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वैलेंटाइन पर फूल देकर दिल के जज्बात को किया बयां
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फिरोजाबाद। वैलेंटाइन डे पर शहर प्यार के रंग में रंगा नजर आया। प्रेमी जोड़ों से लेकर शादीशुदा जोड़ों के कारण मॉल, पार्क व रेस्टोरेंट गुलजार रहे। गुलाब देकर एक-दूसरे ने अपने दिल के जज्बात को बयां किए। चॉकलेट और अन्य उपहारों का भी आदान-प्रदान किया गया। मोबाइल पर भी वैलेंटाइन-डे विश करने का सिलसिला चलता रहा।
वैलेंटाइन वीक का शुभारंभ सात फरवरी को हुआ। 14 फरवरी को समापन पर सुबह से ही प्यार का इजहार करने का सिलसिला शुरू हो गया। प्रेमी व शादीशुदा जोड़ों ने फूल और उपहार देकर अपने दिल की बात को जुबां पर लाकर बयां किया। सोमवार की सुबह 11बजे से ही शहर के पार्क, रेस्टोरेंट व मॉल गुलजार होने लगे। रेस्टोरेंट में खाना खाकर वैलेंटाइन-डे को यादगार बनाया। शादीशुदा जोड़ों ने सुबह मंदिर में जाकर ईश्वर से परिवार के खुशहाली की कामना की। प्रेमी प्रेमिकाओं ने छुपकर प्यार का इजहार किया।
फिरोजाबाद इस्लामिक सेंटर के तत्ववधान में वैलेंटाइन डे के विरोध में ‘पश्चिमी सभ्यता और हमारे नौजवान’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया। सचिव मौलाना आलम मुस्तफा याकूबी ने कहा के 14 फरवरी के दिन हमारी युवा पीढ़ी एक नजायज मोहब्बत को परवान चढ़ाती है। कहा की यह पश्चिमी सभ्यता है जो अंग्रेजों की सभ्यता में है। हम भारतीय को गोरों की सभ्यता को नहीं अपनाना चाहिए। इस दिन को सिर्फ इसलिए मनाते हैं क्यों की इसमें चॉकलेट और फूलों का बड़ा व्यापार होता है। हमको अपने मजहब की सभ्यता को अपनाना चाहिए। मातलूब खान, हाजी समीउद्दीन ने भी विचार रखे। इस अवसर पर हुसैन अहमद, आयाज खान, नसीम अख्तर, मोहसिन, जुबैर आदि मौजूद रहे। संचालन मौलाना अशरफ क़ासमी ने किया। संवाद
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वैलेंटाइन वीक का शुभारंभ सात फरवरी को हुआ। 14 फरवरी को समापन पर सुबह से ही प्यार का इजहार करने का सिलसिला शुरू हो गया। प्रेमी व शादीशुदा जोड़ों ने फूल और उपहार देकर अपने दिल की बात को जुबां पर लाकर बयां किया। सोमवार की सुबह 11बजे से ही शहर के पार्क, रेस्टोरेंट व मॉल गुलजार होने लगे। रेस्टोरेंट में खाना खाकर वैलेंटाइन-डे को यादगार बनाया। शादीशुदा जोड़ों ने सुबह मंदिर में जाकर ईश्वर से परिवार के खुशहाली की कामना की। प्रेमी प्रेमिकाओं ने छुपकर प्यार का इजहार किया।
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फिरोजाबाद इस्लामिक सेंटर के तत्ववधान में वैलेंटाइन डे के विरोध में ‘पश्चिमी सभ्यता और हमारे नौजवान’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया। सचिव मौलाना आलम मुस्तफा याकूबी ने कहा के 14 फरवरी के दिन हमारी युवा पीढ़ी एक नजायज मोहब्बत को परवान चढ़ाती है। कहा की यह पश्चिमी सभ्यता है जो अंग्रेजों की सभ्यता में है। हम भारतीय को गोरों की सभ्यता को नहीं अपनाना चाहिए। इस दिन को सिर्फ इसलिए मनाते हैं क्यों की इसमें चॉकलेट और फूलों का बड़ा व्यापार होता है। हमको अपने मजहब की सभ्यता को अपनाना चाहिए। मातलूब खान, हाजी समीउद्दीन ने भी विचार रखे। इस अवसर पर हुसैन अहमद, आयाज खान, नसीम अख्तर, मोहसिन, जुबैर आदि मौजूद रहे। संचालन मौलाना अशरफ क़ासमी ने किया। संवाद
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