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हड़ताल का डर, कारखारेदार कर सकते हैं शटडाउन
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फिरोजाबाद। जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल एवं सादा चूड़ी का उठान नहीं होने के कारण चूड़ी कारखानों में उत्पादन प्रक्रिया ठप हो गई है। सादा चूड़ी का उठान नहीं होने के कारण कारखानों में सादा चूड़ी का स्टॉक जमा हो गया है। उठान नहीं होने के कारण कारखानेदार भी कुछ दिन के लिए सूक्ष्म शट डाउन लेने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
चूड़ी जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल का एक-दो दिन में ही सर्वमान्य हल निकलना जरूरी है। अन्यथा सुहागनगरी में औद्योगिक गतिरोध और अधिक गहराने के आसार हैं। हालांकि श्रम विभाग द्वारा जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल समाप्त कराने की मशक्कत की जा रही है। लेकिन हल नहीं निकलता देख अब जिला प्रशासन भी हड़ताल को खत्म करने की कवायद में जुट गया है। वहीं, विगत पांच जून से शुरू हुई जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल के चलते कारखानों में सादा चूड़ी का बंपर स्टॉक जमा हो गया है।
अवैध कटौती से श्रमिक भी परेशान
शासनादेश के अनुसार प्रति सौ तोड़ा पर चूड़ी सदाई प्रति श्रमिक 141.66 पैसे, छटाई श्रमिक को 166.66 पैसे, चलकाई श्रमिक को 100 रूपये का श्रमांश मिलता है। बेहद मामूली मजदूरी पर काम कर रहे उक्त श्रमिक चूड़ी ठेकेदारों की मनमानी के चलते उक्त अर्जित मेहनताना में भी 15 से 20 प्रतिशत की कटौती को झेल रहे हैं।
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कारखानों में जुड़ाई श्रमिकों का हंगामा एवं माल का उठान नहीं हो पा रहा है। कारखानों में चूडी का बंपर स्टॉक है। ऐसे में अधिकांश चूड़ी कारखानों में उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। वर्तमान हालातों के मद्देनजर अधिकांश कारखानों में कामबंदी की स्थिति है। -हनुमान प्रसाद गर्ग, अध्यक्ष द ग्लास सिंडिकेट
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चूड़ी जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल का एक-दो दिन में ही सर्वमान्य हल निकलना जरूरी है। अन्यथा सुहागनगरी में औद्योगिक गतिरोध और अधिक गहराने के आसार हैं। हालांकि श्रम विभाग द्वारा जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल समाप्त कराने की मशक्कत की जा रही है। लेकिन हल नहीं निकलता देख अब जिला प्रशासन भी हड़ताल को खत्म करने की कवायद में जुट गया है। वहीं, विगत पांच जून से शुरू हुई जुड़ाई श्रमिकों की हड़ताल के चलते कारखानों में सादा चूड़ी का बंपर स्टॉक जमा हो गया है।
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अवैध कटौती से श्रमिक भी परेशान
शासनादेश के अनुसार प्रति सौ तोड़ा पर चूड़ी सदाई प्रति श्रमिक 141.66 पैसे, छटाई श्रमिक को 166.66 पैसे, चलकाई श्रमिक को 100 रूपये का श्रमांश मिलता है। बेहद मामूली मजदूरी पर काम कर रहे उक्त श्रमिक चूड़ी ठेकेदारों की मनमानी के चलते उक्त अर्जित मेहनताना में भी 15 से 20 प्रतिशत की कटौती को झेल रहे हैं।
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कारखानों में जुड़ाई श्रमिकों का हंगामा एवं माल का उठान नहीं हो पा रहा है। कारखानों में चूडी का बंपर स्टॉक है। ऐसे में अधिकांश चूड़ी कारखानों में उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। वर्तमान हालातों के मद्देनजर अधिकांश कारखानों में कामबंदी की स्थिति है। -हनुमान प्रसाद गर्ग, अध्यक्ष द ग्लास सिंडिकेट