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परीक्षा केंद्र बनाने में देरी के चलते 158 शिक्षकों को नोटिस जारी
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फिरोजाबाद। यूपी बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम घोषित करने में शासन स्तर से कोई देरी नहीं की गई। मगर स्थानीय स्तर पर बोर्ड केंद्र बनाने में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। अंतिम तिथि गुजरने के बाद अभी शेष 158 कॉलेजों ने बोर्ड की वेबसाइट पर डाटा अपलोड नहीं किया है। डीआईओएस ने स्कूल प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस आने के बाद प्रधानाध्यापकों को स्पष्टीकरण देने के लिए जवाब नहीं बन रहा है।
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी माह में होनी हैं। बोर्ड ने परीक्षा कार्यक्रम पहले तय कर दिया था और परीक्षा केंद्र बनाने की प्रक्रिया को भी शुरू कर दी। छह सितंबर तक सभी कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि वह अपने कॉलेज में सुविधाओं का ब्योरा अपलोड करने और दूरी मापने के लिए जियो टैगिंग करने को कहा था, किंतु 570 विद्यालयों में 158 विद्यालयों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है। डीआईओएस रितु गोयल ने इस संबंध में वंचित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी कर दिया है। उनका कहना है कि कॉलेज स्पष्ट करें कि आखिर क्यों डाटा अपलोड नहीं किया है। अन्यथा मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए कतरा रहे कॉलेज संचालक
फिरोजाबाद। अब नकल के ठेकों पर पूरी तरह लगाम लग चुकी है। क्योंकि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में परीक्षा होती है और उत्तर-पुस्तिकाओं पर कोड अंकित रहता है। ऐसे में ठेके उठने से होने वाली कमाई बंद हो गई है। जबकि बोर्ड परीक्षा केंद्र बनवाने के लिए खर्चा बढ़ गया है। जेनरेटर, फर्नीचर का इंतजाम करना अनिवार्य है ही। लाखों रुपये के सीसीटीवी कैमरे भी लग जाते हैं। ऐसे में कई कॉलेज संचालक केंद्र बनाने से कतराते हैं। इसी कारण कई केंद्रों ने वेबसाइट पर डाटा अपलोड नहीं किया है।
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यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी माह में होनी हैं। बोर्ड ने परीक्षा कार्यक्रम पहले तय कर दिया था और परीक्षा केंद्र बनाने की प्रक्रिया को भी शुरू कर दी। छह सितंबर तक सभी कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि वह अपने कॉलेज में सुविधाओं का ब्योरा अपलोड करने और दूरी मापने के लिए जियो टैगिंग करने को कहा था, किंतु 570 विद्यालयों में 158 विद्यालयों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है। डीआईओएस रितु गोयल ने इस संबंध में वंचित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी कर दिया है। उनका कहना है कि कॉलेज स्पष्ट करें कि आखिर क्यों डाटा अपलोड नहीं किया है। अन्यथा मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।
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इसलिए कतरा रहे कॉलेज संचालक
फिरोजाबाद। अब नकल के ठेकों पर पूरी तरह लगाम लग चुकी है। क्योंकि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में परीक्षा होती है और उत्तर-पुस्तिकाओं पर कोड अंकित रहता है। ऐसे में ठेके उठने से होने वाली कमाई बंद हो गई है। जबकि बोर्ड परीक्षा केंद्र बनवाने के लिए खर्चा बढ़ गया है। जेनरेटर, फर्नीचर का इंतजाम करना अनिवार्य है ही। लाखों रुपये के सीसीटीवी कैमरे भी लग जाते हैं। ऐसे में कई कॉलेज संचालक केंद्र बनाने से कतराते हैं। इसी कारण कई केंद्रों ने वेबसाइट पर डाटा अपलोड नहीं किया है।
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