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मुहर्रम की सातवीं तारीख को चढ़ाई गईं मेहंदी
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मोहर्रम की सातवीं तारीख को शाही बड़ा इमामबाड़ा में मेहंदी चढ़ाते पदाधिकारी
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। मोहर्रम की सातवीं तारीख को शहर के प्राचीन शाही बड़ा इमामबाड़ा पर मेंहदी चढ़ाई गई। मेंहदी चढ़ाने की शुरूआत शहर काजी शाहनियाज अली ने की। इमामबाड़ा कमेटी के पदाधिकारी के साथ ही काफी संख्या में जायरीन मौजूद रहे।
कोरोना संक्रमण के चलते सामाजिक दूरी का पालन किया। एक बार में 40-40 के ग्रुप बनाकर मेंहदी चढ़ाने के लिए प्रवेश दिया जा रहा था। शाही बड़ा इमामबाड़ा के बाहर मोहर्रम कमेटी इंतजामियां कमेटी के उपाध्यक्ष खालिद जमाल सिद्दीकी, कमर आलम साबरी ने व्यवस्थाओं को संभाला। इमामबाड़ा के अंदर शाही बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक मोहम्मद रजा अली, अरशद अली वारसी, जावेद अली के नेतृत्व में मेंहदी चढ़ाने का क्रम देर रात तक चला।
दरगाह हजरत इमामुद्दीन शाह, फखरुद्दीन शाह के आस्ताने पर मजलिस का आयोजन शासन की गाइडलाइन के हिसाब से किया गया। मजलिस की अध्यक्षता गुलाम समदानी मियां ने की।
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आकिल सुजा फिरोजाबादी ने कहा कि ‘हाथों में जिनके आ गया दामने पंजतन, हासिल उसी को हो गया फैजाने पंजतन।’ शारिब फिरोजाबादी ने पढ़ा कि ‘आई वजूद में यूं शहादत हुसैन की, इस्लाम को भी खास जरूरत थी हुसैन की।’ नसीम तरकश ने पढ़ा कि‘ ए दिल की तलब का रक्खो न पर्दा हुसैन से, जो मांगना है मांग लो आका हुसैन से।’ शफीक अहमद शफीक ने पढ़ा कि ‘आज महफिल उसी जाति की है शफीक, जिसका नवीयों ने पेहम किया एहतराम।’ सूफी गुलाम हसनैन मियां, गुड्डू मियां, सजिल, मोरिस, अब्बास मियां, जिला मोहर्रम कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष मोहसिन मियां मौजूद रहे।
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कोरोना संक्रमण के चलते सामाजिक दूरी का पालन किया। एक बार में 40-40 के ग्रुप बनाकर मेंहदी चढ़ाने के लिए प्रवेश दिया जा रहा था। शाही बड़ा इमामबाड़ा के बाहर मोहर्रम कमेटी इंतजामियां कमेटी के उपाध्यक्ष खालिद जमाल सिद्दीकी, कमर आलम साबरी ने व्यवस्थाओं को संभाला। इमामबाड़ा के अंदर शाही बड़ा इमामबाड़ा के प्रबंधक मोहम्मद रजा अली, अरशद अली वारसी, जावेद अली के नेतृत्व में मेंहदी चढ़ाने का क्रम देर रात तक चला।
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दरगाह हजरत इमामुद्दीन शाह, फखरुद्दीन शाह के आस्ताने पर मजलिस का आयोजन शासन की गाइडलाइन के हिसाब से किया गया। मजलिस की अध्यक्षता गुलाम समदानी मियां ने की।
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आकिल सुजा फिरोजाबादी ने कहा कि ‘हाथों में जिनके आ गया दामने पंजतन, हासिल उसी को हो गया फैजाने पंजतन।’ शारिब फिरोजाबादी ने पढ़ा कि ‘आई वजूद में यूं शहादत हुसैन की, इस्लाम को भी खास जरूरत थी हुसैन की।’ नसीम तरकश ने पढ़ा कि‘ ए दिल की तलब का रक्खो न पर्दा हुसैन से, जो मांगना है मांग लो आका हुसैन से।’ शफीक अहमद शफीक ने पढ़ा कि ‘आज महफिल उसी जाति की है शफीक, जिसका नवीयों ने पेहम किया एहतराम।’ सूफी गुलाम हसनैन मियां, गुड्डू मियां, सजिल, मोरिस, अब्बास मियां, जिला मोहर्रम कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष मोहसिन मियां मौजूद रहे।