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वाहनों की रफ्तार के साथ धूल उड़ने वाले मार्गों को चिन्हित करेगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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वाहनों के साथ उडती धूल। (फाइल फोटो)
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। ताज संरक्षित जोन में भारी और व्यवसायिक वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने की कवायद शुरू हो गई है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल) के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जिले के उन मार्गों को चिह्नित करेगा जहां पर वाहनों के आवागमन के कारण सबसे ज्यादा धूल उड़ती है। चिह्नित करने के बाद इन मार्गों की गति को कम किया जाएगा।
एनजीटी ने ताज संरक्षित जोन में उन सड़कों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं, जिन सड़कों पर भारी वाहनों का आवागमन ज्यादा है। इन सड़कों पर धूल व मिट्टी के हल्के कण वाहनों के चलने के कारण हवा में उड़ते हैं। यही कण बाद में हवा में प्रवाहित होकर वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं। जिले का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस तरह की सड़कों के लिए खास कार्य योजना बनाने में जुट गया है। योजना के प्रथम चरण में इन सभी सड़कों पर भारी वाहनों के आवागमन का अनुपात मापा जाएगा। चिह्नित सड़कों पर वैक्यूम क्लीनर लगा कर हवा में उड़ने वाले मिट्टी और धूल के कणों को एकत्रित किया जाएगा।
75 माइक्रोन से कम भारी धूल की रोकथाम के होंगे प्रयास
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चिह्नित सड़कों पर वैक्यूम क्लीनर के माध्यम से हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को एकत्रित करेगा। बाद में एक विशेष छानन मशीन के जरिये हल्के व भारी कणों को अलग-अलग किया जाएगा। अति सूक्ष्म वजन मापने वाली मशीन के जरिये 75 माइक्रोन वजन वाले कणों को एकत्रित आनुपातिक योग के आधार पर पता किया जाएगा कि किस स्थान पर वायु मंडल में कितने धूल के कण विद्यमान हैं।
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नगर निकाय और यातायात पुलिस को दिया जाएगा रोकथाम का जिम्मा-
जिन सड़कों पर धूल अधिक उड़ती है। उन्हें चिह्नित करेंगे। कितने अनुपात में धूल उड़ रही है। इसका परीक्षण कराएंगे। इसके बाद निकायों को शाम के समय सड़क पर झाडू़ लगाने एवं सुबह पानी का छिड़काव करने को कहा जाएगा। वहीं यातायात पुलिस के माध्यम से उक्त सड़कों पर वाहनों की गति पर अंकुश लगाने का प्रयास करेंगे।
डॉ मनोज कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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एनजीटी ने ताज संरक्षित जोन में उन सड़कों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं, जिन सड़कों पर भारी वाहनों का आवागमन ज्यादा है। इन सड़कों पर धूल व मिट्टी के हल्के कण वाहनों के चलने के कारण हवा में उड़ते हैं। यही कण बाद में हवा में प्रवाहित होकर वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं। जिले का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस तरह की सड़कों के लिए खास कार्य योजना बनाने में जुट गया है। योजना के प्रथम चरण में इन सभी सड़कों पर भारी वाहनों के आवागमन का अनुपात मापा जाएगा। चिह्नित सड़कों पर वैक्यूम क्लीनर लगा कर हवा में उड़ने वाले मिट्टी और धूल के कणों को एकत्रित किया जाएगा।
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75 माइक्रोन से कम भारी धूल की रोकथाम के होंगे प्रयास
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चिह्नित सड़कों पर वैक्यूम क्लीनर के माध्यम से हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को एकत्रित करेगा। बाद में एक विशेष छानन मशीन के जरिये हल्के व भारी कणों को अलग-अलग किया जाएगा। अति सूक्ष्म वजन मापने वाली मशीन के जरिये 75 माइक्रोन वजन वाले कणों को एकत्रित आनुपातिक योग के आधार पर पता किया जाएगा कि किस स्थान पर वायु मंडल में कितने धूल के कण विद्यमान हैं।
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नगर निकाय और यातायात पुलिस को दिया जाएगा रोकथाम का जिम्मा-
जिन सड़कों पर धूल अधिक उड़ती है। उन्हें चिह्नित करेंगे। कितने अनुपात में धूल उड़ रही है। इसका परीक्षण कराएंगे। इसके बाद निकायों को शाम के समय सड़क पर झाडू़ लगाने एवं सुबह पानी का छिड़काव करने को कहा जाएगा। वहीं यातायात पुलिस के माध्यम से उक्त सड़कों पर वाहनों की गति पर अंकुश लगाने का प्रयास करेंगे।
डॉ मनोज कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड