{"_id":"675337f70b0dae70a20b62b7","slug":"mahamastikabhishek-will-be-held-today-with-1008-urns-firozabad-news-c-169-1-sagr1024-138419-2024-12-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Firozabad News: 1008 कलशों से आज होगा महामस्तिकाभिषेक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Firozabad News: 1008 कलशों से आज होगा महामस्तिकाभिषेक
Fri, 06 Dec 2024 11:14 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 06 Dec 2024 11:14 PM IST
विज्ञापन
फिरोजाबाद। छदामीलाल जैन मंदिर में 12 साल बाद 1008 कलशों से भगवान बाहुबली का महामस्तिकाभिषेक आज होगा। इस दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूरदराज से सुहागनगरी पहुंच रहे हैं। आयोजन की भव्यता के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। शुक्रवार को जैनाचार्य वसुंनंदी महाराज के सानिध्य में पूजा अर्चन की गई। उन्होंने कहा कि कठोर तपस्या करने के पश्चात भगवान बाहुबली को निर्वाण हुआ।
भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा के सम्मुख मंत्र आराधना की। उनके चरणों का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं द्वारा भगवान बाहुबली की निर्वाण कल्याणक पूजन किया। आचार्य वसुंनंदी महाराज ने कहा की भगवान बाहुबली द्वारा एक वर्ष तक बिना हिले खड़े रहकर कठोर तपस्या की। इस दौरान उनके शरीर पर बेलें लिपट गईं। चींटियों और आंधियों से घिरे होने पर भी उन्होंने अपना ध्यान भंग नहीं किया। एक वर्ष के पश्चात भरत उनके पास आए और उन्हें नमन किया। इससे बाहुबली के मन में अपने बड़े भाई को नीचा दिखाने की ग्लानि समाप्त हो गई। उनके चार घातिया कर्मों का नाश हो गया। तब उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे इस अर्ध चक्र के प्रथम केवली बन गए। इसके पश्चात उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। रात के कार्यक्रम में इंदौर से पधारी रंगशाला अकेडमी की निर्देशिका साधना मदावत जैन द्वारा भरत का भारत शीर्षक का अभूतपूर्व नाट्य मंचन किया गया।
विज्ञापन
भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा के सम्मुख मंत्र आराधना की। उनके चरणों का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं द्वारा भगवान बाहुबली की निर्वाण कल्याणक पूजन किया। आचार्य वसुंनंदी महाराज ने कहा की भगवान बाहुबली द्वारा एक वर्ष तक बिना हिले खड़े रहकर कठोर तपस्या की। इस दौरान उनके शरीर पर बेलें लिपट गईं। चींटियों और आंधियों से घिरे होने पर भी उन्होंने अपना ध्यान भंग नहीं किया। एक वर्ष के पश्चात भरत उनके पास आए और उन्हें नमन किया। इससे बाहुबली के मन में अपने बड़े भाई को नीचा दिखाने की ग्लानि समाप्त हो गई। उनके चार घातिया कर्मों का नाश हो गया। तब उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे इस अर्ध चक्र के प्रथम केवली बन गए। इसके पश्चात उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। रात के कार्यक्रम में इंदौर से पधारी रंगशाला अकेडमी की निर्देशिका साधना मदावत जैन द्वारा भरत का भारत शीर्षक का अभूतपूर्व नाट्य मंचन किया गया।
विज्ञापन