उसकी काउंसिलिंग की गई तो पता चला कि वह बोर्ड परीक्षा को लेकर तनाव में है। चिकित्सक ने छात्रा को समझाया कि तनाव न लेकर अच्छे से परीक्षा की तैयारी करें।
केस दो:
10वीं के छात्र को लेकर आए परिजन ने बताया छात्र को अचानक गुस्सा बहुत ज्यादा आता है। वह अकेला रहता है। अगर माता पिता बात करते हैं तो वह गुस्से में सिर पटकना शुरू कर देता है। उसकी काउंसिलिंग की गई तो सामने आया कि प्री बोर्ड परीक्षा को लेकर वह तनाव में चल रहा था। परीक्षा को लेकर उसका स्वभाव में चिड़चिड़ापन हो गया है। काउंसिलिंग के बाद वह सामान्य स्थिति में आ गया।