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ओलावृष्टि एवं बरसात से हुए नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजी
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फिरोजाबाद। 29 फरवरी की शाम तेज आंधी, ओलावृष्टि और बरसात के दौरान जन व धनहानि के अतिरिक्त पशु हानि का आकलन किया गया है। राष्ट्रीय आपदा एवं राज्य आपदा प्रबंधन के माध्यम से कराए सर्वे के दौरान फसलीय नुकसान का विवरण रिपोर्ट में अंकित नहीं है। जिला प्रशासन ने राहत आयुक्त उत्तर प्रदेश को इस आशय की रिपोर्ट भेजी है।
जिला प्रशासन ने बेमौसम की बारिश-बांधी के दौरान हुए नुकसान की आकलन रिपोर्ट शासन को भेज दी। रिपोर्ट के मुताबिक तेज आंधी व ओलावृष्टि से नारखी के गढ़ी लौकी में मकान गिरने से कई लोगों के घायल होने, शिकोहाबाद में टीन शैड गिरने से एक व्यक्ति गंभीर घायल होने व जसराना में गाय की मौत होने की बात कही गई है।
राष्ट्रीय आपदा व राज्य आपदा प्रबंधन के तहत एडीएम आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव के निर्देशन में तैयार की गई रिपोर्ट में जिले के नौ ब्लाकों में से किसी में भी फसलीय नुकसान का अंकन नहीं किया है। तहसीलदार सदर विवेक भदौरिया ने बताया कि 33 प्रतिशत से अधिक फसलीय नुकसान को दैवीय आपदा की श्रेणी में माना जाता है।
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किसानों को राहत मिलने की उम्मीद कम
तहसील स्तर पर तैयार की गई रिपोर्ट में फसलीय नुकसान के कालम में शून्य दर्शाया गया है। इसके पीछे नियमों की बाध्यता है। राष्ट्र्ीय एवं राज्य आपदा प्रबंधन के तहत 35 प्रतिशत फसलीय नुकसान की स्थिति में ही पीड़ित को मुआवजा एवं अन्य राहत दी जाती हैं। ऐसे में फसलीय नुकसान उठाने वाले गेहूं, आलू और सरसों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद कम है।
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जिला प्रशासन ने बेमौसम की बारिश-बांधी के दौरान हुए नुकसान की आकलन रिपोर्ट शासन को भेज दी। रिपोर्ट के मुताबिक तेज आंधी व ओलावृष्टि से नारखी के गढ़ी लौकी में मकान गिरने से कई लोगों के घायल होने, शिकोहाबाद में टीन शैड गिरने से एक व्यक्ति गंभीर घायल होने व जसराना में गाय की मौत होने की बात कही गई है।
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राष्ट्रीय आपदा व राज्य आपदा प्रबंधन के तहत एडीएम आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव के निर्देशन में तैयार की गई रिपोर्ट में जिले के नौ ब्लाकों में से किसी में भी फसलीय नुकसान का अंकन नहीं किया है। तहसीलदार सदर विवेक भदौरिया ने बताया कि 33 प्रतिशत से अधिक फसलीय नुकसान को दैवीय आपदा की श्रेणी में माना जाता है।
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किसानों को राहत मिलने की उम्मीद कम
तहसील स्तर पर तैयार की गई रिपोर्ट में फसलीय नुकसान के कालम में शून्य दर्शाया गया है। इसके पीछे नियमों की बाध्यता है। राष्ट्र्ीय एवं राज्य आपदा प्रबंधन के तहत 35 प्रतिशत फसलीय नुकसान की स्थिति में ही पीड़ित को मुआवजा एवं अन्य राहत दी जाती हैं। ऐसे में फसलीय नुकसान उठाने वाले गेहूं, आलू और सरसों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद कम है।