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राजकीय सम्मान के साथ हुई लोकतंत्र सेनानी की अंत्येष्टि
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जसराना- लोकतंत्र सेनानी गंगासिंह कुशवाह के पार्थिव शरीर पर माला पहनाते कोतवाल एवं तहसीलदार
- फोटो : FIROZABAD
जसराना (फिरोजाबाद)। आपातकाल का विरोध कर जेल गए लोकतंत्र सेनानी की मृत्यु होने पर उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल का विरोध करने पर जेल गए गंगासिंह कुशवाह को अखिलेश सरकार ने लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया था। ग्राम विकास अधिकारी से सेवानिवृत्त गंगा सिंह कुशवाहा 2000 में सेवानिवृत्त होने पर परिवार के साथ रह रहे थे। सामाजिक एवं राजनीतिक रुप से सक्रिय गंगा सिंह दो बार सांसद का चुनाव भी लड़ चुके थे। पिछले चार माह से गंगा सिंह कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे थे। सोमवार को उनकी मृत्यु होने पर परिवार में शोक छा गया। गंगा सिंह कुशवाह के मृत्यु की सूचना पर तहसीलदार ब्रह्मानंद कठेरिया, कोतवाल जितेंद्र कुमार द्विवेदी, नायब तहसीलदार आशीष त्रिपाठी, नायब तहसीलदार एवं अन्य जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण पहुंचे। पुलिस द्वारा लोकतंत्र सेनानी को अंतिम सलामी दी गई। वहीं उनके छोटे पुत्र ने उनको मुखाग्नि दी।
सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की आवाज को आजीवन उठाते रहे
जसराना। आपातकाल में जेल जाने के बाद उन्होंने बीडीओ की नौकरी की। नौकरी के दौरान ही अपने अधिकारियों से तालमेल न खाने पर उन्हें कई बार निलंबित होना पड़ा। वहीं सरकारी दफ्तरों में मौजूद भ्रष्टाचार एवं मनमानी को आजीवन उठाते रहे।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल का विरोध करने पर जेल गए गंगासिंह कुशवाह को अखिलेश सरकार ने लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया था। ग्राम विकास अधिकारी से सेवानिवृत्त गंगा सिंह कुशवाहा 2000 में सेवानिवृत्त होने पर परिवार के साथ रह रहे थे। सामाजिक एवं राजनीतिक रुप से सक्रिय गंगा सिंह दो बार सांसद का चुनाव भी लड़ चुके थे। पिछले चार माह से गंगा सिंह कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे थे। सोमवार को उनकी मृत्यु होने पर परिवार में शोक छा गया। गंगा सिंह कुशवाह के मृत्यु की सूचना पर तहसीलदार ब्रह्मानंद कठेरिया, कोतवाल जितेंद्र कुमार द्विवेदी, नायब तहसीलदार आशीष त्रिपाठी, नायब तहसीलदार एवं अन्य जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण पहुंचे। पुलिस द्वारा लोकतंत्र सेनानी को अंतिम सलामी दी गई। वहीं उनके छोटे पुत्र ने उनको मुखाग्नि दी।
सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की आवाज को आजीवन उठाते रहे
जसराना। आपातकाल में जेल जाने के बाद उन्होंने बीडीओ की नौकरी की। नौकरी के दौरान ही अपने अधिकारियों से तालमेल न खाने पर उन्हें कई बार निलंबित होना पड़ा। वहीं सरकारी दफ्तरों में मौजूद भ्रष्टाचार एवं मनमानी को आजीवन उठाते रहे।
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