फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Firozabad News ›   Lying silence procurement centers

खरीद केंद्रों पर पसरा सन्नाटा

Sat, 11 Apr 2015 11:29 PM IST
बयूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
बयूरो अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Sat, 11 Apr 2015 11:29 PM IST
विज्ञापन
Lying silence procurement centers
बारिश एवं ओलावृष्टि की बर्बादी से किसान तो परेशान हैं ही साथ ही मंडियों
विज्ञापन
में बैठे आढ़तिया व पल्लेदारों तक को रोजी रोटी की चिंता सताने लगी है। पल्लेदारों को काम नहीं मिल रहा है। कोटला रोड स्थित मंडी में शनिवार को इसी तरह का आलम दिखाई दिया।



इन दिनों तक जहां किसानों की गेहूं से भरे वाहनों की भीड़ दिखाई देती थी वहीं एक-दो वाहन ही यहां पहुंचे थे। इनमें गेहूं काला होने के साथ मिट्टी आ रही है। सरकारी खरीद केंद्रों की गेहूं खरीद की दरें भले ही 1450 रुपये प्रति क्विंटल हो लेकिन गुणवत्ता खराब होने के कारण किसान 1400 रुपये क्विंटल की दरों से बिक्री करने को विवश हैं। गेहूं की ढुलाई करने वाले पल्लेदार विनोद कुमार कहते हैं कि इस बार रोजी रोटी की चिंता है। गेहूं आना ही शुरू नहीं हुआ। पल्लेदारी करने वाले सुनील कहते हैं कि पहला दिन है कि आज कुछ गेहूं मंडी में आया है। वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि इन दिनों फुरसत नहीं मिलती थी लेकिन आज खाली हाथ हैं। यह हॉल किसी एक मंडी का नहीं बल्कि सभी मंडियों का था।

गेहूं की मिट्टी मील में हो सकती है साफ
आढ़तिया प्रमोद जैन कहते हैं कि गेहूं की फसल गिरने और काटने के दौरान उसके साथ मिट्टी आ रही है, थ्रेसिंग करने के दौरान यही मिट्टी गेहूं के साथ आती है। इसको सरकारी खरीद केंद्रों पर छंटना से नहीं निकाल सकते हैं। इसके कारण यह गेहूं मील में जा सकता है। घरेलू रूप में प्रयोग करना संभव नहीं है।

एक बीघा में निकल रहा है चार मन...
- मिरजापुर निवासी किसान भारत सिंह कहते हैं कि बारिश एवं ओलों के कारण गेहूं 50 प्रतिशत नहीं निकला है। गत वर्ष दस मन का बीघा निकला था इस बार चार से पांच मन ही निकल रहा है। खर्चा तक नहीं निकला।
- मिरजापुर निवासी अनार सिंह कहते हैं कि गेहूं इसलिए मंडी लाए ताकि भाव ठीक मिल जाए। वैसे भी गेहूं इतना पतला है कि कोई खरीदने को तैयार नहीं होता। एटा मंडी में 1300 तथा फीरोजाबाद में 1400 होने के कारण यहां लाए।

सरकारी क्रय केंद्र पर पसरा था सन्नाटा
कोटला रोड मंडी प्रांगण में खाद्य विभाग के क्रय केंद्र पर सन्नाटा पसरा था। किसानों के नहीं आने के कारण स्टाफ तास के पत्ते फेंटते दिखाई दिए। केंद्र पर तैनात नरेंद्र सिंह ने कहा कि गेहूं आना ही शुरू नहीं हुआ। उन्होंने कहा किसानों को भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से एसबीआई बैंक से करेंगे। किसान को जोतवही, किसान क्रेडिट कार्ड या साधन सहकारी समिति की रसीद को साथ लाना होगा।

जिले में स्थापित कुल खरीद केंद्र
खरीद एजेंसी             खरीद केंद्र
खाद्य विभाग               04  
पीसीएफ                    44
कर्मचारी कल्याण निगम    04
यूपी एग्रो                   05
एफसीआई                  01
-------------------------
कुल खरीद केंद्र          58
------------------------
नोट: 20 हजार मैट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य।

गेहूं क्रय में यह खामियां होंगी स्वीकार....
- गेहूं में नमी 14 प्रतिशत तक स्वीकार्य।
- सिकुड़े एवं टूटे दाने छह प्रतिशत तक।
- किंचित क्षतिग्रस्त गेहूं चार प्रतिशत।
- क्षतिग्रस्त गेहूं के दाने दो प्रतिशत।
- अन्य खाद्यान्य दो प्रतिशत तक।
- विजातीय तत्व 0.75 प्रतिशत तक।
- गेहूं की उतराई का शुल्क(पल्लेदारी)का भुगतान मंडी की ओर से किया जाएगा।
-गेहूं क्रय केंद्र सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक 15 जून 2015 तक खुलें रहेंगे।

गेहूं खरीद को 58 केंद्र खोले हैं। लेकिन अभी गेहूं नहीं खरीदा गया। मौसम यदि साफ रहा तो तीन दिन के बाद ही गेहूं की आवक शुरू होगी। गुणवत्ता खराब हो जाने के कारण गेहूं मानक पर कम ही खरा उतरेगा।
राघवेंद्र सिंह, डिप्टी आरएमओ फीरोजाबाद।





बारिश और  ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को सदर तहसील में राज्यसभा सांसद ठा. अरविंद सिंह ने मुआवजे के रूप में चेक वितरित किए।


सपा सांसद ने कहा कि दैवीय आपदा से किसानों की बर्बादी का हमें भी दर्द है। फसलों की बर्बादी के कारण अनेक किसानों ने आत्महत्या कर ली है। हम विश्वास दिलाते हैं सपा सरकार हर समय आपके साथ है। केंद्र से अधिक सहायता मांगी गई है। मुआवजा राशि मिलने के बाद पुन: बुलाकर चेक वितरित किए जाएंगे। सपा जिलाध्यक्ष डा. दिलीप यादव ने कहा किसानों की मदद के लिए बीमा राशि एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दी गई है।

339 किसानों को 25 लाख से अधिक राशि वितरित
सदर तहसीलदार ने शनिवार को पचवान के 52 किसानों को 57 हेक्टेयर नुकसान के फलस्वरूप 17,35,670 लाख के चेक वितरित किए। वहीं मुईनउद्दीनपुर के 287 किसानों का 42.487 हेक्टेयर नुकसान के फलस्वरूप 7,67,274 लाख के चेक वितरित किए।

सपा सरकार ने किया मजाक
- वीरेंद्र सिंह का कहना है कि पांच बीघा फसल बर्बाद हो गई। वहीं मुआवजे के रूप में मात्र 900 रुपये का चेक मिला है, जो नुकसान की तुलना में कुछ भी नहीं है।
- राधेश्याम का कहना है कि बरसात से 5-6 बीघा फसल बर्बाद हो गई। मुआवजे के रूप में 1800 रुपये का चेक मिला है। यह मजाक है।
- पचवान निवासी वृद्धा नेकसी देवी ने बताया 9.50 बीघा नुकसान के रूप में 3600 रुपये का मुआवजा। इससे नुकसान की भरपाई हो जाएगी।
- नगला राधे निवासी निहाल सिंह ने बताया कि सात बीघा फसल नुकसान के रूप में 1800 रुपये का चेक मिला। यह सपा सरकार द्वारा मजाक किया जा रहा है।




नारखी में किसान की सदमे से हुई मौत
फसल की बर्बादी के कारण सदमे में डूबे किसान की मौत हो गई।
नारखी क्षेत्र के ग्राम महीपुरा निवासी किसान पुन्नी बाबू (62) ने 55 बीघा में आलू की फसल की थी। आठ बीघा आलू की फसल की अभी तक खोदाई तक नहीं हो सकी। जिस आलू की खोदाई हुई वह कोल्डस्टोरेज में नहीं रखा जा सका। 45 बीघा में की गई गेहूं की फसल भी बर्बाद हो गई थी। इससे वह परेशान रहने लगे थे। शनिवार को सदमे से उनकी मौत हो गई। पुन्नी बाबू की मौत से परिवारीजनों में कोहराम मच गया। ग्रामीणों की मानें तो उन पर करीब दस लाख रुपया बैंक का कर्ज था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed