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Fatehpur News: जलभराव से कृषि जमीन बचाने आगे आईं महिलाएं
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फतेहपुर। नगर पालिका क्षेत्र के चौदखियापुर के किसानों ने आरपार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। महिलाओं का कहना है कि जलनिकासी नहीं हुई, तो रेलवे लाइन पर बना पुल आंदोलनकारी बंद कर देंगे, मिश्रित 1300 की आबादी वाले चौदखियापुर में लोधी, रैदास, कुर्मी, कोरी, पासवान और नाई बिरादरी के भूमिधर लोग रहते हैं। इनकी करीब एक हजार से अधिक कृषि योग्य जमीन झाऊपुर नाले के पानी के जलभराव से प्रभावित है। इस जमीन में पांच साल से जलभराव है। किसान केवल धान की फसल रोपित करता है, लेकिन वह भी डूबकर सड़ जाती है। यहां के निवासी अन्न के लिए परेशान हैं। यह स्थिति नई रेलवे लाइन बनने के बाद उत्पन्न हुई है।
मंगलवार को जलभराव से प्रभावित जमीन पर महिला और पुरुष किसानों ने प्रशासन और नगर पालिका के विरोध में नारेबाजी की। किसानों ने दो टूक कहा कि अगर जलभराव की समस्या से निजात नहीं मिलती है, तो वह रेलवे लाइन पर नाले का बना पुल बंद कर देंगे।
गेहूं बुआई को देखते हुए किसान जलभराव से प्रभावित खेत खाली करने का प्रयास कर रहे हैं। दिन रात किसान खेतों में भरा पानी हाथों से दूसरे खेत में डालते हैं। जलभराव से फिलहाल किसानों को निजात मिलती नहीं दिख रही है।
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रेलवे ने नगर पालिका को नाला सफाई के लिए अनुमति दे दी है। डेडिकेटेड फ्रेट कोरीडोर कॉर्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड रेल मंत्रालय प्रयागराज के परियोजना प्रबंधक प्रकाश चंद्र ने नगर पालिका को नाले की सिल्ट सफाई के लिए अनुमति दे दिया है। पत्र में कहा गया है कि आप्टिकल फाइबर केबिल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नाले की सफाई मैनुअल तरीके से कराया जाए। नाले का काम शुरू कराने के 48 घंटे पहले सूचित करने को कहा गया है।
आर्थिक तंगहाली का सामना कर रही चौदखियापुर की आबादी नाले की सिल्ट सफाई में मजदूरी करने को तैयार है। लोग कहते हैं कि अगर जल्द सफाई शुरू होती है, तो उनके खेत गेहूं की फसल के लिए खाली हो सकते हैं। ऐसे में वह नाले में मजदूरी कर सकते हैं।
चौदखियापुर निवासी रन्नोदेवी का कहना है कि पैतृक जमीन में जलभराव के कारण कोई फसल पैदा नहीं हो रही है। बच्चे भुखमरी के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में नाले का पानी आबादी के पहले रोका जाएगा। इसके लिए चाहे फिर पुलिस के हाथ जान देना पड़े।
यहीं की रहने वाली निर्मला कहती हैं कि एक व्यक्ति की मजदूरी पर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। पैतृक जमीन सिर्फ अभिलेखों में दर्ज है। इससे परिवार को कुछ हासिल नहीं हो रहा है। जलभराव से खेत खाली करने के लिए महिलाएं जान की बाजी लगाने में अब पीछे नहीं हटेंगी।
नीलू देवी कहती हैं कि प्रशासन शहरीय क्षेत्र का पानी शहर क्षेत्र में रोके। इस पानी का खामियाजा आखिर यहां की आबादी क्यों भुगते। अब यह तो नाले की खोदाई कराकर उनके खेत खाली कराए जाएं या फिर नाला रोकने के लिए महिलाएं मोर्चा संभालेंगी। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
शारदा देवी का कहना है कि अब करो या मरो की नीति अपनाना होगा, तभी जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी। बार-बार शिकायत करने का प्रशासन पर कोई असर पडऩे वाला नहीं है। नाला ठीक नहीं हुआ, तो बारिश का पानी चौदखियापुर नहीं आएगा। इसके लिए महिलाएं सबकुछ करने में पीछे नहीं रहेंगी।
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मंगलवार को जलभराव से प्रभावित जमीन पर महिला और पुरुष किसानों ने प्रशासन और नगर पालिका के विरोध में नारेबाजी की। किसानों ने दो टूक कहा कि अगर जलभराव की समस्या से निजात नहीं मिलती है, तो वह रेलवे लाइन पर नाले का बना पुल बंद कर देंगे।
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गेहूं बुआई को देखते हुए किसान जलभराव से प्रभावित खेत खाली करने का प्रयास कर रहे हैं। दिन रात किसान खेतों में भरा पानी हाथों से दूसरे खेत में डालते हैं। जलभराव से फिलहाल किसानों को निजात मिलती नहीं दिख रही है।
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रेलवे ने नगर पालिका को नाला सफाई के लिए अनुमति दे दी है। डेडिकेटेड फ्रेट कोरीडोर कॉर्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड रेल मंत्रालय प्रयागराज के परियोजना प्रबंधक प्रकाश चंद्र ने नगर पालिका को नाले की सिल्ट सफाई के लिए अनुमति दे दिया है। पत्र में कहा गया है कि आप्टिकल फाइबर केबिल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नाले की सफाई मैनुअल तरीके से कराया जाए। नाले का काम शुरू कराने के 48 घंटे पहले सूचित करने को कहा गया है।
आर्थिक तंगहाली का सामना कर रही चौदखियापुर की आबादी नाले की सिल्ट सफाई में मजदूरी करने को तैयार है। लोग कहते हैं कि अगर जल्द सफाई शुरू होती है, तो उनके खेत गेहूं की फसल के लिए खाली हो सकते हैं। ऐसे में वह नाले में मजदूरी कर सकते हैं।
चौदखियापुर निवासी रन्नोदेवी का कहना है कि पैतृक जमीन में जलभराव के कारण कोई फसल पैदा नहीं हो रही है। बच्चे भुखमरी के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में नाले का पानी आबादी के पहले रोका जाएगा। इसके लिए चाहे फिर पुलिस के हाथ जान देना पड़े।
यहीं की रहने वाली निर्मला कहती हैं कि एक व्यक्ति की मजदूरी पर परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। पैतृक जमीन सिर्फ अभिलेखों में दर्ज है। इससे परिवार को कुछ हासिल नहीं हो रहा है। जलभराव से खेत खाली करने के लिए महिलाएं जान की बाजी लगाने में अब पीछे नहीं हटेंगी।
नीलू देवी कहती हैं कि प्रशासन शहरीय क्षेत्र का पानी शहर क्षेत्र में रोके। इस पानी का खामियाजा आखिर यहां की आबादी क्यों भुगते। अब यह तो नाले की खोदाई कराकर उनके खेत खाली कराए जाएं या फिर नाला रोकने के लिए महिलाएं मोर्चा संभालेंगी। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
शारदा देवी का कहना है कि अब करो या मरो की नीति अपनाना होगा, तभी जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी। बार-बार शिकायत करने का प्रशासन पर कोई असर पडऩे वाला नहीं है। नाला ठीक नहीं हुआ, तो बारिश का पानी चौदखियापुर नहीं आएगा। इसके लिए महिलाएं सबकुछ करने में पीछे नहीं रहेंगी।