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नहर की सफाई के नाम पर खानापूरी, मात्र चार किमी तक निकाली सिल्ट

Mon, 18 Nov 2019 10:09 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2019 10:09 PM IST
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cleaning silt
झालगोपालपुर नहर की सफाई मात्र 4 किमी तक हुई। नहर से निकाली गई सिल्ट - फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। सुहाग नगरी को गंगाजल देने वाली झालगोपालपुर नहर में सिल्ट की सफाई के नाम पर खानापूरी हुई है। 25 किलोमीटर लंबी नहर में मात्र चार किलोमीटर सफाई की गई। नहर की पूरी सफाई न होने पर पानी का प्रवाह फिर थम सकता है। ऐसे में शहर को पुन: पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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इधर, नहर की सफाई को लेकर सिंचाई विभाग और जलकल विभाग आमने-सामने हैं। सिंचाई विभाग नगर निगम से जुडे़ जलकल विभाग के पाले में गेंद फेंक रहा है तो जल विभाग का कहना है कि नहर की सफाई का जिम्मा सिंचाई विभाग का है। सिंचाई विभाग नगर निगम से मेंटीनेंस का पैसा मांग रहा है। इधर, नगर निगम का कहना है कि शासन को इस संबंध में पत्र लिखा है।
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झालगोपालपुर नहर में बुधवार को पानी का जलस्तर घटने पर नहर से सिल्ट की सफाई का रोस्टर तय किया गया था। शुक्रवार से 25 किलो मीटर लंबी नहर की सफाई शुरू की गई। हालांकि मात्र चार किलोमीटर की ही सफाई की गई। 10 हजार क्यूसेक पानी पर चलने वाली नहर का 50 क्यूसेक पानी शहर को दिया जाता है जबकि 150 क्यूसेक पानी का प्रयोग सिंचाई विभाग करता है।
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नहर के मेंटीनेंस पर खर्च होने वाली धनराशि में नगर निगम को मात्र दो प्रतिशत देना है लेकिन नगर निगम पर इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं है। इसके लिए नगर आयुक्त पहले ही शासन को पत्र लिख चुके हैं। नहर की सफाई का जिम्मा यूं तो सिंचाई विभाग पर है लेकिन शहर को दिए जाने वाले गंगाजल को लेकर सिंचाई विभाग नगर निगम के पाले में गेंद फेंक रहा है।
सिल्ट की सफाई के लिए नगर निगम पर दबाव बना तो नगर निगम ने 40 मजदूरों की टीम दी। नगर निगम की ओर से जेसीबी भी दी गई। सिंचाई विभाग ने ट्रैक्टर आदि की मदद से तीन दिन में मात्र चार किलोमीटर तक नहर की सफाई कराई गई।
नगर निगम द्वारा मेंटीनेेंस का पैसा न दिए जाने के कारण नहर की सफाई कराने में दिक्कत आ रही है। तीन दिन में लगभग चार किलो मीटर तक नहर को साफ किया गया है।

अनवर अली - अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
नहर की सफाई कराने की जिम्मेदारी जलकल विभाग की न होने के बाद भी शहर को पानी के संकट से बचाने के लिए सिंचाई विभाग को संसाधनों से लेकर लेबर तक उपलब्ध कराई गई थी। इसके साथ ही जेई भी अपने सरकारी कार्य छोड़कर नहर की सफाई कराने में लगे रहे।
चंदन सिंह - एक्सईएन जलकल विभाग
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