फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Firozabad News ›   However facilitie, , primary education Desecrated

सुविधाएं अपार फिर भी प्राथमिक शिक्षा का बंटाधार

Mon, 15 Dec 2014 11:29 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Mon, 15 Dec 2014 11:29 PM IST
विज्ञापन
However facilitie, , primary education Desecrated
मुफ्त शिक्षा, मिड-डे मील, नि:शुल्क ड्रेस, नि:शुल्क कापियां जैसी तमाम योजनाएं शुरू कर बच्चों को सरकारी स्कूलों की तरफ आकर्षित किया जा रहा है। यहां तक आठवीं तक फेल ना होने की गारंटी भी दी जाती है। लेकिन परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर निरंतर गिर रहा है। शैक्षिक गुणवत्ता के अभाव से अभिभावक बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से कतराते हैं। निजी स्कूलों की ओर रुझान बढ़ रहा है। परिषदीय स्कूल हों या फिर अन्य शिक्षण संस्थाएं जो शिक्षक सरकार से वेतन पा रहे हैं उनमें शिक्षण कार्य के प्रति उदासनीता दिखती है वहीं सुधार की इच्छा शक्ति का अभाव।
विज्ञापन

 
संसाधनों के साथ टीचरों का भी अभाव
फीरोजाबाद। बाल अधिकार अधिनियम तो लागू कर दिया। मगर नौनिहाल अधिकारों से आज भी वंचित हैं। परिषदीय स्कूल शिक्षकों की कमी से लंबे समय से जूझ रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों में पिछले वर्षों में छात्र संख्या निरंतर गिरती आई है। इस बार आंकड़े में छात्र संख्या में कुछ इजाफा हुआ है। लेकिन विभागीय अधिकारियों के द्वारा किए गए स्कूल निरक्षण में पंजीकृत छात्रों की अपेक्षा उपस्थिति आधी भी नहीं मिली है। परिषदीय स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
विज्ञापन


परिषदीय स्कूलों में पिछले वर्षों की छात्र संख्या
सत्र             प्राइमरी छात्रसंख्या  जूनियर छात्रसंख्या
2010-11        145413        42554
2011-12        133727        41490
2012-13        136231        40911
2013-14        131092        38498
2014-15        140765        40,980

जर्जर इमारतों में संवर रहा बच्चों का भविष्य
बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू कर दिया गया। लेकिन मूलभूत अधिकारों से भी छात्र आज भी वंचित हैं। बच्चे जर्जर भवनों में डर के साए के बीच शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं। फीरोजाबाद नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय हुंडावाला बाग में बच्चों को सड़क पर बैठकर पड़ना पड़ता है। कभी तेज धूप तो कभी बारिश बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। वहीं, प्राथमिक विद्यालय कटरा पठानान में स्कूल की हिलती छत सिर्फ एक लकड़ी की बल्ली के सहारे टिकी हुई है। जो हादसे का सबब  बन सकती है। प्राथमिक विद्यालय कटरा कन्या में भी छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। इसके अलावा कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां शौचालय व पानी की कोई सुविधा नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

                    प्राइमरी स्कूल    जूनियर
खराब  हैंडपंप         94            181
बंद शौचालय           84            80
स्कूल की संख्या    1525           627
शिक्षकों की संख्या    2750        1560
शिक्षामित्र                1350      

- 2500 शिक्षकों की जनपद में कमी है
- तीस छात्रों पर एक शिक्षक का मानक

स्वीकारना होगा कि सरकारी स्कूलों की अपेक्षा प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई का स्तर अच्छा है। शिक्षकों का मकसद सरकारी नौकरी पाकर ही पूरा हो जाता है। अगर शिक्षक जिम्मेदारी निभाएं तो बीएसए और डीएम को निरीक्षण के लिए क्यों भागना पडे़।

रमेशचंद्र शर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षक

परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर  निम्न श्रेणी का है। जब तक शिक्षक स्वयं अपनी जिम्मेदारियों को निर्धारित नहीं करेगा। तब तक स्कूलों में शिक्षा का स्तर नहीं बढे़गा। प्राइवेट स्कूलों में सुविधाओं के साथ शिक्षा का माहौल भी है।
प्रोफेसर विनोद कालरा, एसआरके डिग्री कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed