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दशकों से धर्मान्तरण को लेकर सक्रिय हैं %सिंडीकेट%

Wed, 23 Jun 2021 11:58 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jun 2021 11:58 PM IST
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two natives of umar village have converted to muslim
हसवा (फतेहपुर)। पंथुआ गांव में कुछ और भी लोग धर्मांतरण का शिकार हुए हैं। जिनका धर्म परिवर्तन अंदौली गांव के एक व्यक्ति ने कराया था। दशकों से क्षेत्र में धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
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श्याम प्रताप उर्फ मो. उमर गौतम की गिरफ्तारी के बाद जिले में धर्म परिवर्तन को लेकर नई कड़ियां जुड़ रही हैं। मो. उमर के गांव के दो लोग और हैं, जिन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया। इनके परिजनों ने बताया कि गांव छोड़े हुए कई साल हो चुके हैं। गांव निवासी खेल्लन पुत्र रामधनी ने करीब 10 साल पहले मुस्लिम धर्म अपनाया था। खेल्लन अंदौली के युवक के संपर्क में आया था, जिसके बाद उस युवक से खेल्लन की दोस्ती हो गई। बाद में एक दिन खेल्लन गांव में मुस्लिम वेशभूषा में आया। परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया। तीन माह बाद टोपी, कुर्ता, पजामा व मिली धनराशि अंदौली में दे आया और फिर हिंदू रीति रिवाज से रहने लगा। वर्तमान में वह कानपुर में रहता है।
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इसी प्रकार गांव का ही विजय पुत्र रामा मौर्य शहर के एक होटल में नौकरी करता था। वहां पर एक मुस्लिम महिला के संपर्क में आ गया। उसने महिला से शादी की और धर्म परिवर्तन कर लिया। घर वालों को जानकारी हुई तो उन्होंने महिला को स्वीकार नहीं किया। मुस्लिम बना विजय अब अपनी पत्नी को लेकर शहर के कबाड़ी मार्केट के पास रह रहा है। भाई ओमप्रकाश ने बताया कि वह कभी-कभी गांव आता है। लेकिन उसकी पत्नी व बच्चे गांव नहीं आते हैं।
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धर्म परिवर्तन को लेकर केवल मुस्लिम ही नहीं बल्कि क्षेत्र में ईसाई मिशनरी भी सक्रिय हैं। क्षेत्र के टीसी गांव में धर्म परिवर्तन को लेकर बजरंग दल ने जमकर विरोध किया था। जिसमें कई लोग मारे-पीटे गए थे। ईसाई मिशन से जुड़े लोगों ने भाजपा के हसवा मंडल अध्यक्ष राकेश मौर्य के खिलाफ थाने में तहरीर भी दी थी। एक संस्था के लोग गरीब बच्चों को गोद लेते है। जिसका सारा धन बाहर से आता है। गरीब घरों में मीटिंग रखी जाती है। जहां पर कुछ वक्ता ईसाई धर्म के प्रति इन सभी को प्रभावित करते हैं। क्षेत्र के मिचकी, भैंरवा, एकारी, अतरहा आदि गांवों में यह संस्था काम कर रही है। इनका पहला टारगेट गरीब व अनुसूचित जाति के लोग रहते है। पैसों के प्रलोभन से कई गरीब परिवार ईसाई धर्म अपना चुके हैं।
एटीएस प्रयागराज ने जिले में डेरा डाल दिया है। पुलिस लाइन में टीम रुकी है और अपने तरीके से काम कर रही है। 20 तारीख को एटीएस पंथुआ गांव पहुंची थी। वहां पर लोगों से जानकारी ली थी। इसके बाद चली गई थी।
श्याम प्रताप से उमर गौतम बनने के बाद पत्नी राजेश्वरी को रजिया बेगम बनना पड़ा। राजेश्वरी के माता-पिता व भाई कोई भी नहीं चाहते थे कि उनके घर की बेटी को मुस्लिम बनना पड़े। मुस्लिम धर्म न अपनाना पड़े उसके लिए राजेश्वरी अपने मायके खेसहन में रही, लेकिन करीब चार साल बाद राजेश्वरी उमर की जिद के आगे झुक गई। अंत में उसको दिल्ली जाना पड़ा। श्याम के उमर गौतम बनने पर एक बार खेसहन गांव में पंचायत भी हुई, जिसमें श्याम के परिवार के लोग व राजेश्वरी के घर के लोग शामिल रहे। यहां तक कि ससुराल के लोगों ने अपना व्यवसाय व नगदी रुपये देने की बात कही, लेकिन उमर ने दोबारा धर्म परिवर्तन करने से मना कर दिया था।

हसवा। उमर के घर के सामने अभी भी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। लोग दिनभर अखबार व सोशल मीडिया में चल रही खबरों के बारे में बातचीत करते रहते हैं। चचेरे भाई राजू सिंह गौतम ने बताया कि दर्जनों लोग दरवाजे पर जमा रहते हैं। अखबारों में जो छपा उसके आधार पर उनको जानकारी मिलती है। राजू ने बताया कि उमर अगर आतंकवादी है तो उसको सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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