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कोरोना को हराया पर पोस्ट कोविड ने घेरा
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फिरोजाबाद। कोरोना संक्रमण को मात देने के बाद अब लोगों को पोस्ट कोविड का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना तो कुछ दिन में ठीक हो गया लेकिन जीवन भर के लिए कई बीमारियां दे गया। मेडिकल कॉलेज सहित अन्य निजी अस्पतालों में पोस्ट कोविड के शिकार मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और डायबिटीज सहित अन्य रोगों से ग्रसित लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कई मरीजों को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है।
कोरोना की दूसरी लहर ने मरीजों को दोहरा दर्द दिया। होम आइसालेशन में भर्ती मरीजों ने स्टेरॉयड से लेकर अन्य दवाओं का सेवन किया। इसके साथ ही अनियमित दिनचर्या रही। दवाइयों और एकांतवास के दौरान लोगों ने कोरोना को कुछ दिन में ही मात दे दी लेकिन बेचैनी, कमजोरी, सांस फूलना, सर्दी, खांसी, आंत में सूजन, फेफड़े में संक्रमण, त्वचा संबंधित बीमारियों, जोड़ों में दर्द रहना आदि समस्याएं रह गईं। कई लोग तो कोरोना के बाद डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के शिकार हो गए। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पोस्ट कोविड से ग्रसित 40 से 50 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, इन मरीजों को पूर्व मे कोरोना हुआ था।
केस एक
छिंगामल बाग निवासी 45 वर्षीय राजीव अग्रवाल ने कोरोना को मात दी। हालांकि बाद में उन्हें सांस फूलने की समस्या हो गई। डायबिटीज से भी वह ग्रसित हो गए। चिकित्सक ने बताया कि पोस्ट कोविड में इस प्रकार की समस्याएं आ रही हैं। अब राजीव अग्रवाल को लगातार दवाई खानी पड़ रही हैं।
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केस नंबर दो
- सुहागनगर निवासी 48 वर्षीय संध्या रावत ने बताया कि कोरोना काल में 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही थीं। कोरोना को मात दी लेकिन फेफड़ों का संक्रमण अभी तक दूर नहीं हुआ। पैरों में भी दर्द रहता है। कमजोरी अभी तक नहीं गई है। हालांकि चार माह से अधिक का समय हो चुका है।
कोरोना संक्रमण मरीजों को दोहरा दर्द दे रहा है। कोरोना से ठीक होने वाले लोग अब डायबिटीज, उक्त रक्तचाप, आंत में सूजन, फेफड़ों के संक्रमण सहित अन्य समस्याओं से ग्रसित हो गए हैं। लोग कोरोना के बाद ज्यादा परेशान हें। ऐसे मरीज प्रतिदिन ओपीडी में आ रहे हैं। कई मरीजों को हालत ज्यादा बिगड़ने पर वार्ड में भर्ती करना पड़ता है।
डॉ. मनोज कुमार, मेडिसन विभागध्यक्ष
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कोरोना की दूसरी लहर ने मरीजों को दोहरा दर्द दिया। होम आइसालेशन में भर्ती मरीजों ने स्टेरॉयड से लेकर अन्य दवाओं का सेवन किया। इसके साथ ही अनियमित दिनचर्या रही। दवाइयों और एकांतवास के दौरान लोगों ने कोरोना को कुछ दिन में ही मात दे दी लेकिन बेचैनी, कमजोरी, सांस फूलना, सर्दी, खांसी, आंत में सूजन, फेफड़े में संक्रमण, त्वचा संबंधित बीमारियों, जोड़ों में दर्द रहना आदि समस्याएं रह गईं। कई लोग तो कोरोना के बाद डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के शिकार हो गए। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पोस्ट कोविड से ग्रसित 40 से 50 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, इन मरीजों को पूर्व मे कोरोना हुआ था।
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केस एक
छिंगामल बाग निवासी 45 वर्षीय राजीव अग्रवाल ने कोरोना को मात दी। हालांकि बाद में उन्हें सांस फूलने की समस्या हो गई। डायबिटीज से भी वह ग्रसित हो गए। चिकित्सक ने बताया कि पोस्ट कोविड में इस प्रकार की समस्याएं आ रही हैं। अब राजीव अग्रवाल को लगातार दवाई खानी पड़ रही हैं।
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केस नंबर दो
- सुहागनगर निवासी 48 वर्षीय संध्या रावत ने बताया कि कोरोना काल में 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही थीं। कोरोना को मात दी लेकिन फेफड़ों का संक्रमण अभी तक दूर नहीं हुआ। पैरों में भी दर्द रहता है। कमजोरी अभी तक नहीं गई है। हालांकि चार माह से अधिक का समय हो चुका है।
कोरोना संक्रमण मरीजों को दोहरा दर्द दे रहा है। कोरोना से ठीक होने वाले लोग अब डायबिटीज, उक्त रक्तचाप, आंत में सूजन, फेफड़ों के संक्रमण सहित अन्य समस्याओं से ग्रसित हो गए हैं। लोग कोरोना के बाद ज्यादा परेशान हें। ऐसे मरीज प्रतिदिन ओपीडी में आ रहे हैं। कई मरीजों को हालत ज्यादा बिगड़ने पर वार्ड में भर्ती करना पड़ता है।
डॉ. मनोज कुमार, मेडिसन विभागध्यक्ष