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25 घंटे बाद हटा दहशत का कैप्सूल
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sat, 31 Jan 2015 11:22 PM IST
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ककरऊ कोठी के समीप बसी आबादी के लोगों ने 25 घंटे बाद राहत की सांस ली। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे विद्युत पोल से टकराए गैस से भरे कैप्सूल को कंपनी के कर्मचारियों ने क्रेनों के माध्यम से शनिवार दोपहर तीन बजे हटवाकर गंतव्य को रवाना किया। इस दौरान बाईपास मार्ग की यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के नाम पर कोई प्रयास नहीं किए गए थे।
शुक्रवार दोपहर एलपीजी टैंकर बाइक चालक को बचाने के लिए मार्ग किनारे खड़े विद्युत पोलों को तोड़ता हुआ बंबा में जा घुसा था। हादसा होते ही लोग दहशत में आ गए। पुलिस भी मौके पर पहुंची लेकिन खानापूरी कर लौट आई। अनहोनी की आशंका और एक चिंगारी शोला न बन जाए इसके चलते रात भर टैंकर के पास पुलिस बल तैनात रहा। शनिवार सुबह दिल्ली से कंपनी के अधिकारी पहुंचे इसके बाद ही टैंकर को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
उससे पहले बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने खंभों और तारों को हटवा दिया था। दूसरा इंजन मंगा कर कैप्सूल को उसमें फंसाया गया और गंतव्य को रवाना किया गया। जिस वक्त क्रेन टैंकर को निकाल रही थीं उस वक्त बंबा बाईपास पर जाम लग गया। इसके बाद भी सुरक्षा की दृष्टि से वहां न तो प्रशासनिक और न पुलिस अधिकारी पहुंचे। फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी वहां नहीं पहुंची। पूरे मामले को शुक्रवार से ही प्रशासन ने काफी हल्के से लिया। शनिवार दोपहर करीब तीन बजे टैंकर को निकाला गया तब जाकर आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली।
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इस तरह चला घटनाक्रम
- शुक्रवार रात 8.00 बजे: बिजली विभाग के कर्मचारियों ने काम बंद किया और सुबह होने का इंतजार करने लगे।
- शनिवार सुबह 8.00 बजे: विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने तार ठीक करने का काम शुरू किया।
- 11.45 बजे यूनाइटेड कंपनी के मैनेजर बीमा विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे।
- 1.00 बजे मैनेजर ने किराए पर क्रेन मंगाई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
- 1.46 बजे दूसरी क्रेन के साथ जेसीबी मशीन बुलाई।
- 2.00 बजे कैप्सूल को निकालने का कार्य शुरू।
- 2.20 बजे कंपनी के कैप्सूल का दूसरा इंजन पहुंचा।
- 2.40 पर क्रेनों के माध्यम से कैप्सूल को बंबा से निकाल कर रोड पर लाया गया।
- 2.50 पर कैप्सूल को दिल्ली से आए दूसरे इंजन में लगाया गया।
- 3.00 बजे कैप्सूल को बनारस के लिए रवाना किया गया।
- 3.05 पर लोगों के चेहरे पर खुशी के साथ राहत देखी गई।
- 3.10 बंबे में पड़े दुर्घटनाग्रस्त हुए इंजन को क्रेन के माध्यम से बाहर निकाल कर मार्ग किनारे खड़ा किया गया।
- 5.00 बजे करीब बंद पड़े विद्युत फीडरों की सप्लाई को शुरू किया गया।
नहीं जले थे चूल्हे, दहशत में थे लोग
दुर्घटनाग्रस्त हुए कैप्सूल के बाद आसपास के घरों में शुक्रवार शाम और शनिवार सुबह चूल्हे नहीं जल सके। लोगों को इस बात का खतरा बना हुआ था, कि कहीं गैस लीक हुई और उसने आग पकड़ी तो मंजर भयावह होगा।
दस किलो मीटर तक फैलती तबाही
यूनाइेट कंपनी के मैनेजर वीके सिंह ने बताया कैप्सूल में करीब 17 टन गैस भरी थी। यदि गैस लीकेज होने या फिर कैप्सूल फटता तो इसकी मार दस किलो मीटर तक होती। इसको रोकने के लिए यहां कोई ऐसा साधन भी प्रशासन की ओर से नहीं किया गया था।
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शुक्रवार दोपहर एलपीजी टैंकर बाइक चालक को बचाने के लिए मार्ग किनारे खड़े विद्युत पोलों को तोड़ता हुआ बंबा में जा घुसा था। हादसा होते ही लोग दहशत में आ गए। पुलिस भी मौके पर पहुंची लेकिन खानापूरी कर लौट आई। अनहोनी की आशंका और एक चिंगारी शोला न बन जाए इसके चलते रात भर टैंकर के पास पुलिस बल तैनात रहा। शनिवार सुबह दिल्ली से कंपनी के अधिकारी पहुंचे इसके बाद ही टैंकर को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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उससे पहले बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने खंभों और तारों को हटवा दिया था। दूसरा इंजन मंगा कर कैप्सूल को उसमें फंसाया गया और गंतव्य को रवाना किया गया। जिस वक्त क्रेन टैंकर को निकाल रही थीं उस वक्त बंबा बाईपास पर जाम लग गया। इसके बाद भी सुरक्षा की दृष्टि से वहां न तो प्रशासनिक और न पुलिस अधिकारी पहुंचे। फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी वहां नहीं पहुंची। पूरे मामले को शुक्रवार से ही प्रशासन ने काफी हल्के से लिया। शनिवार दोपहर करीब तीन बजे टैंकर को निकाला गया तब जाकर आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली।
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इस तरह चला घटनाक्रम
- शुक्रवार रात 8.00 बजे: बिजली विभाग के कर्मचारियों ने काम बंद किया और सुबह होने का इंतजार करने लगे।
- शनिवार सुबह 8.00 बजे: विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने तार ठीक करने का काम शुरू किया।
- 11.45 बजे यूनाइटेड कंपनी के मैनेजर बीमा विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे।
- 1.00 बजे मैनेजर ने किराए पर क्रेन मंगाई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
- 1.46 बजे दूसरी क्रेन के साथ जेसीबी मशीन बुलाई।
- 2.00 बजे कैप्सूल को निकालने का कार्य शुरू।
- 2.20 बजे कंपनी के कैप्सूल का दूसरा इंजन पहुंचा।
- 2.40 पर क्रेनों के माध्यम से कैप्सूल को बंबा से निकाल कर रोड पर लाया गया।
- 2.50 पर कैप्सूल को दिल्ली से आए दूसरे इंजन में लगाया गया।
- 3.00 बजे कैप्सूल को बनारस के लिए रवाना किया गया।
- 3.05 पर लोगों के चेहरे पर खुशी के साथ राहत देखी गई।
- 3.10 बंबे में पड़े दुर्घटनाग्रस्त हुए इंजन को क्रेन के माध्यम से बाहर निकाल कर मार्ग किनारे खड़ा किया गया।
- 5.00 बजे करीब बंद पड़े विद्युत फीडरों की सप्लाई को शुरू किया गया।
नहीं जले थे चूल्हे, दहशत में थे लोग
दुर्घटनाग्रस्त हुए कैप्सूल के बाद आसपास के घरों में शुक्रवार शाम और शनिवार सुबह चूल्हे नहीं जल सके। लोगों को इस बात का खतरा बना हुआ था, कि कहीं गैस लीक हुई और उसने आग पकड़ी तो मंजर भयावह होगा।
दस किलो मीटर तक फैलती तबाही
यूनाइेट कंपनी के मैनेजर वीके सिंह ने बताया कैप्सूल में करीब 17 टन गैस भरी थी। यदि गैस लीकेज होने या फिर कैप्सूल फटता तो इसकी मार दस किलो मीटर तक होती। इसको रोकने के लिए यहां कोई ऐसा साधन भी प्रशासन की ओर से नहीं किया गया था।