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Firozabad News: सिरसागंज के तत्कालीन लेखपाल पर आय से अधिक संपत्ति की प्राथमिकी दर्ज
Sun, 13 Sep 2026 12:15 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sun, 13 Sep 2026 12:15 AM IST
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फिरोजाबाद। तहसील सिरसागंज में तैनात रहे तत्कालीन लेखपाल/एआरके (सहायक रिकॉर्ड कीपर) अभिलाष सिंह के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) आगरा सेक्टर ने एफआईआर दर्ज की है। लोकसेवक के पद पर रहते हुए वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। इस मामले के तार रुधैनी में जमीन फर्जीवाड़े से जुड़े हैं, जिसमें अभी तक तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार और अब लेखपाल पर एफआईआर हुई है।
आरोपी अभिलाष सिंह निवासी भदावर हाउस, बिछिया रोड, गली नंबर-1, थाना कोतवाली, मैनपुरी के विरुद्ध शासन के आदेश पर जांच हुई थी। जांच अधिकारी निरीक्षक अशोक कुमार की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर शासन ने 11 मई 2026 को मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति दी थी। विजिलेंस की जांच के अनुसार, निर्धारित अवधि के दौरान आरोपी लेखपाल की समस्त वैध स्रोतों से कुल आय 48,30,841 रुपये दर्ज की गई। जबकि इसी अवधि में परिसंपत्तियों के अर्जन और भरण-पोषण पर कुल 66,69,641 रुपये व्यय पाया गया। लेखपाल ने अपनी ज्ञात वैध आय के सापेक्ष 18,38,800 रुपये अधिक खर्च किए, जिसका वह कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके। मामले में 11 सितंबर मुकदमा दर्ज किया गया।
रुधैनी गांव के 75 बीघा जमीन बंदरबांट घोटाले से जुड़े हैं तार
विजिलेंस की इस कार्रवाई के तार सिरसागंज तहसील में जुलाई 2024 में उजागर हुए बहुचर्चित रुधैनी जमीन बंदरबांट घोटाले से जुड़े हुए हैं। रुधैनी निवासी पीड़ित योगेंद्र कुमार शर्मा और उनके भाई वेदेंद्र शर्मा की 75 बीघा (लगभग 4.50 करोड़ रुपये मूल्य) पैतृक जमीन के फर्जीवाड़े में तत्कालीन एसडीएम विवेक राजपूत, नायब तहसीलदार नवीन कुमार और लेखपाल अभिलाष सिंह के गठजोड़ की पोल खुली थी। जून 2024 में फैसला सुनाने के बाद अधिकारियों ने अपने परिजनों और करीबियों के नाम 10 बैनामे कराए थे। इसमें लेखपाल अभिलाष सिंह के पिता सर्वेश सिंह निवासी मैनपुरी, तत्कालीन एसडीएम के गृह जनपद जालौन निवासी करीबियों और नायब तहसीलदार के ससुर, सास व साली के नाम साझेदारी में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। मामला खुलने पर तत्कालीन डीएम रमेश रंजन ने एसडीएम, नायब तहसीलदार और लेखपाल तीनों को निलंबित कर दिया था।
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आरोपी अभिलाष सिंह निवासी भदावर हाउस, बिछिया रोड, गली नंबर-1, थाना कोतवाली, मैनपुरी के विरुद्ध शासन के आदेश पर जांच हुई थी। जांच अधिकारी निरीक्षक अशोक कुमार की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर शासन ने 11 मई 2026 को मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति दी थी। विजिलेंस की जांच के अनुसार, निर्धारित अवधि के दौरान आरोपी लेखपाल की समस्त वैध स्रोतों से कुल आय 48,30,841 रुपये दर्ज की गई। जबकि इसी अवधि में परिसंपत्तियों के अर्जन और भरण-पोषण पर कुल 66,69,641 रुपये व्यय पाया गया। लेखपाल ने अपनी ज्ञात वैध आय के सापेक्ष 18,38,800 रुपये अधिक खर्च किए, जिसका वह कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके। मामले में 11 सितंबर मुकदमा दर्ज किया गया।
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रुधैनी गांव के 75 बीघा जमीन बंदरबांट घोटाले से जुड़े हैं तार
विजिलेंस की इस कार्रवाई के तार सिरसागंज तहसील में जुलाई 2024 में उजागर हुए बहुचर्चित रुधैनी जमीन बंदरबांट घोटाले से जुड़े हुए हैं। रुधैनी निवासी पीड़ित योगेंद्र कुमार शर्मा और उनके भाई वेदेंद्र शर्मा की 75 बीघा (लगभग 4.50 करोड़ रुपये मूल्य) पैतृक जमीन के फर्जीवाड़े में तत्कालीन एसडीएम विवेक राजपूत, नायब तहसीलदार नवीन कुमार और लेखपाल अभिलाष सिंह के गठजोड़ की पोल खुली थी। जून 2024 में फैसला सुनाने के बाद अधिकारियों ने अपने परिजनों और करीबियों के नाम 10 बैनामे कराए थे। इसमें लेखपाल अभिलाष सिंह के पिता सर्वेश सिंह निवासी मैनपुरी, तत्कालीन एसडीएम के गृह जनपद जालौन निवासी करीबियों और नायब तहसीलदार के ससुर, सास व साली के नाम साझेदारी में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। मामला खुलने पर तत्कालीन डीएम रमेश रंजन ने एसडीएम, नायब तहसीलदार और लेखपाल तीनों को निलंबित कर दिया था।
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