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मरसलगंज में स्थापित है एक हजार वर्ष पुरानी भगवान आदिनाथ की प्रतिमा
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मरसलगंज स्थित जैन मंदिर में स्थापित भगवान आदिनाथ की प्रतिमा।
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी से करीब 21 किलोमीटर दूर बने अतिशय तीर्थक्षेत्र रिषभ नगर मरसलगंज का जैन मंदिर 600 साल पुराना है। दिगंबर क्षुल्लक बाबा ऋषभदास ने मंदिर की स्थापना कराई थी। भगवान आदिनाथ की एक हजार वर्ष से अधिक प्राचीन अतिशयकारी प्रतिमा इस मंदिर में स्थापित है।
अतीत में मरसलगंज धन-धान्य से परिपूर्ण था। जब मंदिर बनवाना प्रारंभ हुआ तो उस समय के राजा के पास जाकर कोई भूमि पर कब्जे की शिकायत कर आया। राजा ने मंदिर का निर्माण रुकवा दिया। मंदिर का निर्माण रूकते ही राजा को परेशानियां होने लगीं। तब उन्हें समझ में आया कि मंदिर का निर्माण रुकवाया है, शायद इसलिए यह बाधा उत्पन्न हो रही है। राजा तुरंत क्षुल्लक बाबा ऋषभदास से क्षमा मांगने पहुंचे। बाबा ऋषभदास ने एक विशाल शिखरयुक्त जिनालय का निर्माण कराया। करीब एक वर्ष भगवान आदिनाथ की प्रतिमा यहां स्थापित कराई।
मंदिर में है ध्यान गुफा
मंदिर परिसर में ही भगवान ऋषभदेव की नौ फीट ऊंची श्वेत प्रतिमा विराजमान है। मंदिर के भूभाग में बाबा ऋषभदास की ध्यान गुफा है। जिसमें बाबाजी की चरण पादुकाएं हैं। जैन मुनि सौभाग्य सागर की प्रेरणा से भी मरसलगंज जैन मंदिर का काफी जीर्णोद्धार हुआ है।
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प्रमुख जैन संतों ने किया है प्रवास
फिरोजाबाद। आचार्य शांतिसागर महाराज, आचार्य महावीरकीर्ती महाराज, आचार्य विमलसागर महाराज, आचार्य कल्याणसागर महाराज, आर्यिका रत्न विशुद्धिमती माताजी, बालयोगी मुनिश्री अमितसागर जी महाराज, आचार्य चैत्य सागर सहित कई साधु संत यहां वर्षायोग प्रवास कर चुके हैं।
पूरे देश से दूर-दूर से यहां यात्री आते हैं और उनकी शुद्ध ह्रदय से की गई कामनाओं की पूर्ति होती है। तभी से यह क्षेत्र दिगंबर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र मरसलगंज के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर करीब छह सौ वर्ष पुराना मंदिर है।
सुशील जैन, प्रबंधक अतिशय क्षेत्र मरसलगंज मंदिर कमेटी
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अतीत में मरसलगंज धन-धान्य से परिपूर्ण था। जब मंदिर बनवाना प्रारंभ हुआ तो उस समय के राजा के पास जाकर कोई भूमि पर कब्जे की शिकायत कर आया। राजा ने मंदिर का निर्माण रुकवा दिया। मंदिर का निर्माण रूकते ही राजा को परेशानियां होने लगीं। तब उन्हें समझ में आया कि मंदिर का निर्माण रुकवाया है, शायद इसलिए यह बाधा उत्पन्न हो रही है। राजा तुरंत क्षुल्लक बाबा ऋषभदास से क्षमा मांगने पहुंचे। बाबा ऋषभदास ने एक विशाल शिखरयुक्त जिनालय का निर्माण कराया। करीब एक वर्ष भगवान आदिनाथ की प्रतिमा यहां स्थापित कराई।
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मंदिर में है ध्यान गुफा
मंदिर परिसर में ही भगवान ऋषभदेव की नौ फीट ऊंची श्वेत प्रतिमा विराजमान है। मंदिर के भूभाग में बाबा ऋषभदास की ध्यान गुफा है। जिसमें बाबाजी की चरण पादुकाएं हैं। जैन मुनि सौभाग्य सागर की प्रेरणा से भी मरसलगंज जैन मंदिर का काफी जीर्णोद्धार हुआ है।
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प्रमुख जैन संतों ने किया है प्रवास
फिरोजाबाद। आचार्य शांतिसागर महाराज, आचार्य महावीरकीर्ती महाराज, आचार्य विमलसागर महाराज, आचार्य कल्याणसागर महाराज, आर्यिका रत्न विशुद्धिमती माताजी, बालयोगी मुनिश्री अमितसागर जी महाराज, आचार्य चैत्य सागर सहित कई साधु संत यहां वर्षायोग प्रवास कर चुके हैं।
पूरे देश से दूर-दूर से यहां यात्री आते हैं और उनकी शुद्ध ह्रदय से की गई कामनाओं की पूर्ति होती है। तभी से यह क्षेत्र दिगंबर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र मरसलगंज के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर करीब छह सौ वर्ष पुराना मंदिर है।
सुशील जैन, प्रबंधक अतिशय क्षेत्र मरसलगंज मंदिर कमेटी