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न्याय मांगने एसएसएपी दफ्तर पहुंची भीड़ को किया कैद
Amar Ujala
Updated Fri, 30 Sep 2016 12:31 AM IST
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न्याय मांगने एसएसएपी दफ्तर पहुंची भीड़ को किया कैद
- फोटो : Amar Ujala
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गैंगरेप मामले में पीड़ित परिवार की थाने से सुनवाई न होने पर एसएसपी दफ्तर पहुंचे थे लोग
दफ्तर परिसर से बाहर जाने के सभी रास्ते किए बंद, ट्रैक्टर किए जब्त, 15 हिरासत में लिए
गैंगरेप शिकार पीड़िता को न्याय न मिलने पर ग्रामीणों ने परिवार के लोगों के साथ गुरुवार को एसएसपी दफ्तर घेरा। भीड़ एसएसपी कक्ष के बाहर तक पहुंच गई और नारेबाजी की गई। इससे गुस्साए पुलिसकर्मियों ने दफ्तर कैंपस से बाहर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर ग्रामीणों को कैद कर लिया। कई ग्रामीणों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों को छुड़ाने के लिए ग्रामीण कई घंटे डेरा डाले रहे। सुनवाई न होने पर हाईवे पर आ गए।
ग्रामीणों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे पीड़ित परिवार के मुखिया ने कहा कि वह नसीरपुर थाना क्षेत्र का है। 19 सितंबर की दोपहर उसकी 14 वर्षीय पुत्री खाना देकर साइकिल से लौट रही थी। तभी गांव के समीप दूसरे गांव के वीकेश यादव ने अपने दो अन्य साथियों के साथ उसकी पुत्री के साथ गैंगरेप किया। मामले की जानकारी पर नसीरपुर थाने में तहरीर दी तो पुलिस ने मामला छेड़छाड़ में दर्ज किया और समझौते के लिए दबाव बनाने लगी। थाने में सुनवाई न होने पर एसएसपी दफ्तर आए है। यहां भी सुनवाई नहीं हो रही है। यहां एसएसपी कक्ष के बाहर ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों के रुख को देखकर पुलिसकर्मियों ने बाहर जाने के रास्ते बंद कर दिए। पुलिस ने करीब 15 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। वहीं ग्रामीणों के पांच ट्रैक्टर भी जब्त कर लिए। उधर, पुलिस द्वारा पीड़ित परिवार और ग्रामीणों के साथ किए गए व्यवहार की जानकारी पर नगर विधायक मनीष असीजा, सिरसागंज विधानसभा से बसपा प्रत्याशी योगेश बघेल, बसपा कोर्डिनेटर डा. ज्ञान सिंह के साथ अन्य नेता भी जिला मुख्यालय पहुंच गए। नेताओं संग ग्रामीणों ने हिरासत में लिए गए ग्रामीणों को छोड़ने की मांग की।
सीटी बजते ही एकत्रित हुआ था फोर्स
एक उपनिरीक्षक के साथ सिपाही ने सीटी बजाकर आफिस में काम कर रहे जवानों को अलर्ट कर दिया। कुछ ही देर में हाथ में डंडा और सिर पर टोपी लगाकर फोर्स एकत्रित हो गया। इसके बाद पुलिस ने सभी ग्रामीणों और पीड़ित परिवार को बंधक बनाकर एसएसपी आफिस के सामने बरामदे में बैठा लिया और नाम पते दर्ज कर के अभद्रता की। ग्रामीणों के विरोध पर पुलिसकर्मी बैकफुट पर आ गए।
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जिले भर से बुला लिया गया था फोर्स
ग्रामीणों को बंधक बनाए जाने के साथ ही उन्हें जेल भेजने की तैयारी भी पुलिस ने कर ली थी। ऐसे में जिले भर से पुलिस फोर्स के साथ पीएसी को भी बुला लिया गया था।
सवालों के जबाव में घिरी पुलिस, नहीं मिला उत्तर
एसएसपी अशोक कुमार ने मीडिया को बताया कि किशोरी के साथ रेप नहीं हुआ। इसकी पुष्टि मेडिकल से हुई है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस को छेड़छाड़ की तहरीर दी थी। तहरीर के आधार पर तीन युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी जांच चल रही है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब पीड़िता के पिता ने रेप की तहरीर नहीं दी तो पुलिस ने मेडिकल क्यों कराया? वहीं पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उसने आरोपी युवकों के खिलाफ गैंगरेप की तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने मेडिकल करा आरोपियों के खिलाफ केवल छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज किया।
अन्य पीड़ितों के चेहरे पर भी दिखा खौफ
ग्रामीणों को बंधक बनाए जाने के दौरान एसएसपी समेत एसपी देहात अमर सिंह और सीओ सदर श्री भगवान अपने कार्यालय में फरियादियों की समस्याएं सुन रहे थे। दर्जनों की संख्या में फरियादी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान फरियादियों में हड़कंप मच गया। फरियादी जाने लगे तो पुलिस ने उन फरियादियों को भी गेट के बाहर नहीं निकलने दिया। फरियादियों को डर सता रहा था कि नसीरपुर के लोगों के साथ पुलिस उनके खिलाफ भी कार्रवाई न कर दे।
वोट मांगने आए तो गांव से दौड़ा देना
पुलिस द्वारा बंधक बनाने के बाद छोड़े गए ग्रामीणों में नेताओं के प्रति आक्रोश नजर आया। उन्होंने कहा कि यदि गांव में कोई नेता वोट मांगने आए तो खदेड़ देना।
पानी नहीं शर्बत मिलेगा
हिरासत में लिए ग्रामीणों को पुलिस ने पानी तक नहीं पीने दिया। किसी को लघुशंका तक नहीं जाने दिया। एक ग्रामीणों ने पुलिसकर्मी से कहा कि वह पानी पीने जा रहा है तो सिपाही ने कहा कि यही बैठो पानी तो क्या तुमको अभी शर्बत भी पिलाया जाएगा।
किसी भी पीड़ित को बंधक कैद नहीं किया गया। आफिस के गेट बंद कराए गए थे। पीड़ित पक्ष ने छेड़छाड़ की तहरीर दी थी उस पर मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
अशोक कुमार एसएसपी फीरोजाबाद।
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दफ्तर परिसर से बाहर जाने के सभी रास्ते किए बंद, ट्रैक्टर किए जब्त, 15 हिरासत में लिए
गैंगरेप शिकार पीड़िता को न्याय न मिलने पर ग्रामीणों ने परिवार के लोगों के साथ गुरुवार को एसएसपी दफ्तर घेरा। भीड़ एसएसपी कक्ष के बाहर तक पहुंच गई और नारेबाजी की गई। इससे गुस्साए पुलिसकर्मियों ने दफ्तर कैंपस से बाहर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर ग्रामीणों को कैद कर लिया। कई ग्रामीणों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों को छुड़ाने के लिए ग्रामीण कई घंटे डेरा डाले रहे। सुनवाई न होने पर हाईवे पर आ गए।
ग्रामीणों के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे पीड़ित परिवार के मुखिया ने कहा कि वह नसीरपुर थाना क्षेत्र का है। 19 सितंबर की दोपहर उसकी 14 वर्षीय पुत्री खाना देकर साइकिल से लौट रही थी। तभी गांव के समीप दूसरे गांव के वीकेश यादव ने अपने दो अन्य साथियों के साथ उसकी पुत्री के साथ गैंगरेप किया। मामले की जानकारी पर नसीरपुर थाने में तहरीर दी तो पुलिस ने मामला छेड़छाड़ में दर्ज किया और समझौते के लिए दबाव बनाने लगी। थाने में सुनवाई न होने पर एसएसपी दफ्तर आए है। यहां भी सुनवाई नहीं हो रही है। यहां एसएसपी कक्ष के बाहर ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों के रुख को देखकर पुलिसकर्मियों ने बाहर जाने के रास्ते बंद कर दिए। पुलिस ने करीब 15 लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। वहीं ग्रामीणों के पांच ट्रैक्टर भी जब्त कर लिए। उधर, पुलिस द्वारा पीड़ित परिवार और ग्रामीणों के साथ किए गए व्यवहार की जानकारी पर नगर विधायक मनीष असीजा, सिरसागंज विधानसभा से बसपा प्रत्याशी योगेश बघेल, बसपा कोर्डिनेटर डा. ज्ञान सिंह के साथ अन्य नेता भी जिला मुख्यालय पहुंच गए। नेताओं संग ग्रामीणों ने हिरासत में लिए गए ग्रामीणों को छोड़ने की मांग की।
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सीटी बजते ही एकत्रित हुआ था फोर्स
एक उपनिरीक्षक के साथ सिपाही ने सीटी बजाकर आफिस में काम कर रहे जवानों को अलर्ट कर दिया। कुछ ही देर में हाथ में डंडा और सिर पर टोपी लगाकर फोर्स एकत्रित हो गया। इसके बाद पुलिस ने सभी ग्रामीणों और पीड़ित परिवार को बंधक बनाकर एसएसपी आफिस के सामने बरामदे में बैठा लिया और नाम पते दर्ज कर के अभद्रता की। ग्रामीणों के विरोध पर पुलिसकर्मी बैकफुट पर आ गए।
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जिले भर से बुला लिया गया था फोर्स
ग्रामीणों को बंधक बनाए जाने के साथ ही उन्हें जेल भेजने की तैयारी भी पुलिस ने कर ली थी। ऐसे में जिले भर से पुलिस फोर्स के साथ पीएसी को भी बुला लिया गया था।
सवालों के जबाव में घिरी पुलिस, नहीं मिला उत्तर
एसएसपी अशोक कुमार ने मीडिया को बताया कि किशोरी के साथ रेप नहीं हुआ। इसकी पुष्टि मेडिकल से हुई है। पीड़ित पक्ष ने पुलिस को छेड़छाड़ की तहरीर दी थी। तहरीर के आधार पर तीन युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी जांच चल रही है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब पीड़िता के पिता ने रेप की तहरीर नहीं दी तो पुलिस ने मेडिकल क्यों कराया? वहीं पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उसने आरोपी युवकों के खिलाफ गैंगरेप की तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने मेडिकल करा आरोपियों के खिलाफ केवल छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज किया।
अन्य पीड़ितों के चेहरे पर भी दिखा खौफ
ग्रामीणों को बंधक बनाए जाने के दौरान एसएसपी समेत एसपी देहात अमर सिंह और सीओ सदर श्री भगवान अपने कार्यालय में फरियादियों की समस्याएं सुन रहे थे। दर्जनों की संख्या में फरियादी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान फरियादियों में हड़कंप मच गया। फरियादी जाने लगे तो पुलिस ने उन फरियादियों को भी गेट के बाहर नहीं निकलने दिया। फरियादियों को डर सता रहा था कि नसीरपुर के लोगों के साथ पुलिस उनके खिलाफ भी कार्रवाई न कर दे।
वोट मांगने आए तो गांव से दौड़ा देना
पुलिस द्वारा बंधक बनाने के बाद छोड़े गए ग्रामीणों में नेताओं के प्रति आक्रोश नजर आया। उन्होंने कहा कि यदि गांव में कोई नेता वोट मांगने आए तो खदेड़ देना।
पानी नहीं शर्बत मिलेगा
हिरासत में लिए ग्रामीणों को पुलिस ने पानी तक नहीं पीने दिया। किसी को लघुशंका तक नहीं जाने दिया। एक ग्रामीणों ने पुलिसकर्मी से कहा कि वह पानी पीने जा रहा है तो सिपाही ने कहा कि यही बैठो पानी तो क्या तुमको अभी शर्बत भी पिलाया जाएगा।
किसी भी पीड़ित को बंधक कैद नहीं किया गया। आफिस के गेट बंद कराए गए थे। पीड़ित पक्ष ने छेड़छाड़ की तहरीर दी थी उस पर मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
अशोक कुमार एसएसपी फीरोजाबाद।