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बेमौसम बारिश-आंधी ने मचाई तबाही, किसानों को भारी नुकसान
ब्यूरो,अमर उजाला फतेहपुर
Updated Mon, 16 Mar 2015 12:41 AM IST
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एक तरफ लगातार आंधी-पानी दूसरी तरफ हाड़ तोड़ मेहनत कर तैयार कई अपनी फसलों को बर्बाद होता देखकर खून के आंसू रोता किसान। बेमौसम बारिश किसानों के लिए तबाही का मंजर लेकर आई है। खरीफ की फसल में बारिश ने ठेंगा दिखाया। अब रबी की फसल में जब पानी की जरूरत नहीं है तो बारिश कहर बरपा रही है।
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जिले में दो लाख 88 हजार 731 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिसमें सिंचित भूमि एक लाख 96 हजार 978 हेक्टेयर है। दो लाख 25 हजार छोटे, बड़े और मंझोले किसान खेती कर अपना पेट पालते हैं।
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एक अनुमान के मुताबिक बारिश से किसानों की लगभग पचास फीसदी फसल चौपट हो गई। चैत्र माह के पहले पखवारे की बेमौसम बारिश में एक बार फिर से किसानों की तबाही का मंजर नजर आया।
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शनिवार की रात बेमौसम बारिश से किसानों पूरी तरह से बर्बाद हो गए। इसमें गेहूं, आलू, अरहर और राई की फसलों में भारी नुकसान से किसान हताहत है।
रबी की फसल में गेहूं एक लाख 76 हजार, चना 41 हजार 896 हेक्टेयर, आलू नौ हजार हेक्टेयर, राई 17 हजार 747 हेक्टेयर बुआई की गई है। खरीफ की फसल में कर्ज से दबे किसान मजदूरी करके परिवार का भरणपोषण कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा की गई फसल बर्बादी के मुआवजे की घोषणा सिर्फ कागजी बनी हुई है, अभी तक किसी भी तहसील क्षेत्र में फसलों के नुकसान की पड़ताल नहीं की गई है।
जयसिंहपुर गांव के किसान शत्रुघन सिंह, सातो के किसान सुमेर सिंह ने बताया कि आलू की खुदाई शुरू है, खोदे गए आलू का ढेर खेत में लगा हुआ है। बारिश में भीगने से आलू के खराब होने के आसार है।
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फसलों की कटाई के समय पानी ने किया बर्बाद
फतेहपुर। चैत्र माह के दूसरे पखवारे से किसानों की फसलें काटने की स्थित में पहुंच जाती है लेकिन इस वर्ष बेमौसम की बारिश से फसलें अभी भी हरी भरी बनी हुई है। चना, अरहर में तो अभी तक फूल भी नहीं लगे हैं। किसान सुरेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि बारिश से आलू में 50 फीसदी से अधिक नुकसान हो गया है। आलू की बुआई में बीज, खाद और खेत जोताई की लगाई गई लागत भी नहीं निकल पाएगी। किसान ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल में गिर गई है, गेहूं की पैदावार में 50 से 55 फीसदी की कमी आ जाएगी।
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अभी तक खरीफ फसलों का मुआवजा नहीं मिला
फतेहपुर। प्रदेश सरकार ने बारिश में 50 फीसदी से अधिक फसलों के नुकसान पर मुआवजे की घोषणा की है लेकिन अभी तक खरीफ की फसलों का मुआवजा किसानों को नहीं मिला है। खरीफ की फसल का मुआवजा न मिलने से किसानों को प्रदेश सरकार द्वारा की गई घोषणा से विशेष प्रभाव नहीं दिख रहा है। एक मार्च से हुई बारिश से सरकार ने सिंचित फसलों में नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर और असिंचित फसलों के लिए 4500 रुपये प्रति हेक्टेयर के मुआवजे की घोषणा है। खरीफ के फसल के कृषि बीमा की धनराशि 14 करोड़ 21 लाख 46 हजार 396 रुपये आ गई है लेकिन अभी तक फसल बर्बादी के मुआवजे की धनराशि नहीं आई है। तहसीलदार रामशिरोमणि ने बताया कि फसलों के नुकसान की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। इसके लिए हल्का लेखपालों को निर्देशित कर दिया गया है। जल्द ही नुकसान की पड़ताल कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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‘कृषि बीमा की धनराशि मिल गई है। फसल बर्बादी के मुआवजे के लिए 50 करोड़ की डिमांड बनाकर शासन को भेजी गई है। बारिश से बर्बाद हुई रबी की फसलों की रिपोर्ट एक हफ्ते में शासन को भेजी जाएगी।’- रविकांत सिंह, जिला कृषि अधिकारी।